आईटीआई कॉलेज मऊरानीपुर में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, अनुदेशक रेनू वर्मा 6 हजार रुपए लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
झांसी के मऊरानीपुर स्थित राजकीय आईटीआई में एंटी करप्शन टीम ने घूसखोरी का भंडाफोड़ किया है। महिला अनुदेशक रेनू वर्मा को छात्रों से प्रवेश पत्र और सर्टि ...और पढ़ें

HighLights
महिला अनुदेशक रेनू वर्मा ₹6,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।
प्रवेश पत्र, वेरिफिकेशन के लिए छात्रों से वसूली।
एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर रंगे हाथ पकड़ा।
जागरण संवाददाता, झांसी। मऊरानीपुर स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन और प्रवेश पत्र जारी करने के नाम पर चल रहे घूसखोरी के खेल का एंटी करप्शन टीम ने भंडाफोड़ कर दिया है। टीम ने संस्थान की महिला अनुदेशक (इंस्ट्रक्टर) रेनू वर्मा को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
प्रवेश पत्र और वेरिफिकेशन के नाम पर वसूली
जानकारी के अनुसार, रेनू वर्मा वर्तमान में संस्थान में तीन प्रमुख ट्रेडों (मैकेनिकल कंज्यूमर, आईसीटीसीएम और कोपा) की हेड के रूप में कार्यरत हैं। पीड़ित छात्र वेदांत अहिरवार और बोबीराजा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आगामी सीबीटी (CBT) परीक्षा से पूर्व होने वाले दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और प्रवेश पत्र जारी करने के एवज में अनुदेशक द्वारा ₹5,000 प्रति छात्र की मांग की जा रही थी।
3000 प्रति छात्र में तय हुआ था सौदा
छात्रों द्वारा काफी मिन्नतें करने के बाद अनुदेशक रेनू वर्मा ₹3,000 प्रति छात्र (कुल ₹6,000) पर काम करने के लिए राजी हुईं। भ्रष्टाचार से तंग आकर छात्रों ने इसकी गुप्त शिकायत 'भ्रष्टाचार निवारण संगठन' (एंटी करप्शन टीम) झांसी इकाई से कर दी।
एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल
शिकायत की पुष्टि होने के बाद एंटी करप्शन की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। 10 अप्रैल 2026 को जैसे ही छात्रों ने तयशुदा केमिकल युक्त ₹6,000 की रकम महिला अनुदेशक को सौंपी, पहले से ही मुस्तैद टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। पानी में हाथ धुलवाते ही उनके हाथ गुलाबी हो गए, जिससे घूस लेने की पुष्टि मौके पर ही हो गई।
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ITI परिसर में मचा हड़कंप
अचानक हुई इस छापेमारी और गिरफ्तारी से आईटीआई परिसर में हड़कंप मच गया और कई अन्य संदिग्ध कर्मचारी अपनी कुर्सियां छोड़कर भाग खड़े हुए। गिरफ्तार करने के बाद टीम आरोपी अनुदेशक को मऊरानीपुर कोतवाली ले गई, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई दर्ज की जा रही है।
जांच के घेरे में अन्य स्टाफ
एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों का कहना है कि यह एक बड़ा रैकेट हो सकता है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस अवैध वसूली में संस्थान के कौन-कौन से अन्य अधिकारी या बाबू शामिल थे।