छोटे भाई अबान के जनाजे को कंधा देने अतीक का बेटा अली झांसी जेल से प्रयागराज रवाना, पुलिस की कड़ी सुरक्षा
माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अस्थायी पैरोल पर झांसी जेल से प्रयागराज रव ...और पढ़ें

अतीक का बेटा अली अहमद कड़ी सुरक्षा में झांसी से प्रयागराज रवाना
HighLights
अली अहमद झांसी जेल से प्रयागराज के लिए रवाना
छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होने को पैरोल
अभेद्य सुरक्षा घेरे में वज्र वाहन से ले जाया गया
जागरण संवाददाता, झांसी। माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को झांसी जिला जेल से बेहद कड़ी सुरक्षा और अभेद्य घेरे के बीच प्रयागराज के लिए रवाना कर दिया गया है। सड़क हादसे में मारे गए अपने छोटे भाई अबान अहमद के जनाजे (सुपुर्द-ए-खाक) में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अली अहमद को अस्थायी पैरोल मंजूर की है। शनिवार सुबह 9.25 बजे पुलिस के वाहन से रवाना किया गया।
पुलिस का सख्त पहरा
पुलिस का ऐसा सख्त पहरा था कि आम तो क्या, मीडियाकर्मी भी अली अहमद की एक झलक नहीं देख पाए। पुलिस जिस गाड़ी से अली को लेकर रवाना हुई, वह चारों तरफ से पूरी तरह ढकी हुई थी। सुरक्षा को इस स्तर पर गोपनीय रखा गया कि गाड़ी के भीतर बैठे अली अहमद का चेहरा तक किसी को नजर नहीं आया।

झांसी जेल से रवाना हुआ अली।
कानपुर-झांसी मार्ग पर हुआ था हादसा
गुरुवार को झांसी जेल में बंद भाई से मिलने जाते समय कानपुर-झांसी मार्ग पर सड़क हादसे में अबान की मौत हुई थी।पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार सुबह दोनों के शव प्रयागराज लाए गए। अबान का जनाजा बड़े भाई उमर और अली के आने के इंतजार में रोक दिया।
अदालत ने लगाई हैं शर्तें
बुआ परवीन कुरैशी की याचिका पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद सामंत की खंडपीठ ने सुनवाई कर आठ अगस्त रात आठ बजे तक के लिए पैरोल मंजूर कर ली। अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं। इनमें एक यह भी है कि दोनों भाई मीडिया से बात नहीं करेंगे।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- अतीक के वक्त दूर रही, अबान की मौत पर खिंच आई? क्या फरार शाइस्ता ने किया बेटे का आखिरी दीदार
यह भी पढ़ें- प्रयागराज: हीवेट रोड से बैठा आजम, हटवा से सवार हुआ अतीक का बेटा अबान; कार में बैठते ही बदल गई थी मंजिल
नैनी सेंट्रल जेल से किया था शिफ्ट
सूत्रों के अनुसार नैनी सेंट्रल जेल में तलाशी के दौरान अली अहमद की बैरक से कूपन खरीदने के नाम पर नकदी बरामद हुई थी। इसे जेल सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक माना गया था। इसके बाद शासन स्तर पर समीक्षा के बाद अली को प्रयागराज से हटाकर झांसी जिला जेल भेजा गया था