पाकिस्तानी जेलों में बंद 9 भारतीय मछुआरों की वतन वापसी की जगी उम्मीद, विदेश मंत्रालय की पहल लाई रंग
साढ़े चार साल से पाकिस्तान की जेलों में बंद नौ भारतीय मछुआरों की घर वापसी की उम्मीद जगी है। ...और पढ़ें

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HighLights
नौ भारतीय मछुआरे साढ़े चार साल से पाकिस्तान जेल में।
सांसद डॉ. विनोद बिंद की पहल से उम्मीद जगी।
विदेश मंत्रालय ने कांसुलर एक्सेस, नागरिकता पुष्टि की।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। साढ़े चार वर्षों से पाकिस्तान की जेलों में बंद नौ भारतीय मछुआरों की घर वापसी की उम्मीद बढ़ गई है। भदोही के सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद की पहल और भाजपा पिछड़ा वर्ग के जिला उपाध्यक्ष संतोष विन्द (सत्या) के प्रयासों के बाद विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी मछुआरों को कांसुलर एक्सेस मिल चुका है तथा उनकी भारतीय नागरिकता का सत्यापन भी हो गया है।
विदेश मंत्रालय ने सांसद को भेजे पत्र में बताया कि भारत सरकार पाकिस्तान में बंद भारतीय मछुआरों की सुरक्षा, कानूनी सहायता और शीघ्र रिहाई के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
भारतीय उच्चायोग के अधिकारी नियमित रूप से उनसे मुलाकात कर रहे हैं और 1 जुलाई 2026 को भारत ने पाकिस्तान से उनकी जल्द रिहाई और सुरक्षित स्वदेश वापसी का मुद्दा फिर उठाया।
2022 ंमें पाकिस्तानी नौसेना ने किया था गिरफ्तार
गौरतलब हैं कि, मछलीशहर विकासखंड के नंदापुर बसीरहा गांव के चार मछुआरों समेत कुल आठ लोग 3 दिसंबर 2021 को गुजरात गए थे। वहां से 8 फरवरी 2022 को समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान वे अनजाने में पाकिस्तान की समुद्री सीमा में पहुंच गए थे, जहां पाकिस्तानी नौसेना ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
गिरफ्तार लोगों में दो सुल्तानपुर, एक भदोही और पांच जौनपुर के मछलीशहर के निवासी हैं। इस बीच जौनपुर के मछुआरे घुरहू की पाकिस्तान की जेल में ही मौत हो गई थी, जिसने एक परिवार की उम्मीदों को हमेशा के लिए तोड़ दिया।
अब सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद की पहल से वर्षों से बेटों, पतियों और भाइयों की राह देख रहे परिवारों की उम्मीदों को नई उड़ान मिली है। पूरे क्षेत्र की निगाहें अब भारत सरकार के अगले कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं, ताकि पाकिस्तान की सलाखों के पीछे कैद सभी भारतीय मछुआरे जल्द अपने वतन लौटकर अपने परिवारों से गले मिल सकें।