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    UP में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम लागू, अब चलती ट्रेन, बस या विमान में भी देनी होगी सूचना

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 12:23 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2026 लागू की है, जिसमें चलती गाड़ियों में जन्म-मृत्यु की सूचना पहले ठहराव पर देने का प्रावध ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. चलती गाड़ियों में जन्म-मृत्यु की सूचना पहले ठहराव पर दें।

    2. जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन में देना अनिवार्य।

    3. विलंब होने पर निर्धारित शुल्क के साथ पंजीकरण संभव।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 लागू कर दी है। नई नियमावली में जन्म या मृत्यु की सूचना देने की समय सीमा, विलंबित पंजीकरण, चलती ट्रेन, बस, विमान या नाव जैसे यानों में जन्म अथवा मृत्यु की स्थिति, प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया और रिकार्ड के डिजिटलीकरण सहित कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा नई नियमावली के तहत जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म रजिस्टरों को स्थायी अभिलेख घोषित किया गया है।

    इन्हें नष्ट नहीं किया जाएगा। रजिस्ट्रार एक वर्ष तक अभिलेख अपने कार्यालय में सुरक्षित रखेगा, इसके बाद उन्हें जिला रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित अभिरक्षा में भेज दिया जाएगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।

    नई नियमावली के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का जन्म या मृत्यु किसी चलित यान में होती है तो संबंधित यान का प्रभारी इसकी सूचना पहले ठहराव वाले स्थान के जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार को देगा या दिलवाएगा। नियमावली में ‘यान’ की परिभाषा केवल ट्रेन या विमान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नाव, जहाज, मोटर कार, बस, मोटरसाइकिल, तांगा, रिक्शा तथा भूमि, जल और वायु में चलने वाले सभी प्रकार के वाहन शामिल हैं।

    इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रा के दौरान हुई ऐसी घटनाओं का समय पर और सही स्थान पर पंजीकरण हो सके तथा बाद में जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक समस्या न आए।

    बच्चे का नाम 12 माह तक दर्ज कराया जा सकेगा
    नियमावली में बच्चों के नाम दर्ज कराने को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। यदि किसी नवजात का जन्म बिना नाम के पंजीकृत कराया गया है तो माता-पिता या अभिभावक जन्म पंजीकरण की तिथि से 12 माह के भीतर रजिस्ट्रार को बच्चे का नाम मौखिक अथवा लिखित रूप से बता सकते हैं। यदि किसी कारणवश एक वर्ष के भीतर नाम दर्ज नहीं कराया जा सका, तब भी बच्चे का नाम 15 वर्ष तक दर्ज कराया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और नियमानुसार विलंब शुल्क जमा करना होगा।

    नाम लिखने का प्रारूप तय, पता और तिथि दर्ज करने के भी नए मानक
    सरकार ने नाम दर्ज करने के तरीके का भी मानक निर्धारित कर दिया है। अब सभी प्रपत्रों में नाम प्रथम नाम, मध्य नाम और अंतिम नाम के रूप में दर्ज किया जाएगा। किसी भी प्रकार के संक्षिप्ताक्षर या इनिशियल स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इससे भविष्य में पहचान संबंधी विवादों और दस्तावेजों में नामों की असमानता को कम करने में मदद मिलेगी।

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    नियमावली के अनुसार सभी प्रपत्रों में तिथि दिन-माह-वर्ष के प्रारूप में लिखी जाएगी, जिसमें दिन और माह दो-दो अंकों तथा वर्ष चार अंकों में होगा। वहीं पता दर्ज करते समय राज्य, जिला, उपजिला, नगर अथवा गांव, वार्ड संख्या, मोहल्ला, मकान संख्या और पिनकोड का उल्लेख करना अनिवार्य होगा।

    21 दिन में सूचना देना अनिवार्य, देरी पर लगेगा विलंब शुल्क
    सरकार ने जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म की सूचना देने की समय सीमा 21 दिन निर्धारित की है। यदि सूचना समय पर नहीं दी जाती है तो विलंबित पंजीकरण की अलग-अलग व्यवस्था लागू होगी। यदि जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन बाद लेकिन 30 दिन के भीतर दी जाती है तो 20 रुपये विलंब शुल्क देना होगा।

    यदि सूचना 30 दिन से एक वर्ष के बीच दी जाती है तो संबंधित प्राधिकारी की लिखित अनुमति, स्व-प्रमाणित दस्तावेज और 50 रुपये विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण होगा। एक वर्ष से अधिक विलंब होने पर संबंधित जिला मजिस्ट्रेट, उप जिला मजिस्ट्रेट अथवा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश तथा 100 रुपये विलंब शुल्क के बाद ही पंजीकरण किया जाएगा।

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    30 दिन में मिलेगा जन्म या मृत्यु प्रमाण-पत्र, प्रमाण-पत्र और खोज शुल्क भी निर्धारित
    नई नियमावली में इलेक्ट्रानिक रजिस्टर को भी मान्यता दी गई है। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र इलेक्ट्रानिक अथवा अन्य माध्यम से जारी किए जाएंगे। घर में हुई जन्म या मृत्यु की घटनाओं में संबंधित परिवार 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार से प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेगा। संस्थागत जन्म या मृत्यु के मामलों में अस्पताल या संबंधित संस्था 30 दिन के भीतर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराएगी।

    यदि निर्धारित अवधि में प्रमाण-पत्र नहीं लिया जाता है तो संस्था या रजिस्ट्रार अगले 15 दिनों के भीतर डाक से प्रमाण-पत्र भेजेंगे। नियमावली में जन्म या मृत्यु संबंधी अभिलेखों की खोज के लिए 20 रुपये, अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष की खोज के लिए 20 रुपये, जन्म या मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए 50 रुपये तथा अनुपलब्धता प्रमाण-पत्र के लिए 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।


    उत्तर प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली लागू कर दी गई है। इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु संबंधी रिकार्ड को अधिक विश्वसनीय बनाना है ताकि नागरिकों को शिक्षा, पासपोर्ट, आधार, उत्तराधिकार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा अन्य सरकारी सेवाओं में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

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    -गौरव रंजन श्रीवास्तव, अपर नगर आयुक्त