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    हापुड़ में बदला सियासी समीकरण: मायावती के समधी-समधन BJP में शामिल, पालिका विवाद होगा खत्म?

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 12:44 PM (IST)

    हापुड़ नगर पालिका अध्यक्ष पुष्पा देवी और उनके पति श्रीपाल सिंह के बसपा से निष्कासित होकर भाजपा में शामिल होने से जिले की राजनीति में नए समीकरण बन गए ह ...और पढ़ें

    समर्थकों के साथ भाजपा ज्वाइन करने पर पुष्पा देवी और श्रीपाल सिंह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ।

    समर्थकों के साथ भाजपा ज्वाइन करने पर पुष्पा देवी और श्रीपाल सिंह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ।


    HighLights

    1. हापुड़ चेयरपर्सन पुष्पा देवी और पति भाजपा में शामिल।

    2. बसपा से निष्कासित होने के बाद बदला राजनीतिक समीकरण।

    3. अटके विकास कार्यों को अब मिल सकती है रफ्तार।

    जागरण संवाददाता, हापुड़। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से निष्कासित होने के बाद नगर पालिका परिषद हापुड़ की चेयरपर्सन पुष्पा देवी और उनके पति श्रीपाल सिंह के भाजपा में शामिल होने से जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं।

    बदलेंगे निकाय के सियासी समीकरण

    दोनों का भाजपा में आना केवल एक राजनीतिक दल बदलने की घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर नगर पालिका की कार्यशैली, शहर के विकास कार्यों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तक देखने को मिल सकता है।

    अटके विकास कार्यों को अब मिल सकती है रफ्तार

    पिछले लंबे समय से नगर पालिका चेयरपर्सन और अधिशासी अधिकारी (ईओ) के बीच खींचतान बनी रही। कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं इसी टकराव के चलते समय पर पूरी नहीं हो सकीं। सड़क, नाला, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और अन्य निर्माण कार्यों को लेकर बोर्ड और प्रशासन के बीच कई बार मतभेद सार्वजनिक भी हुए। पिछले सप्ताह ही फैंसी लाइटों के उदघाटन समारोह से ईओ ने दूरी बनाए रखी।

    वहीं कई बार चेयरपर्सन के पति ने पालिका के वाहनों के डीजल-पेट्रोल का भुगतान रोक दिया। जिससे कई दिन तक शहर में सफाई भी नहीं हो पाई थी। इसको लेकर कई गंभीर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। हाल ही में ठेकेदारों के भुगतान को लेकर भी कई तरह के आरोप पालिका की हवाओं में तैर रहे हैं। पालिका की सबसे महत्वपूर्ण सेवाओं में शामिल सफाई व्यवस्था भी इस विवाद से अछूती नहीं रही।

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    निकाय राजनीति में नई हलचल

    बीते एक वर्ष के दौरान दो बार सफाई वाहनों के डीजल भुगतान पर रोक लगने से कूड़ा उठान प्रभावित हुआ और शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई। इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए थे। इसी विवाद में डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन खरीद और कूड़ा निस्तारण के लिए संयंत्र लगाने की योजनाएं अधर में लटकी हैं।

    अब भाजपा में शामिल होने के बाद माना जा रहा है कि पालिका और शासन-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकता है। सत्ता पक्ष से निकटता बढ़ने पर शासन स्तर से स्वीकृत योजनाओं और वित्तीय मामलों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। इससे लंबे समय से लंबित विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। चेयरपर्सन दंपती का स्थानीय स्तर पर अपना प्रभाव है, जिसका लाभ भाजपा को चुनावी दृष्टि से मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    वहीं, बसपा के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक कमजोरी के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि केवल राजनीतिक बदलाव से सभी समस्याओं का समाधान स्वतः नहीं होगा। शहर के विकास को वास्तविक गति तभी मिलेगी, जब पालिका बोर्ड, प्रशासन और जनप्रतिनिधि आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। फिलहाल भाजपा में चेयरपर्सन दंपती की एंट्री के बाद हापुड़ की नगर निकाय राजनीति में नई हलचल और बदले हुए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।