हाथरस में आलू की खेती पर संकट: 25% रकबा घटा, सरकारी बीज केंद्रों पर सन्नाटा
हाथरस में आलू की खेती का रकबा 25% घट गया है, जिससे सरकारी बीज केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है और ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
हाथरस में आलू की खेती का रकबा 25% घटा।
सरकारी बीज केंद्रों पर हजारों क्विंटल बीज बिना बिका।
किसान आलू छोड़ सरसों और गेहूं की ओर मुड़े।
जागरण संवाददाता, हाथरस। देश की प्रमुख आलू बेल्ट हाथरस में सरकारी अनुदान और तमाम कोशिशों के बावजूद इस बार सरकारी आलू बीज केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। जिले में जहां अमूमन 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की बंपर बुआई होती थी, वहीं इस सीजन में इसमें 25 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह पिछले तीन वर्षों से बाजार में चल रही आलू की भीषण मंदी है, जिससे किसान गहरी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
इस संकट के बीच सरकारी बीजों की आसमान छूती कीमतों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस समय सरकारी नए आलू बीज की कीमत 2,980 से 3,630 रुपये प्रति क्विंटल तक है, जो सामान्य आलू के बाजार भाव से करीब चार गुना अधिक है। यही कारण है कि सरकारी आलू बीज खरीदने में किसानों की रुचि पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।
स्थानीय आलू व्यापार को भारी आर्थिक झटका लगने की पूरी आशंका, किसानों की बढ़ी टेंशन
मले की गंभीरता को लेकर जिला उद्यान अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से किसानों को राहत देने के लिए आलू के बीज पर प्रति क्विंटल एक हजार रुपये का भारी अनुदान (सब्सिडी) भी दिया जा रहा है, फिर भी फसल बुआई का समय नजदीक होने के बावजूद बीज बिक्री करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
किसानों की इस बेरुखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उद्यान विभाग में जहां हर साल नए बीज के लिए दो हजार से अधिक आवेदन आते थे, सिफारिशों का दौर चलता था, वहीं इस बार केवल 72 (या लगभग 80) आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। इसके चलते जिले को आवंटित 3,716 क्विंटल बीज में से करीब तीन हजार क्विंटल बीज अभी भी बुकिंग के लिए बिना बिका बचा हुआ है।
52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की बंपर बुआई होती थी,अब घटी
भारी-भरकम लागत और बाजार के अनिश्चित जोखिम को देखते हुए हाथरस के किसानों की दिलचस्पी अब सरसों और गेहूं की तरफ ज्यादा हो रही है। इन फसलों में आलू के मुकाबले शुरुआती खर्च बेहद कम आता है और न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण एक सुरक्षित आय की गारंटी भी रहती है। किसानों के इस बदलते रुझान से इस बार जिले के कोल्ड स्टोरेज खाली रहने और स्थानीय आलू व्यापार को भारी आर्थिक झटका लगने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।