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हरदोई में खतरे के निशान से 38 सेमी ऊपर पहुंचा गर्रा नदी का जलस्तर, 20 घरों में घुसा पानी

Published: Sun, 06 Sep 2026 11:41 PM (IST)

बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण हरदोई में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ गया है, गर्रा नदी खतरे ...और पढ़ें

खतरे के निशान के ऊपर पहुंचा पानी।

खतरे के निशान के ऊपर पहुंचा पानी।

HighLights

  1. गर्रा नदी खतरे के निशान से 38 सेमी ऊपर।

  2. सांडी के ऊंचाटीला में 20 घरों में घुसा पानी।

  3. 75 गांवों में 15 दिन से बिजली आपूर्ति बाधित।

जागरण संवाददाता, हरदोई। बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी ने जिले में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ा दिया है। गर्रा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है, जबकि गंगा चेतावनी बिंदु से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सांडी के ऊंचाटीला मुहल्ले में गर्रा का पानी घुसने से 20 घर प्रभावित हुए हैं। गलियां जलमग्न होने से लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। कटियारी क्षेत्र में गंगा और रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ने लगा है, जिससे ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।

सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राजघाट पर गंगा का जलस्तर 125.56 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी बिंदु 125.31 मीटर से 25 सेंटीमीटर अधिक है। गर्रा 130.03 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 129.65 मीटर है। रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ने से कटियारी क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। गर्रा का पानी सांडी के ऊंचाटीला मुहल्ले में पहुंचने से करीब 20 घरों में पानी घुस गया है।

गलियां जलमग्न होने के कारण लोगों को निकलने में परेशानी हो रही है। तालेपुरवा, सैयदपुरव, भौराजपुर, अलियापुर, छितरामऊ और भगहर के आसपास भी बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। कटियारी क्षेत्र में भटौली, सहिजना, अंटवा, नोनखारा, मोहद्दीनपुर, टपुआ, कसहा, अब्दुलपुर और कुचिला गांवों के ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार कुचिला द्वितीय प्राथमिक विद्यालय में पानी पहुंचने के कारण उसे दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ा है।

श्रीमऊ-सांडी मार्ग पर बाढ़ का पानी बहने से आवागमन प्रभावित है। प्रशासन ने राहत कार्यों के लिए मोटरबोट उपलब्ध कराई हैं। हालांकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एक और बड़ी समस्या बनी हुई है। करीब 15 दिन पहले बाधित हुई 75 गांवों की बिजली आपूर्ति अब तक बहाल नहीं हो सकी है। इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की राहत व्यवस्था और नदियों के जलस्तर पर टिकी

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