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    नीट में फेल होने पर हमीरपुर की छात्रा ने दी जान, दो साल से कोटा में कर रही थी तैयारी

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 12:26 AM (IST)

    नीट यूजी में असफल होने के बाद हमीरपुर की छात्रा श्रुति साहू ने विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। वह दो साल से कोटा में तैयारी कर रही थी और पिता ने ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. नीट यूजी में असफल होने पर छात्रा ने आत्महत्या की।

    2. दो साल से कोटा में कर रही थी परीक्षा की तैयारी।

    3. मां की मौत के बाद पिता ने संभाली थी जिम्मेदारी।

    जागरण संवाददाता, उरई। 16 जुलाई को नीट यूजी का रिजल्ट घोषित हुआ तो 17 को श्रुति साहू ने रिजल्ट देखा तो वह फेल हो गई थी। इससे वह अवसाद में आ गई पिता को बताया कि उसकी दो साल का मेहनत पर पानी फिर गया है, इस पर पिता ने उसे समझाया कि अगली बार और मेहनत करे तो सफलता मिलेगी। इसके बाद भी श्रुति परेशान रही और शनिवार की रात उसने विषाक्त पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ी तो पिता ने पूछा ऐसा कदम क्यों उठाया उसने कहा कि वह रिजल्ट से परेशान थी। पिता इलाज के लिए सीएचसी ले गया जहां से उसे मेडिकल कालेज रेफर किया तो यहां उसकी मौत हो गई। मृतका हमीरपुर जिले के कस्बा राठ मुहल्ला दीवानपुरा निवासी रही।


    हमीरपुर जिला के कस्बा राठ मुहल्ला दीवानपुरा निवासी महेंद्र पाल कमला बाई शिक्षण संस्थान में प्राइवेट शिक्षक हैं। उनके पास आठ बीघा जमीन है तो वह उसी के भरोसे अपनी तीन पुत्रियों 18 वर्षीय श्रुति साहू, ज्योतिषना व हर्षिता के साथ बेटे तरुण की पढ़ाई करा रहे थे। उनकी पत्नी गीता देवी की कोरोना से 2020 में मौत हो गई थी। बड़ी बेटी श्रुति पढ़ाई में होशियार था इस कारण उन्होंने दो साल पहले उसे तैयारी करने के लिए कोटा भेज दिया था।

    प्राइवेट नौकरी होने के बाद भी वह होनहार बेटी की पढ़ाई में एक साल में आने वाले चार लाख रुपये खर्च की व्यवस्था कर रहे थे। इस बार श्रुति ने नीट यूजी की परीक्षा पूरी तैयारी के साथ दी थी। 16 जुलाई को रिजल्ट निकला लेकिन श्रुति ने 17 जुलाई को रिजल्ट देखा जिसमें वह फेल हो गई थी। इससे वह परेशान हो गई पिता को बताया कि उसकी दो साल की मेहनत व आपका पैसा दोनों बर्बाद हो गया है।

    इस पर पिता महेंद्र पाल ने श्रुति का हौसला बढ़ाया और कहा कि वह और मेहनत करे तो अगली बार अच्छे नंबर से पास हो जाएगी। इस पर वह अवसाद में रही। शनिवार की रात को उसने विषाक्त पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ी तो पिता ने पूछा तो वह विषाक्त पदार्थ खाने के बाद कहकर बेसुध हो गई। पिता उसे इलाज के लिए सीएचसी राठ ले गया हालत नाजुक होने पर डाक्टरों ने उसे मेडिकल कालेज रेफर किया जहां देर रात उसकी मौत हो गई। सूचना के बाद कोतवाली पुलिस ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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    पत्नी की मौत के बाद पिता ने ही थी देखभाव

    महेंद्र की पत्नी गीता देवी कोरोना काल में असमय उन्हें छोड़कर चली गई। ऐसे में चार बच्चों की जिम्मेदारी उन पर थी। बेटी की लगन देखकर ही उसे कोटा भेजा था। उन्हें उम्मीद थी कि बेटी की कहीं नौकरी लग जाएगी तो उसकी अच्छे से शादी करेंगे। उन्हें क्या उम्मीद थी कि जिस तैयारी के लिए वह बेटी को भेज रहे हैं एक दिन वही उसके लिए मौत का कारण बन जाएगी। महेंद्र की आंखें से बार-बार आंसू निकल रहे थे।