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भैंस के दूध में पानी और केमिकल मिलाकर बेचा जा रहा 'गाय का दूध', सेहत के लिए कितना खतरनाक?

Updated: Mon, 17 Aug 2026 07:44 PM (IST)

कन्नौज में दूध की खपत उत्पादन से दोगुनी होने के कारण बड़े पैमाने पर मिलावट हो रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।

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समय कम है?

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जागरण संवाददाता, कन्नौज। दूध की खपत जहां हर रोज बढ़ती जा रही है, वहीं इसका उत्पादन कम हो रहा है। दूध की बढ़ती मांग के कारण मिलावट का कारोबार हो रहा है।

दूध में पानी से लेकर अन्य सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री की मिलावट की जा रही है। यहां तक की दूधिया भैंस के दूध में पानी के साथ केमिकल का मिश्रण कर गाय का दूध बताकर बिक्री करते।

जिले में मौजूदा समय देशी गाय 1,12,197, क्रास बीड गाय 30643 और 2,63,641 करीब भैंस हैं। प्रतिदिन करीब आठ लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। जबकि रोजाना करीब 16 लाख लीटर से अधिक की खपत होती है। इससे स्पष्ट होता है कि दोगुना मिलावटी दूध की खुलेआम आपूर्ति की जा रही है।

पशु पालकों से भैंस का दूध 70 रुपये और गाय का 40 रुपये में खरीदने के बाद दूधिया इसमें पानी और केमिकल मिलाकर दोगुने दामों में घर-घर जाकर बिक्री करते हैं। सबसे अधिक मिलावट गाय के दूध के नाम पर होती है। गाय का दूध हल्का होने के कारण यह लोग भैंस के दूध में झाग लाने के लिए यूरिया और केमिकल के साथ पानी मिलाकर बिक्री करते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह दूध बेहद घातक साबित होता है। जिला दुग्ध विकास विभाग के दुग्ध पर्यवेक्षक प्रशांत कुमार का कहना है कि त्योहार सीजन में दूध की मांग बढ़ जाती है। सीमा से सटे जनपदों से भी दुग्ध संग्रह केंद्रों में आवक होती है। वहीं जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. गोपाल नारायण द्विवेदी बताते हैं कि लालच में आकर लोग मिलावट कर दूध बिक्री करते हैं।

सबसे अधिक मिलावट के दूध से बच्चों का पाचन तंत्र बिगड़ता है। इससे पेट की बीमारियां से बढ़ने से बच्चा अन्य बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। भरोसे के दूधिया से दूध खरीदने के साथ-साथ सामने खड़े होकर मवेशी से दूध निकालने के बाद ही उसे घर ले आएं। इससे मिलावट से बचा जा सकता है।

दूध के फेल हुए 40 नमूने

मिलावटी दूध की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम की ओर से दूध के नमूने लेकर जांच की जा रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि नमूने लेकर दूध में वसा की मात्रा, दूध शर्करा, पानी की मात्रा समेत कई बिंदुओं के मानकों की जांच की जाती है। इस साल 70 दूध के नमूने लिए गए हैं। इनमें से 40 नमूने फेल होने पर दूध विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया है।

दूधिया तीन लीटर दूध 70 रुपये के हिसाब से देते हैं। दो लीटर दूध बच्चों के पीने और चाय बनने के लिए रखते हैं। बिक्री के दूध से सिर्फ मवेशी का दाना-पानी के रुपये वसूल होते हैं। दूधिया उनसे खरीद कर दूध दोगुने दाम में बिक्री करता, अवधेश यादव पलटेपुर्वा।

दूध छूट के जाने के बाद मवेशियों को चारा खिलाना मुश्किल हो जाता है। इससे दूध बिक्री कर पहले से चारा जुटा लेते हैं। डेयरी पर दूध बिक्री का भुगतान समय से न मिलने पर परेशानी होती है।

रामरतन निवासी रामलालपुर्वा

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