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    दशमी के दिन ही शिव की जटाओं से निकलकर धरती पर पहुंची थी मां गंगा; दशहरे पर क्या रहेगा शुभ मुहूर्त?

    Updated: Sun, 24 May 2026 12:57 PM (IST)

    इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाएगा, जिसमें गंगा स्नान और दान के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। ...और पढ़ें

    गंगा दशहरा। एआई जनरेटेड

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    संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। ज्योतिर्विद पंडित सुबोध ने बताया कि पंचांग के अनुसार 25 मई सोमवार को प्रात 4:31 बजे से दशमी तिथि प्रारंभ होकर 26 मई मंगलवार को प्रात 5:11 बजे तक हैं।

    ऐसे में सनातन परंपरा के अनुसार, सूर्योदय में जो तिथि आती है, उस दिन उसी तिथि को माना जाता है। इस बार सूर्योदय में दशमी तिथि 25 मई को आ रही है। अंत गंगा दशहरा 25 मई दिन सोमवार को ही मनाया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि गंगा स्नान और दान के लिए सर्वाधिक शुभ समय प्रात 4:30 बजे से 5:30 बजे तक (ब्रह्म मुहूर्त) है। इस अवधि में गंगा में स्नान, दान और ईश्वर की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।

    12:17 से 1:10 बजे तक का समय स्नान‑दान के लिए शुभ

    इसके बाद अमृत चौघड़िया सुबह 5:25 से 7:08 बजे तक है। इसमें भी स्नान और दान बहुत शुभ माना गया है। इसी के साथ शुभ चौघड़िया सुबह 8:51 से 10:34 बजे तक दान, पूजा और जलदान के लिए अच्छा समय हैं। अगर कोई इन मुहूर्त में स्नान न कर पाएं तो वैकल्पिक दोपहर 12:17 से 1:10 बजे तक का समय भी स्नान‑दान के लिए शुभ रहेगा।

    श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा की महिला प्रदेशाध्यक्ष ज्योतिर्विद प्रीति पांडेय ने बताया कि प्राचीन काल में राजा सगर बहुत तेज और शक्तिशाली राजा थे। उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया था। यज्ञ के अश्व को इंद्र देवता ने छीनकर कपिल मुनि के आश्रम में छुपा दिया।

    राजकुमार भगीरथ ने कठोर तपस्या की

    सगर के 60 हजार पुत्र अश्व को तलाशते हुए पाताल तक पहुंच गए, जहां कपिल मुनि तपस्या कर रहे थे। उनकी भावना गलत समझकर कपिल मुनि ने क्रोध से अपने आग्नेय नेत्र खोले और सभी 60 हजार पुत्र भस्म हो गए। इन्हीं पुत्रों के उद्धार और मोक्ष के लिए उनके वंशज राजकुमार भगीरथ ने कठोर तपस्या की।

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    भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा देव ने उनसे वर मांगने को कहा, तो भगीरथ ने ब्रह्मलोक से गंगा का धरती पर अवतरण मांगा। ब्रह्मा बोले कि गंगा की धार इतनी तेज है कि अगर सीधे धरती पर गिरी तो सब नष्ट हो जाएगा। इसलिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा‑स्वरूप को धारण किया और फिर उसे धरती पर उतारा।

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    तदोपंरात गंगा भगीरथ के सामने उतरी और उनके नेतृत्व में गंगोत्री से लेकर गंगासागर (सागर द्वीप) तक बहती हुई चली। 60 हजार पुत्रों की आत्माएं गंगाजल के स्पर्श से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त हो गईं।

    ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा का धरती पर यहीं अवतरण याद किया जाता है, इसलिए इस दिन गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता हैं। जब गंगा स्नान, दान और जप‑पूजा से पापों का नाश और आत्मा की शुद्धि होती है।