जौनपुर की मूली को मिलेगी नई पहचान, कारोबार शुरू करने के लिए सरकार देगी सब्सिडी
जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती को जीआई टैग मिलने के बाद अब जिले की मूली को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल शुरू हुई है। 'एक जिला, एक व्यंजन' योजना में शामिल मूल ...और पढ़ें

इमरती को जीआई टैग के बाद मूली को भी पहचान दिलाने की तैयारी।
HighLights
जौनपुर की मूली को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल।
'एक जिला, एक व्यंजन' योजना में शामिल हुई मूली।
उद्यमों के लिए एक करोड़ तक का ऋण, 25% सब्सिडी।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती को जीआई टैग मिलने के बाद अब जिले की एक और पारंपरिक पहचान को नई पहचान दिलाने की पहल शुरू कर दी गई है। कभी अपनी गुणवत्ता, आकार और स्वाद के लिए दूर-दूर तक मशहूर रही मूली को एक जिला, एक व्यंजन योजना में शामिल करने के बाद अब इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए मूली से बनने वाले अचार अथवा अन्य खाद्य उत्पाद बनाने के लिए उद्यम लगाने को ऋण की भी व्यवस्था जाएगी।
इससे किसानों व स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ बाजार का दायरा भी बढ़ने की उम्मीद जगी है। एक समय था जब जौनपुर की मूली जिले की पहचान मानी जाती थी।
इसकी मांग आसपास के जिलों के साथ अन्य राज्यों तक रहती थी, लेकिन बदलती खेती, बाजार की प्रतिस्पर्धा और प्रचार-प्रसार के अभाव में इसकी पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती गई।
एक जिला एक व्यंजन में इमरती, एटमबम मिठाई के साथ ही मूली को भी लिया गया है। इस कारोबार को बढ़ाने के लिए उद्याेग भी लगाए जा सकते हैं।
कारोबार शुरू करन के लिए एक करोड़ रुपये ऋण तक लिया जा सकता है, जिसमे उद्याेग विभाग की ओर से 25 प्रतिशत तक सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी। पारंपरिक व्यंजनों की अधिक से अधिक ब्रांडिंग कराने के लिए प्रदेश व देश में लगने वाले ट्रेड फेयर में भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे बाजार के हिसाब से इनकी मांग सुलभ हो सके।
एक जिला एक व्यंजन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक व्यंजनों को पहचान दिलाना ही है। योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गया है। उद्यम स्थापित करने के लिए आवेदन किया जा सकता है। -आशुतोष सहायक पाठक, उपायुक्त उद्याेग।