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    UP में चुनाव से पहले भाजपा की संगठनात्मक सुस्ती, कई घोषणा अटकी

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 11:56 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की संगठनात्मक सुस्ती कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा कर रही है। क्षेत्रीय अध्यक्ष, प्रदेश और जिला कार् ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. क्षेत्रीय अध्यक्ष, प्रदेश, जिला कार्यकारिणी की घोषणाएं लंबित।

    2. कार्यकर्ताओं में निराशा, चुनावी तैयारियों पर पड़ रहा असर।

    3. गोरखपुर, देवरिया में जिलाध्यक्ष पद अभी भी खाली।

    डॉ. राकेश राय, गोरखपुर। विधानसभा चुनाव-2027 की प्रक्रिया शुरू होने में अब अधिकतम आठ माह का समय शेष है, लेकिन संगठनात्मक तैयारियों को लेकर पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्षेत्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा लंबित होने से प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया अटकी हुई है। स्थिति यह हैं कि जिला कार्यकारिणी की सूची तैयार होने के बावजूद उसे अंतिम रूप नहीं दिया जा पा रहा, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा पनपने लगी है।

    पार्टी से मिली जानकारी के अनुसार जिलाध्यक्ष की ओर से जिला कार्यकारिणी का प्रारूप तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजा जा चुका है, लेकिन प्रदेश स्तर पर बैठक न हो पाने के कारण उस पर अंतिम मुहर नहीं लग पा रही है। संगठन के सूत्रों का कहना है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा के बाद ही आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी, इसलिए इसे लेकर मामला ठप पड़ा हुआ है।

    प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर भी लगातार कवायद हो रही है लेकिन धरातल पर कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आ रहा। कभी कहा जाता है कि पहले प्रदेश कार्यकारिणी बनेगी, तो कभी जिला कार्यकारिणी के गठन की बात आगे कर दी जाती है। वहीं बीच-बीच में प्रदेश भर के क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदले जाने की चर्चा में सामने आती रही है, जिससे संगठन के भीतर अनिश्चितता की स्थिति पटल पर आने लगी है।

    भाजपा के गोरखपुर संगठनात्मक क्षेत्र की बात करें तो स्थिति और भी जटिल मानी जा रही है। देवरिया और गोरखपुर महानगर जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिलों में अभी तक जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं हो सकी है। गोरखपुर महानगर में फिलहाल संयोजक के सहारे काम चलाया जा रहा है। चूंकि संयोजक के अधिकार सीमित होते हैं, ऐसे में कई औपचारिक संगठनात्मक निर्णयों को लेकर स्पष्टता नहीं बन पा रही।

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    अब तो कुछ पदाधिकारी व कार्यकर्ता सामूहिक रूप से यह भी कहने लगे हैं कि जब तक नियमित जिलाध्यक्ष और कार्यकारिणी नहीं बनती, तब तक संगठन पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएगा। चुनावी तैयारी पर असर पड़ेगा।

    संगठन के अंदर यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी और जिला कार्यकारिणी की घोषणाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि किसी एक निर्णय में देरी होने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। बीते करीब एक महीने से लगातार बैठकों की चर्चा तो हो रही है, लेकिन अंतिम निर्णय सामने नहीं आ पा रहा।

    इस देरी का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ रहा है। कुछ कार्यकर्ता अब खुले तौर पर संगठन की धीमी चाल पर सवाल उठाने लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही क्षेत्रीय अध्यक्ष और प्रदेश व जिला कार्यकारिणियों की घोषणा नहीं हुई तो इसका नकारात्मक असर चुनावी तैयारियों पर दिखने लगेगा।

    प्रदेश अध्यक्ष से भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब
    पखवारे भर पहले जब अपने गोरखपुर आवास पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे तो जागरण की ओर से जिला कार्यकारिणी के गठन में देरी सवाल उठाया गया। इसे लेकर कार्यकर्ताओं मेंं ऊहापोह की स्थिति का हवाला भी दिया गया लेकिन प्रदेश अध्यक्ष इसे लेकर कुछ भी स्पष्ट करने में असमर्थ दिखे। जल्द ही घोषणा हो जाएगी, यह कहकर बात टाल गए।