फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने वाली यूनिवर्सिटी में फिर छापामारी, कब्जे में लिया रिकॉर्ड; पहले भी खुल चुके बड़े राज
एसटीएफ ने हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी पर फर्जी डिग्री और मार्कशीट मामले में फिर छापा मारा। टीम ने 2015 से 2021 तक की 1000 से अधिक संदिग्ध डिग्रियों का ...और पढ़ें

मोनाड यूनिवर्सिटी पर एसटीएफ की टीम ने फिर छापामारी की। जागरण
HighLights
एसटीएफ ने मोनाड यूनिवर्सिटी पर फर्जी डिग्री मामले में छापा मारा
1000 से अधिक संदिग्ध डिग्रियों का रिकॉर्ड जब्त किया गया
यूनिवर्सिटी कर्मचारियों और प्रोफेसरों के बयान दर्ज हुए
जागरण संवाददाता, हापुड़। फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने-बेचने की आरोपी मोनाड यूनिवर्सिटी पर मंगलवार को एसटीएफ की टीम ने फिर छापामारी की। टीम ने यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले एक हजार से ज्यादा संदिग्धों का रिकॉर्ड कब्जे में लिया है। वहीं पुराने मामले में भी रिकॉर्ड खंगाला गया।
इसके साथ ही चिकित्सक सहित पांच-छह कर्मचारियों-प्रोफेसर के बयान दर्ज किए गए हैं। एसटीएफ के सूत्रों ने बताया कि सटीम जानकारी व विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर छापामारी की गई है। जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं।
मोनाड यूनिवर्सिटी का फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने-बेचने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में अभी तक एसटीएफ की ओर से एक रिपोर्ट पिलखुवा थाने में दर्ज कराई गई थी। अब उस रिपोर्ट की जांच भी एसटीएफ ही कर रही है। इसमें मोनाड के मालिक बिजेंद्र हुड्डा सहित 11 लोगों को जेल भेजा गया था।
वहीं, इनमें से मुख्य आरोपी बिजेंद्र हुड्डा सहित कई लोगों की जमानत हो चुकी है, जबकि अभी कई कर्मचारी जेल में हैं। पिछले दिनों इस मामले में आयकर विभाग की टीम ने भी छापामारी की थी। एसटीएफ की टीम डीएसपी संजीव दीक्षित और पांच इंस्पेक्टर के नेतृत्व में दोपहर में मोनाड यूनिवर्सिटी में पहुंची।
टीम ने सबसे पहले डॉ. सुल्तान सहित पांच-छह लोगों के बयान दर्ज किए। इनसे लगातार क्रास सवाल-जवाब किए गए। यूनिवर्सिटी में प्रवेश देने की प्रक्रिया, फर्जीवाड़े का तरीका, ग्राहक तलाशने का तरीका और अन्य राज्यों से ग्राहकों को भेजने वालों के बारे में जानकारी जुटाई।
खबरें और भी
एसटीएफ के सूत्रों के अनुसार, करीब एक हजार ऐसे अन्य युवकों की पहचान की गई है, जिनकी डिग्री संदिग्ध प्रतीत हो रही हैं। इन छात्रों को यूनिवर्सिटी से 2015 से 2021 तक डिग्री दी गई हैं। इनकी जांच के लिए एसटीएफ ने रिकॉर्ड खंगाला, जिसमें काफी कुछ संदिग्ध मिला है। उसके आधार पर रिकॉर्ड को कब्जे में ले लिया गया है। टीम देर शाम रिकॉर्ड को लेकर चली गई है।
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि टीम आसपास ही रुकी हुई है। अभी इस मामले में और फाइल कब्जे में ली जा सकती हैं। इसके आधार पर फर्जी डिर्गी प्राप्त करने वालों के नाम सामने आ सकते हैं।
इससे पहले मई-25 में एसटीएफ ने मोनाड पर छापामारी की थी। एसटीएफ के संपर्क में तीन दर्जन से ज्यादा ऐसे युवक आए थे, जिनका दावा था कि उनको असली बताकर नकली मार्कशीट डिग्री थमा दी गईं। वह पहले से अपने डाक्यूमेंट को असली मानकर अलग-अलग स्थानों-कंपनियों में नौकरी कर रहे थे। मोनाड का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद उन्होंने अपने कामजात की जांच कराई।
यह भी पढ़ें- मोनाड यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री घोटाले में शासन ने बनाई जांच समिति, डीएम दर्ज करेंगे बयान
वहीं, जांच में सामने आया कि उनके पास डिग्री और मार्कशीट फर्जी हैं। युवकों ने यह भी बताया कि उनसे फीस और प्रवेश का पूरा शूल्क लिया गया था, लेकिन परीक्षा देने में मानकों का पालन नहीं किया गया। उनको प्रवेश लेने से भी एक साल पहले की डिग्री दे दीं गईं। उनका दावा है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने धोखाधड़ी की है।
यह भी पढ़ें- मोनाड यूनिवर्सिटी में गहराया वेतन का संकट, शिक्षक बोले- आर्थिक तंगी और तनाव से टूट गए हैं साहब
एसटीएफ ने अपनी पहले की ही इंवेस्टीगेशन पूरी नहीं की है। उन्होंने बताया था कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है, यह जारी रहेगी। उसी जांच के सिलसिले में टीम आई थी। अब कोई नया मामला नहीं है। यूनिवर्सिटी मानकों के अनुसार संचालित की जा रही है। - डॉ. एम.जावेद-वीसी-मोनाड यूनिवर्सिटी