यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 12, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
स्वर्ग की कामना के लिए प्रतिदिन पंच महायज्ञ करें
यदि स्वर्ग की कामना चाहिए तो प्रतिदिन पंच महायज्ञ करें। निश्चित रूप से इस जन्म में और आगामी जन्म में भी स्वर्ग प्राप्त होगा। यह वचन आर्य समाज हापुड़ द् ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, हापुड़
यदि स्वर्ग की कामना चाहिए तो प्रतिदिन पंच महायज्ञ करें। निश्चित रूप से इस जन्म में और आगामी जन्म में भी स्वर्ग प्राप्त होगा।
यह वचन आर्य समाज हापुड़ द्वारा आयोजित गूगल मीट पर वैदिक विद्वान आचार्य विष्णुमित्र ने कहे। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में पांच यज्ञ ब्रह्मयज्ञ अर्थात दोनों संध्या के समय संध्या, ऊँ तथा गायत्री मंत्र का मौन अर्थ सहित जप करना। अग्निहोत्र, स्वाध्याय, दान, संगतिकरण।
अतिथि यज्ञ। पितृ यज्ञ अर्थात जीवित माता-पिता, बुजुर्गों, विद्वानों, गुरुजनों की सेवा, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति व देखभाल करना। बलिवैश्य्यज्ञ अर्थात पशु, पछियों की रक्षा करना व उनको दाना पानी से तृप्त करना। उन्होंने कहा कि यह वेद ज्ञान हमें प्रतिदिन ही करने चाहिए न कि किन्ही विशेष दिवस पर। यह ही हमारी प्राचीन वैदिक संस्कृति थी, जिससे भारत विश्व गुरु था। अत: स्वर्ग अर्थात सुख विशेष की चाह के लिए हम पंच महायज्ञ करें।
अमृतसर से दिनेश आर्य पथिक ने ईश्वर भक्ति, ऋषिभक्ति व देश भक्ति के सुमधुर गीत सुनाकर सभी श्रोताओं को अभिभूत कर दिया।
संयोजक आनंद प्रकाश आर्य ने बताया कि इस गूगल मीट में 100 श्रोताओं ने भाग लिया और बहुत से श्रोता संख्या निश्चित होने के कारण जुड़ नहीं पाए। म्यामार देश से आर्य नेता भोगी प्रसाद ने म्यामार में आर्य समाज के योगदान से अवगत कराया।
मंत्री अनुपम आर्य ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण सरकार के आव्हान पर सभी धार्मिक संस्थाएं लगभग बंद हैं। इस कारण आर्य समाज प्रत्येक रविवार व सोमवार को गूगल मीट द्वारा सत्संग कर आध्यात्म दे रहा है, जिसने देश विदेश से आर्य भाग लेकर आत्मिक लाभ ले रहे हैं।
खबरें और भी
प्रधान नरेंद्र आर्य ने सभी को कार्यक्रम में जुड़ने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें इस महामारी से सावधान रहकर शारीरिक दूरी बनाकर व आवश्यक कार्य होने पर ही मास्क लगाकर घर से बाहर निकलना चाहिए। कार्यक्रम में अमृतसर, जालंधर, चंडीगढ़, मेरठ, दिल्ली, म्यामार आदि अनेक नगरों से आर्यजनों ने भाग लिया।