शिक्षा विभाग की नई पहल: स्कूलों में बनेंगे ई-कचरा केंद्र, पुराने मोबाइलों से बच्चे सीखेंगे वेस्ट मैनेजमेंट
शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश के स्कूलों को ई-कचरा संग्रहण केंद्र बनाने की पहल की है। इसका उद्देश्य छात्रों को ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
स्कूलों को ई-कचरा संग्रहण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
छात्र इलेक्ट्रॉनिक कचरे की पहचान और प्रबंधन सीखेंगे।
अभियान दो चरणों में चलेगा, चार रंग के कूड़ेदान होंगे।
आकाश राज सिंह, हाथरस। उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक स्कूलों को अब ई-कचरा संग्रहण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षा विभाग की इस नई पहल का उद्देश्य छात्रों को इलेक्ट्रानिक कचरे की पहचान कराना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस व्यवस्था के तहत छात्र अपने घरों में पड़े अनुपयोगी व खराब इलेक्ट्रानिक उपकरणों को अभिभावकों की सहमति से स्कूल में बने संग्रह केंद्र पर जमा कर सकेंगे। इससे उन्हें ई-कचरा वेस्ट मैनेजमेंट सिखाया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू दिशा निर्देशों को जमीन स्तर पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। इमसें सरकारी स्कूलों के बच्चों को कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है।
स्वच्छता बढ़ाने के लिए हो रहा स्कूलों में कचरा प्रबंधन की पढ़ाई
शिक्षक रामनरेश बताते हैं कि अब बच्चों का कचरा प्रबंधन सिखाया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में खराब उपकरणों को सुरक्षित कंटेनरों में एकत्रित किया जाएगा। इनमें खराब व बेकार पड़े मोबाइल, चार्जर, कैलकुलेटर, की-बोर्ड सहित अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण शामिल होंगे। स्कूली स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ई-कचरे को सुरक्षित और सूखे कंटेनरों में ही रखा जाए। बच्चों को घर पर पड़े ई-कचरे को पहचानने और उसे सुरक्षित तरीके से निपटाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
दो चरणों में चलेगा अभियान
ई-कचरा प्रबंधन के लिए दो चरणों में अभियान चलाया जाएगा। शिक्षक राहुल बताते हैं कि यह निर्देश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने दिए हैं। पहला चरण 30 सितंबर तक व दूसरा चरण दो अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें चार रंग के कूड़े दान रखे जाएंगे। इसमें उसके अनुसार ही कचरा एकत्रित किया जाएगा। स्वच्छता के साथ ईको फ्रेंडली वातावरण बनाने पर जोर रहेगा।
चार रंग के कूड़ेदान में इस तरह रहेगा कूड़ा
- हरा कूड़ेदान (गीला कचरा): बचा हुआ भोजन, सब्जी और फलों के छिलके
- नीला कूड़ेदान (सूखा कचरा): कागज, प्लास्टिक, कांच, रबर और लकड़ी
- लाल कूड़ेदान (स्वच्छता अपशिष्ट): प्रयुक्त डायपर और सैनिटरी पैड
- काला कूड़ेदान (विशेष देखभाल अपशिष्ट): पेंट के डिब्बे, एक्सपायर्ड दवाएं और खराब बल्ब आदि
- जिले के 1236 परिषदीय व 40्र0 माध्यमिक स्कूलों में मिलेगी सुविधा
- करीब एक लाख बच्चों को मिलेगा ई कचरा प्रबंधन सीखने का प्रशिक्षण
- घरों से दूर होगा इस ई-कचरा, बच्चों के लिए बनेगा सीखने का माध्यम
बच्चों का कौशलात्मक पढ़ाई बहुत जरूरी है। स्वच्छता हम सभी के लिए है। बच्चों को इसका पाठ पढ़ाते हुए कौशल विकास उनके करियर को आगे बढ़ाएगा। - राजेश कुमार, अभिभावक
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बच्चों को कौशल परक शिक्षा बहुत जरूरी है। इसीलिए ई-कचरा प्रबंधन बच्चों को सिखाना, एक अच्छी पहल है। इसे सभी स्कूलों में लागू करना चाहिए। सुरेश शर्मा, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
स्वच्छता प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों को भी इसका पाठ शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जा रहा है। ई-कचरा प्रबंधन सीखने का मौका भी बच्चों को मिलेगा। सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नियमानुसार किया जाएगा।
गिरिराज सिंह, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस।
