हरदोई में हड्डी के ऑपरेशन के वसूले 30 हजार रुपये, थमाया फर्जी GST बिल
हरदोई मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों से हड्डी के इंप्लांट के लिए बाजार मूल्य से दोगुने से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं और फर्जी जीएसटी बिल थमाए जा रहे ...और पढ़ें

हड्डी के ऑपरेशन के इंप्लांट के वसूले 30 हजार रुपये।
HighLights
मेडिकल कॉलेज में इंप्लांट के नाम पर दोगुनी वसूली।
रद्द पंजीकरण वाली फर्म से फर्जी जीएसटी बिल जारी।
डॉक्टर-वेंडर की मिलीभगत से मरीजों की जेब ढीली।
जागरण संवाददाता, हरदोई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इंप्लांट के खेल में मरीजों की जेब ढीली की जा रही है। आर्थो विभाग इंप्लांट के नाम पर मरीजों से बाजार मूल्य से दोगुने से भी अधिक रकम वसूली जा रही है। इतना ही नहीं, अस्पताल में हड्डी के आपरेशन के लिए मनमाने वेंडर से सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
एक मरीज की जांघ की हड्डी के लखनऊ के वेंडर ने 30 हजार रुपये वसूले,शिकायत पर जिस फर्म का बिल थमाया,उसका जीएसटी में पंजीकरण 2025 में निरस्त हो चुका है। इस पूरे मामले में आपरेशन करने वाले डॉक्टर और वेंडर की मिलीभगत उजागर हो रही है। अभी अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे है।
शहर के मुहल्ला सुभाष नगर के दीपक शुक्ला तीन जुलाई को हादसे में घायल हो गए। दाहिनी जांघ की हड्डी टूट गई थी। स्वजन ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया था। आर्थो विभाग में डॉक्टर अविक राय की देखरेख में उपचार चल रहा था।
दीपक शुक्ला के ससुर सर्वेश मिश्रा के अनुसार आपरेशन करने वाले डा. अविक राय ने एक इंप्लांट के वेंडर (सप्लायर) का मोबाइल नंबर दिया गया । वेंडर ने फिक्सेटर सहित अन्य सामग्री के लिए 30,030 रुपये लिए। लखनऊ की श्याम आर्थोकेयर नामक फर्म, जो प्रियम यादव के नाम से पंजीकृत थी, फर्म संचालक ने इंप्लांट का मरीज के नाम के नाम बिल बनाने के बजाय सीधे (एसएमसी) मेडिकल कॉलेज के नाम से बिल जारी कर दिया।
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जानकारों के अनुसार यह फर्म 29 दिसंबर 2025 को निरस्त (कैंसिल) हो चुकी थी, इसके बावजूद उसी के फर्म के नाम से बिल काटा गया। बिल में अंकित आइएफएससी कोड भी गलत बताया जा रहा है, जिससे पूरे लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले 27 जून को एक मरीज से इंप्लांट के नाम पर 31500 वसूले जाने का मामला सामने आया था।
मामले में तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रह्मप्रकाश ने वेंडर से महंगे इंप्लांट के बारे में जानकारी ली तो वह झगड़े पर उतारू हो गया था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वेंडर की अस्पताल में एंट्री पर न रोक लगाई और न ही संबंधित डॉक्टर पर कार्रवाई की थी। डॉ. ब्रह्मप्रकाश को पद से हटा दिया था। इंप्लांट के नाम पर वसूली और एसएमसी के नाम फर्जी बिल जारी किए जाने पर मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिस मरीज से इंप्लांट के रुपये लिए गए हैं,उसने शिकायत नहीं की है। फिलहाल वेंडर ने जो एसएमसी के नाम बिल काटा है,कमेटी से इसकी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, हरदोई।
फर्म का पंजीकरण निरस्त फिर भी जीएसटी का वसूला शुल्क
जानकारों की माने तो श्याम आर्थो केयर फर्म का जीएसटी पंजीकरण निरस्त है। इसके बावजूद इंप्लांट देने पर 1430 रुपये जीएसटी शुल्क वसूलकर जीएसटी नियमों का उल्लंघन किया गया। फर्जी फर्म से जीएसटी का शुल्क लेकर फर्म संचालक हर माह लाखों का चूना लगा रहा है।