जौनपुर में बंद पड़ी टेलीमेडिसिन योजना, महंगा उपचार कराने में कर्जदार हो रहे मरीज
जौनपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी योजना अपोलो अस्पताल से अनुबंध समाप्त होने के कारण एक साल से बंद है। ...और पढ़ें

बंद पड़ी टेलीमेडिसिन योजना बंद होने से महंगा उपचार कराने में कर्जदार हो रहे मरीज।
HighLights
जौनपुर में टेलीमेडिसिन, टेली रेडियोलॉजी योजना एक साल से बंद।
ग्रामीण मरीज महंगे निजी उपचार के लिए मजबूर हो रहे हैं।
करोड़ों के सरकारी संसाधन बिना उपयोग के खराब हो रहे।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। नामी-गिरामी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की तर्ज पर जिले के ग्रामीण अंचलों में गंभीर बीमारियों का मुफ्त उपचार और जांच की सुविधा देने वाली महत्वाकांक्षी टेलीमेडिसिन व टेली रेडियोलाजी योजना अब पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अपोलो हास्पिटल चेन्नई से हुआ सरकारी अनुबंध समाप्त होने के बाद, पिछले एक साल से यह सुविधा बंद पड़ी है।ऐसे में गरीब मरीज इलाज और महंगी जांचों के लिए निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च करने को मजबूर हैं।
सरकार द्वारा सुदूर ग्रामीण अंचलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए साल 2018 में यह अनूठी पहल शुरू की गई थी। इसके तहत जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर टेलीमेडिसिन और सात अस्पतालों में टेली रेडियोलाजी की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी।
अपोलो के प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी ऑनलाइन माध्यम से मरीजों का एक्स-रे और अन्य अत्याधुनिक जांचें सीधे अपोलो के विशेषज्ञ डाक्टरों के पैनल को भेजते थे। वहां से जनरल मेडिसिन, स्त्री रोग, आर्थोपेडिक, पीडियाट्रिक, गैस्ट्रो, कार्डियो, नेफ्रो और न्यूरोलाजी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं व सलाह तुरंत मिल जाती थीं। सरकार की अनदेखी और दोबारा अनुबंध न होने से यह पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।
यहां ठप पड़ी हैं सेवाएं
टेलीमेडिसिन: नौपेड़वां, सुजानगंज, मुफ्तीगंज, डोभी, रेहटी, खुटहन, मछलीशहर, रामनगर, रामपुर, महराजगंज, बरसठी, केराकत और सीएचसी बदलापुर।
टेली रेडियोलाजी: मड़ियाहूं, बरसठी, मछलीशहर, बदलापुर, डोभी, शाहगंज और महराजगंज।
सुविधा बंद होने पर क्या बोले नागरिक
ग्रामीणों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं थी। अब निजी डाक्टरों के पास जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है, जिससे जेब पर बोझ पड़ रहा है। -वीरेंद्र सिंह, जमालपुर (मछलीशहर)।
अस्पतालों में करोड़ों के संसाधन और टावर शोपीस बनकर रह गए हैं। सरकारी मशीनरी की लापरवाही के कारण जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है और जरूरतमंदों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। -कमलेश कुमार (अधिवक्ता), मछलीशहर।
पहले डिजिटल एक्स-रे और जांचें अस्पताल में ही ऑनलाइन माध्यम से हो जाती थीं। अब साधारण एक्स-रे और खून की जांच के लिए भी निजी पैथोलाजी वाले मनमाना पैसा वसूल रहे हैं। -मनोज कुमार, सरायबीरू (केराकत)।
टेलीमेडिसिन से घर बैठे इलाज मिल रहा था। इस बेहतरीन योजना को एक साल से बंद रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। -सरफराज, शेखजादा (केराकत)।
लाखों के मॉनिटर और कैमरे बिना उपयोग के खराब हो रहे हैं। यदि अनुबंध समाप्त हो गया था, तो स्वास्थ्य विभाग को समय रहते दूसरी व्यवस्था करनी चाहिए थी। -अंकित मौर्य, छितौना केराकत।
तकनीकी कारणों से टेलीमेडिसिन व टेली रेडियोलाजी सेवा फिलहाल बंद है। समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शासनस्तर से जल्द ही यह सेवा शुरू की जाएगी। -डॉ. अजय सिंह अधीक्षक सीएचसी मछलीशहर।
टेली मेडिसिन व टेली रेडियोलाजी की सुविधा पूरे प्रदेश में अस्थाई रूप से बंद है। इसके लिए शासन स्तर पर लिखा-पढ़ी की गई है। -डॉ. गंगाराम गौतम, सीएमओ।