कानों में इयरफोन, ट्रैक पर बैठा युवक: हापुड़ में ट्रेन की चपेट में आने से 33 वर्षीय व्यक्ति की मौत
हापुड़ में चैनपुरी रेलवे फाटक के पास इयरफोन लगाकर ट्रैक पर बैठे 33 वर्षीय प्रदीप सैनी की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वह रोजाना चींटियों को आटा ...और पढ़ें

HighLights
इयरफोन लगाकर ट्रैक पर बैठे युवक की मौत।
हापुड़ के चैनपुरी रेलवे फाटक के पास हादसा।
मृतक प्रदीप सैनी रोजाना चींटियों को आटा डालता था।
केशव त्यागी , हापुड़। रेलवे ट्रैक के पास बरती गई एक छोटी सी लापरवाही ने रविवार सुबह एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। थाना देहात क्षेत्र के चैनपुरी रेलवे फाटक के पास पिलर संख्या 60/5 के निकट ट्रैक पर बैठे युवक की तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई।
युवक के कानों में इयरफोन लगे थे और वह मोबाइल पर गाने सुन रहा था। इसके चलते उसे पीछे से आ रही ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कैसे हुई वारदात?
जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह चैनपुरी रेलवे फाटक के पास पिलर संख्या 60/5 के निकट अयोध्यापुरी का प्रदीप सैनी(33 वर्षीय) ट्रैक के पास बैठा हुआ था और मोबाइल पर गाने सुन रहा था। कानों में इयरफोन होने के कारण उसे ट्रेन की आहट तक नहीं लगी।
कुछ ही क्षण में तेज रफ्तार ट्रेन उसे अपनी चपेट में लेती हुई निकल गई। हादसा इतना भयावह था कि प्रदीप ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
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थाना देहात पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना देहात प्रभारी पारस मलिक ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला ट्रेन की चपेट में आने से हुई दुर्घटना का प्रतीत होता है। मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
हर सुबह चींटियों को डालने जाता था आटा
स्वजन ने बताया कि प्रदीप सैनी की वर्षों से आदत थी कि वह रोज सुबह घर से निकलकर चैनपुरी रेलवे फाटक के पास चींटियों को आटा डालने जाता था। रविवार को भी वह इसी उद्देश्य से घर से निकला था। इसी दौरान यह दर्दनाक हादसा हो गया। उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि रोज का यह धार्मिक कार्य ही उसके जीवन का अंतिम सफर बन जाएगा।
पहले पिता और भाई को खोया, अब टूटा दुखों का पहाड़
स्वजन के अनुसार, प्रदीप के परिवार ने पहले भी कई दुख झेले हैं। करीब 30 वर्ष पहले उसके पिता प्रेम सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद लगभग 12 वर्ष पहले बड़े भाई अशोक का बीमारी के कारण निधन हो गया। अब उसकी असमय मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है।
वह अपनी मां सावित्री, भाई कृष्ण और दिनेश के साथ रहता था तथा ज्वेलरी बाक्स बनाने का काम कर परिवार का भरण-पोषण करता था।करीब 12 वर्ष पहले उसकी शादी मेरठ के तिरंगा गेट की रेखा से हुई थी।
उसके परिवार में पत्नी के अलावा पुत्री शिवांशी(11 वर्षीय) और ओझल(छह वर्षीय हैं। हादसे के बाद दोनों बेटियां अपने पिता के शव को देखकर बेसुध हो गईं। पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।
रेलवे ट्रैक के पास बरतें ये सावधानियां
- रेलवे ट्रैक के पास कभी इयरफोन लगाकर न जाएं।
- मोबाइल देखते हुए ट्रैक पार न करें।
- रेलवे लाइन पर बैठना या चलना जानलेवा हो सकता है।
- ट्रेन की गति और दूरी का अनुमान लगाने की कोशिश न करें।
- बच्चों और युवाओं को ट्रैक सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।