हाईकोर्ट के आदेश के दागी वकीलों की कुंडली खंगाल रही कानपुर पुलिस, 10 सालों में 485 के खिलाफ दर्ज हुए 469 केस
कानपुर पुलिस हाईकोर्ट के आदेश पर दागी वकीलों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच कर रही है। पिछले दस सालों में 485 वकीलों के खिलाफ 469 मामले दर्ज हुए हैं, जि ...और पढ़ें

HighLights
हाईकोर्ट के आदेश पर फिर शुरू हुई दागी वकीलों की कुंडली बनाने की प्रक्रिया
बड़ी बात, पुलिस की जांच में केवल 11 मामले झूठे मिले, 76 में अंतिम लगी रिपोर्ट
गौरव दीक्षित, कानपुर। हाईकोर्ट ने प्रदेश में वकीलों की आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े गंभीर मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि कुछ जिला बार एसोसिएशनों विशेषकर गोरखपुर और कानपुर में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग पदाधिकारी बने बैठे हैं। वकालत की आड़ में संगठित गिरोह, डिक्री के जबरन निष्पादन, कब्जा दिलाने और किरायेदारों को जबरन बेदखल करने जैसे कामों में लिप्त हैं।
अदालत ने कृत कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में कानपुर पुलिस ने भी दागी वकीलों की कुंडली बनानी शुरू कर दी है। पुलिस ने सूची बना ली है और अन्य ब्यौरे भी जुटाए जा रहे हैं। फिलहाल दस सालों में कानपुर में 485 वकीलों के खिलाफ विभिन्न थाने में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आ रही है।
पंजीकृत वकीलों में 4,157 के खिलाफ 5,056 आपराधिक मामले
इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ के समक्ष इटावा जिला न्यायालय के वकील मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई हो रही है। सुनवाई के दौरान सामने आया है कि पुलिस महानिदेशक, अभियोजन निदेशालय और उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की रिपोर्टों के अनुसार कुल 5,14,439 सक्रिय पंजीकृत वकीलों में 4,157 के खिलाफ 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अदालत ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए पिछले दिनों कड़े निर्देश जारी किए हैं। साथ ही व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर कानपुर पुलिस ने भी दोबारा से वकीलों पर दर्ज मुकदमों की समीक्षा शुरू कर दी है।
कानपुर में 11 मामले झूठे पाए गए, जबकि 76 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगी
सूत्रों के मुताबिक
कानपुर में दस सालों में 485 वकीलों के खिलाफ 469 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से जांच के बाद 11 मामले झूठे पाए गए, जबकि 76 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगी है। यानी वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों में उन्हें कम ही राहत मिली है। 348 मामलों में पुलिस वकीलों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुके है। वर्तमान समय तक वकीलों से जुड़े केवल 33 मामले विवेचनाधीन हैं।
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इस तरह के मामले
वकीलों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, मारपीट, बलवा, लूट और डकैती जैसी गंभीर धाराओं के अलावा जमीन व मकानों में कब्जे के मुकदमे भी हैं। पांच वकील ऐसे हैं, जिनके खिलाफ पांच से अधिक मामले दर्ज हैं। गैंग्सटर अधिवक्ताओं की सूची भी तैयार की जा रही है। सर्वाधिक दागी वकील पूर्वी जोन हैं और कोतवाली में सर्वाधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक दागी वकीलों में 12 ऐसे हैं, जिनके पास शस्त्र लाइसेंस भी हैं। हालांकि कुछ के खिलाफ शस्त्र निरस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है।
| जोन | अधिवक्ता की संख्या | मुकदमे | झूठी नामजदगी | अंतिम रिपोर्ट | आरोप पत्र | विवेचनाधीन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| पूर्वी | 243 | 146 | 6 | 34 | 104 | 6 |
| पश्चिम | 110 | 110 | 4 | 16 | 85 | 3 |
| दक्षिण | 71 | 133 | 1 | 20 | 106 | 4 |
| सेंट्रल | 61 | 80 | 0 | 6 | 53 | 20 |
| कुल | 485 | 469 | 11 | 76 | 348 | 33 |
हाईकोर्ट के आदेश पर दस सालों का आंकड़ा तैयार हो रहा है। गंभीर अपराधों की सूची अलग से तैयार हो रही है। विवेचनाधीन मुकदमों के पर्यवेक्षण को और अधिक सख्त किया गया है। पुलिस के पास नकली डिग्री वाले वकीलों की कई शिकायतें पहुंची हैं। हमने दोनों बार एसोसिएशन से इस बारे में जानकारी मांगी है। वहां से जानकारी मिलने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
रघुबीर लाल, पुलिस आयुक्त
कुछ वकीलों के खिलाफ विद्वेश में मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं। किसी अधिवक्ता के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच के बाद ही रिपोर्ट लिखी जानी चाहिए।
बिनय कुमार मिश्र, महामंत्री बार एसोसिएशन
लायर्स एसोसिएशन न्यायिक जवाबदेही अधिनियम को लेकर बैठक करेंगी। कार्यकारिणी की बैठक में इस अधिनियम को लागू कराने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।
राजीव यादव, महामंत्री लायर्स एसोसिएशन
| क्रम | हाई कोर्ट के निर्देश |
|---|---|
| 1 | गंभीर अपराधों (सात साल से अधिक सजा वाले, वैवाहिक विवादों को छोड़कर) में आरोपित वकीलों के खिलाफ दर्ज मामले उनके गृह जिले से हटाकर 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किए जाएंगे। यह व्यवस्था पहले पांच साल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू होगी। |
| 2 | विश्वविद्यालयों के साथ डिजिटल लिंकेज बनाकर डिग्री का रियल-टाइम सत्यापन, हर वकील से आपराधिक मामलों की वार्षिक शपथपत्र में जानकारी अनिवार्य करने तथा चुनावी प्रभाव से मुक्त स्थायी अनुशासन ट्रिब्यूनल के गठन का बार कौंसिल को सुझाव दिया गया है। |
| 3 | कोर्ट ने कहा है कि प्रवेश के समय वकीलों का कोई पुलिस सत्यापन नहीं किया जाता, जबकि डॉक्टर, शिक्षक जैसे अन्य पेशों में पुलिस सत्यापन अनिवार्य है। |
| 4 | गंभीर अपराधों में आरोपित वकीलों की प्रैक्टिस, अनुशासनात्मक कार्रवाई या मुकदमे के निष्कर्ष तक स्थगित रहेगी। |
| 5 | एफआइआर दर्ज होते या चार्जशीट दाखिल होते ही संबंधित पुलिस अधिकारी को जिला जज, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और बार कौंसिल सचिव को तुरंत सूचित करना होगा। |
| 6 | हर जिले में डीएम, एसएसपी और जिला जज महीने में एक बार बैठक कर निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करेंगे। |