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    जौनपुर में अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स कर रहे मरीजों का इलाज

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 09:17 PM (IST)

    जौनपुर के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है, कई अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स मरीजों का इलाज कर र ...और पढ़ें

    जिले के अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर।

    जिले के अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर।

    HighLights

    1. जौनपुर के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी।

    2. फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स कर रहे मरीजों का इलाज।

    3. स्थानांतरित डॉक्टरों को कार्यमुक्त नहीं कर रहे प्रभारी।

    जागरण संवाददाता, जौनपुर। सुदूर ग्रामीण अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों की पोल खुल गई है। जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की तैनाती न होने से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर हैं। स्थिति यह है कि कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महज एक या दो डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं। उनके अवकाश या बैठक में जाने पर फार्मासिस्ट उपचार की जिम्मेदारी संभालते हैं।

    स्वास्थ्य महकमे की इस बड़ी खामी को दूर करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने एक माह पूर्व 17 चिकित्सकों का स्थानांतरण जरूरत वाले अस्पतालों में किया था, लेकिन प्रभारियों की मनमानी के चलते अब तक अधिकांश डॉक्टरों ने नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।

    राजाबाजार क्षेत्र का गद्दोपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल में पिछले चार साल से फार्मासिस्ट और डेढ़ साल से चिकित्सक का पद रिक्त है। वर्तमान में यह अस्पताल सिर्फ एक स्टाफ नर्स हेमलता सिंह और वार्डब्वाय शिवशार्जन प्रजापति के सहारे चल रहा है।

    इस अस्पताल से चरियाही, चांदपुर, कोबी और बसहराकला समेत करीब 14 गांवों की आबादी जुड़ी है। इलाज न मिलने से मरीजों को 15 किमी दूर बदलापुर या 40 किमी दूर जौनपुर जिला अस्पताल भागना पड़ रहा है।

    यही हाल बरसठी के भन्नौर अतिरिक्त पीएचसी का है, जहां पंद्रह दिन पहले स्थानांतरित हुए एमबीबीएस डॉ. विवेक यादव ने अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है और अस्पताल सिर्फ होम्योपैथिक डॉक्टर के भरोसे है।

    सीएमओ की चेतावनी के बाद भी सीएचसी बदलापुर, सुजानगंज और डोभी सहित कई अधीक्षकों ने स्थानांतरित चिकित्सकों को कार्यमुक्त नहीं किया है।

    बदलापुर के अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार पांडेय और सुजानगंज के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार पांडेय का तर्क है कि उनके यहां पहले से ही काम का दबाव है और नए डॉक्टरों की न आने के कारण वे किसी को रिलीव नहीं कर सकते। डोभी के चिकित्साधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार गुप्ता ने भी मरीजों के हित का हवाला देकर डॉक्टरों को रोक रखा है। वहीं शाहगंज सीएचसी से तीन में से दो डॉक्टर कार्यमुक्त हो चुके हैं।

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