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    हाथरस सत्संग हादसे में इंसाफ की डगर लंबी, अभी 646 की गवाही बाकी; पीड़ितों के जख्म दो साल बाद भी हरे

    By Abhishek Tayal Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Wed, 01 Jul 2026 11:59 PM (IST)

    हाथरस के फुलरई मुगलगढ़ी में दो साल पहले हुए सत्संग भगदड़ हादसे में 121 लोगों की मौत के बाद भी न्याय की प्रक्रिया धीमी है। 676 गवाहों में से सिर्फ 30 क ...और पढ़ें

    हाथरस सत्संग के दौरान कई लोगों की जानें चली गई थीं। फाइल फोटो

    हाथरस सत्संग के दौरान कई लोगों की जानें चली गई थीं। फाइल फोटो

    अभिषेक तायल, हाथरस। सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में दो जुलाई 2024 को सूरज पाल उर्फ साकार विश्वहरि के सत्संग के बाद मची भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की मृत्यु की घटना को दो जुलाई 2026 गुरुवार को दो वर्ष पूरे हो जाएंगे। घटना के बाद एसआइटी जांच, आरोप पत्र और न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुए दो वर्ष बीत गए मगर अभी सभी गवाहों के बयान ही दर्ज नहीं हो पाए हैं।

    कुल 676 गवाहों वाले इस बहुचर्चित मुकदमे में अब तक केवल 30 गवाहों की गवाही पूरी हो पाई है, जबकि 646 गवाहों के बयान अभी बाकी हैं। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम संगीता शर्मा की अदालत में चल रही है। पुलिस ने जांच पूरी कर 11 आरोपितों के खिलाफ करीब 3200 पृष्ठ का आरोप पत्र दाखिल किया था। सभी आरोपित जमानत पर हैं। अभियोजन की ओर से 676 गवाह प्रस्तुत किए गए हैं

    अब तक 30 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। गुरुवार को 31वें गवाह की गवाही होगी। गवाहों की बड़ी संख्या और दस्तावेजी साक्ष्यों को देखते हुए मुकदमे के अंतिम निर्णय में अभी काफी समय लगना तय माना जा रहा है।

    इस दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के बाद धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठे थे। दो वर्ष बाद भी मृतकों के स्वजन और घायल श्रद्धालु अदालत की हर सुनवाई पर नजर लगाए रहते हैं। दूसरी बरसी पर भी उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया तय गति से आगे बढ़े और दोषियों की जवाबदेही तय हो।

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    आंकड़े बता रहे मुकदमा लंबा चलेगा

    कुल 676 गवाहों में से अब तक 30 गवाहों की गवाही पूरी हुई है। यानी 646 गवाहों के बयान अभी शेष हैं। ऐसे में साफ है कि इस बहुचर्चित मुकदमे का ट्रायल अभी लंबा चलेगा। अदालत में गवाहों के बयान, जिरह और अन्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय आ सकेगा।


    यह एक हादसा था। किसी तरह की कोई साजिश नहीं थी। प्रशासन ने इस मामले में अपनी भूमिका सही तरीके से नहीं निभाई और इसकी वजह से हादसा हुआ। सभी आरोपियों की जमानत हो चुकी है।
    मुन्ना सिंह पुंडीर, आरोपित पक्ष के अधिवक्ता

    इस मामले में अब तक 30 गवाहों की गवाही हो चुकी है। मामला अपर सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या प्रथम में चल रहा है। अब दो जुलाई को इस मामले में फिर से सुनवाई है।
    त्रिलोकी शर्मा, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता