ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली से गोरखपुर पहुंची निलंबित BSA, भेजी गई जेल; लिपिक की तलाश तेज
शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में नामजद निलंबित देवरिया की पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर गोरखपुर लाया गया। प ...और पढ़ें

आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के मुकदमे में 25 हजार की इनामी थी शालिनी। जागरण
HighLights
निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव दिल्ली से गोरखपुर लाई गईं।
शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में हुई गिरफ्तारी।
पूछताछ के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में नामजद और 25 हजार रुपये की इनामी निलंबित देवरिया की पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव को गुलरिहा पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर बुधवार को गोरखपुर लेकर पहुंची।
पूछताछ कर दोपहर बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। करीब चार माह से फरार चल रही शालिनी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का पूरा फोकस सहआरोपित निलंबित लिपिक संजीव सिंह पर है, जो अभी भी पकड़ से बाहर है।
शालिनी श्रीवास्तव पत्नी सौरभ कुमार सिन्हा मूल रूप से बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित आनंद नगर, बड़ी काली मंदिर की निवासी है। पुलिस के अनुसार तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से उनकी लोकेशन नई दिल्ली में मिली थी।
इसके बाद गुलरिहा पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद टीम उन्हें लेकर गोरखपुर रवाना हुई और बुधवार सुबह यहां पहुंची।
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि दोनों ने शिक्षक को लगातार प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।
तहरीर के आधार पर गुलरिहा थाने में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने, धमकी देने, साक्ष्य मिटाने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी।
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आरोप है कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित भी किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली। जांच के दौरान कृष्णमोहन की जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद से दोनों आरोपित फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने के साथ 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। शालिनी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी, लेकिन राहत नहीं मिल सकी।
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अब फरार लिपिक पर शिकंजा
शालिनी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी निलंबित लिपिक संजीव सिंह की तलाश और तेज कर दी है। संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। स्वजन और करीबी लोगों से पूछताछ कर उसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तारी नहीं होने की स्थिति में संजीव सिंह की संपत्ति कुर्क कराने की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जेल में दाखिले के दौरान दिखी घबराहट, देर तक रही खामोश
जिला कारागार के मुख्य द्वार पर बुधवार को जब पुलिस वाहन पहुंचा तो उसमें बैठी निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के चेहरे पर घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। पिछले चार माह से गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलने वाली शालिनी को शायद यह अंदाजा था कि गिरफ्तारी के बाद जेल की सलाखों तक पहुंचने का सफर यहीं आकर थमेगा।
जेल सूत्रों के अनुसार दाखिले की औपचारिक प्रक्रिया के दौरान शालिनी काफी तनाव में दिखीं। आवश्यक कागजी कार्रवाई और स्वास्थ्य परीक्षण के समय भी वह काफी कम बोलीं। कुछ समय के लिए वह भावुक भी हो गईं।पुलिस अभिरक्षा से जेल प्रशासन को सौंपे जाने के बाद उन्हें महिला बैरक में रखा गया है। सुरक्षा कारणों से उनकी निगरानी के विशेष निर्देश दिए गए हैं। जेल प्रशासन ने नियमानुसार उनका मेडिकल परीक्षण कराने के बाद बैरक आवंटित कर दिया। चार माह तक फरारी काटने के बाद जेल पहुंची शालिनी को लेकर जिला कारागार और पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर चलता रहा।