25 जुलाई को रखा जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, 26 जुलाई को होगा पारण; चातुर्मास का होगा शुभारंभ
हापुड़ में देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई को ब्रह्म और ऐंद्र योग के शुभ संयोग में रखा जाएगा। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले ...और पढ़ें

25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
HighLights
देवशयनी एकादशी व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा।
ब्रह्म और ऐंद्र योग का शुभ संयोग बन रहा है।
भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में जाएंगे।
संवाद सहयोगी, हापुड़। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 25 जुलाई (शनिवार) को रखा जाएगा। इस दिन ब्रह्म और ऐंद्र योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे व्रत एवं भगवान विष्णु के पूजन का महत्व और बढ़ गया है।
देवलोक कालोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय के ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 24 जुलाई को प्रातः नौ बजकर 13 मिनट से शुरू होकर 25 जुलाई को प्रातः 11 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 25 जुलाई को ही शास्त्र सम्मत माना गया है, जबकि पारण 26 जुलाई (रविवार) को प्रातः लगभग नौ बजकर 30 मिनट तक करना शुभ रहेगा
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का शुभारंभ
उधर, ज्योतिर्विद प्रीति पांडेय ने बताया कि देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार माह तक विशेष साधना, जप, तप व दान-पुण्य का महत्व रहता है। व्रत से एक दिन पूर्व सात्विक भोजन करें और एकादशी के दिन स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु का तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य से पूजन करें।
मांगलिक कार्य और विवाह समारोह पुनः प्रारंभ होंगे
विष्णु सहस्रनाम, एकादशी व्रत कथा व 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है। चातुर्मास 20 नवंबर को देवोत्थान (देवठान) एकादशी तक रहेगा। इसी दिन से मांगलिक कार्य और विवाह समारोह पुनः प्रारंभ होंगे। चातुर्मास में सात्विक जीवन, संयम, दान, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व बताया गया है।