22 चालान वाली कार से हो रही थी तस्करी, कन्नौज में 15 करोड़ के सोने की बरामदगी मामले में नया खुलासा
कन्नौज में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 10 किलो सोना बरामद होने के बाद जांच एजेंसियों को सोना तस्करी सिंडिकेट की अहम कड़ियां मिली हैं।

नेपाल से दिल्ली तक फैला है कन्नौज में पकड़े गए 15 करोड़ के सोना तस्करी का नेटवर्क।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, कन्नौज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जिस ब्रेजा कार में 15 करोड़ 34 लाख रुपये कीमत का 10 किलो सोना बरामद किया गया था, उसके जुलाई से अगस्त के बीच 22 चालान हो चुके थे।
जांच एजेंसियों के हाथ सोना तस्करी सिंडिकेट की अहम कड़ियां लगी हैं। अब जांच सिर्फ पकड़े गए आरोपितों तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल सीमा से लेकर गोरखपुर और दिल्ली तक सक्रिय पूरे नेटवर्क की भूमिका खंगाली जा रही है।
इसी क्रम में एटीएस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने ठूठीबारी में कथित सूत्रधार रियाज के घर दबिश दी, लेकिन वह टीम के पहुंचने से पहले फरार हो गया। एजेंसियों ने उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश तेज कर दी है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दूसरा चालक अभिषेक 21 अगस्त को सुबह करीब 9:36 बजे इसी ब्रेजा कार को महेशपुर सीमा से नेपाल लेकर गया था। वहां वाहन का करीब 600 नेपाली रुपये भंसार (टैक्स) भी जमा कराया गया।
सीमा पर चार घंटे के लिए जारी पास के बावजूद कार शाम करीब सात बजे वापस लौटी। इसके बाद सात जिलों को पार करते हुए कन्नौज की ओर पहुंची, जहां पुलिस की कार्रवाई में सोने की खेप पकड़ी गई। इस समय अंतराल और कार की आवाजाही को जांच एजेंसियां तस्करी के नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं।
कार नंबर और गुप्त कोड से होनी थी डिलीवरी
पूछताछ में सामने आया कि सोने की खेप को गोरखपुर से दिल्ली पहुंचाया जाना था। डिलीवरी के लिए कार नंबर और गुप्त कोड का इस्तेमाल किया जाना था।
इससे आशंका है कि तस्करी में शामिल लोगों के बीच सीधे संपर्क के बजाय तय संकेतों और वाहनों के माध्यम से खेप पहुंचाने का तरीका अपनाया जा रहा था। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नेपाल से सोना किसने उपलब्ध कराया और दिल्ली में इसकी डिलीवरी किसे दी जानी थी।
नेपाल के पते से लेकर भारतीय दस्तावेजों तक कड़ी
जांच में यह भी सामने आया कि तस्करी में इस्तेमाल कार का मूल मालिक नेपाल के नवलपरासी जिले के अमानीगंज-महेशपुर क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है।
कार भारतीय दस्तावेजों के जरिये खरीदी गई थी। ठूठीबारी के पते पर बने आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिये वाहन खरीदने की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। बताया जाता है कि जिस पते पर दस्तावेज तैयार कराए गए थे, वहां की दुकान घटना के बाद से बंद है और संचालक फरार है।

पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटीं एजेंसियां
कस्टम ने पकड़े गए दोनों आरोपित संदीप जायसवाल और सरोज पंत से पूछताछ की और उसके बाद दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब एटीएस, एसएसबी और कस्टम की जांच का फोकस उस पूरे सिंडिकेट पर है, जिसमें नेपाल से खेप की व्यवस्था करने वाला व्यक्ति, सीमा पार कराने वाले संपर्क, वाहन उपलब्ध कराने वाले लोग, चालक, गोरखपुर से दिल्ली तक खेप पहुंचाने वाले और अंतिम खरीदार शामिल हो सकते हैं।
जांच एजेंसियां आरोपितों के मोबाइल संपर्क, वाहन की आवाजाही और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों का मानना है कि रियाज की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क से जुड़े कई अन्य नाम सामने आ सकते हैं। इसी आधार पर सिंडिकेट में शामिल संदिग्धों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई जल्द शुरू किए जाने की तैयारी है।
तस्करों को रिमांड पर लेगा कस्टम
गिरफ्तारी के बाद से दोनों सोना तस्कर लखनऊ की जेल में है। दोनों से पूछताछ कर नेटवर्क तक पहुंचने के लिए कस्टम अधिकारी कोर्ट से रिमांड पर लेंगे।
यह भी पढ़ें- कन्नौज सोना बरामदगी मामले में नया मोड़, कार के पुराने चालान से खुला जांच का नया सिरा, नेपाल तक पहुंची कड़ी
