ऑनलाइन गेम और सट्टे के नाम पर करोड़ों की ठगी, हाथरस की युवती को उज्जैन पुलिस ले गई हिरासत में
उज्जैन पुलिस ने ऑनलाइन गेम और सट्टे के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा है। हाथरस से एक युवती को हिरासत में लिया गया है, जो इंस्टाग ...और पढ़ें

AI जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।
संवाद सहयोगी, हाथरस। ऑनलाइन गेम खेलकर रातों-रात करोड़पति बनने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह पर मध्य प्रदेश पुलिस ने शिकंजा कसा है। उज्जैन में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले की जांच के दौरान वहां की पुलिस ने गुरुवार को हाथरस में दबिश देकर एक युवती को हिरासत में लिया।
पुलिस टीम हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव महौ खास पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से युवती को अपने साथ उज्जैन ले गई। जांच में सामने आया कि हिरासत में ली गई युवती इस गिरोह की प्रमोटर बनी हुई थी। वह इंस्टाग्राम पर अपनी आईडी से आनलाइन गेम के लुभावने वीडियो बनाकर पोस्ट करती थी और युवाओं को गेम में पैसे लगाने के लिए उकसाती थी।
पुलिस के अनुसार इस ठगी के पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है। गिरोह के सदस्यों ने एक फर्जी वेबसाइट बना रखी थी। इस वेबसाइट के जरिये लोगों से सट्टेबाजी और गेम के नाम पर पैसे निवेश कराए जाते थे। इसके साथ ही एक नेटवर्किंग कंपनी बनाकर चेन सिस्टम तैयार किया गया था। इसमें लोगों को एक-दूसरे से जोड़कर कम समय में करोड़पति बनने के फर्जी सपने दिखाए जाते थे।
गिरोह की कार्यशैली यह थी कि शुरुआत में निवेशकों को थोड़ा मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास जीता जाता था। इसके बाद उन्हें बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसी तरह उज्जैन सहित मध्य प्रदेश के कई इलाकों के लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ लिए गए। पीड़ितों की शिकायत पर उज्जैन के संबंधित थाने में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
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उज्जैन पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर युवती की लोकेशन ट्रैक की। इसके बाद हाथरस पुलिस के सहयोग से महौ खास गांव में दबिश देकर उसे पकड़ लिया गया। इस संबंध में सीओ सिकंदराराऊ अमित पाठक ने बताया, उज्जैन पुलिस ने ठगी के मामले में हाथरस जंक्शन क्षेत्र में दबिश दी थी। पुलिस इंस्टाग्राम आईडी के जरिये यहां पहुंची थी। युवती को हिरासत में लेकर चली गई है।
फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। इसमें लोगों को एक-दूसरे से जोड़कर कम समय में करोड़पति बनने के फर्जी सपने दिखाए जाते थे। गिरोह की कार्यशैली यह थी कि शुरुआत में निवेशकों को थोड़ा मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास जीता जाता था। इसके बाद उन्हें बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था।