बैंकिंग एप की APK बनाकर जामताड़ा गैंग को बेचता था 11वीं पास युवक, सूरत पुलिस ने कानपुर से किया गिरफ्तार
कानपुर में सूरत पुलिस ने 11वीं पास रोहित शाक्य को गिरफ्तार किया, जो जामताड़ा गैंग को बैंकिंग ऐप्स की फर्जी APK फाइलें बेचकर 64.50 करोड़ रुपये की साइबर ...और पढ़ें

कानपुर के होटल से सूरत पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया साइबर ठग रोहित। सूरत पुलिस
HighLights
कानपुर में 11वीं पास युवक रोहित शाक्य गिरफ्तार।
जामताड़ा गैंग को फर्जी बैंकिंग APK बेचता था।
64.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा।
जागरण संवाददाता, कानपुर। वाट्सएप पर एपीके फाइल आती है, आप उसे क्लिक करते हैं और आपका मोबाइल फोन हैंग होने के साथ ही उसका एक्सेस साइबर ठगों के पास पहुंच जाता है। इसके बाद आपके खाते में रखी गाढ़ी कमाई ठगों के पास चली जाती है। ठगने के काम आने वाली एपीके फाइल बनाकर जामताड़ा व अन्य स्थानों के साइबर ठगों को 10 से 15 हजार रुपये में बेचने वाला 11वीं पास साढ़े 18 साल के युवक रोहित शाक्य को सूरत की पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
कानपुर के होटल में छिपा था
वह कासगंज का रहने वाला है और कानपुर के होटल में छिपा था। वह एआइ की मदद से 'पीएनबी वन' के नाम से बैंकिंग एप की एपीके फाइल बनाता था। अब तक वह 121 फाइलें बेच चुका है, जिन्हें 21,672 मोबाइल में इंस्टाल किया गया। इनमें से 2,928 फोन का एक्सेस लेकर करीब 64.50 करोड़ की साइबर ठगी की गई।
कासगंज का रहने वाला है आरोपित
सूरत साइबर अपराध शाखा की पुलिस उपायुक्त विशाखा जैन ने बुधवार को बताया कि 15 से 18 मई 2026 के बीच सूरत के एक व्यक्ति को एपीके फाइल भेज कर उसके खाते से पांच लाख रुपये यूनियन बैंक के खाते में ट्रांसफर कर लिए गए थे। जांच में रोहित का नाम आया। उसकी लोकेशन मिलने पर पीपीएन कालेज के पास स्थित होटल महादेव रीजेंसी से उसे पकड़ा गया। वह कासगंज के गांव नगला पटवारियान का रहने वाला है।
इन राज्यों के साइबर ठगों के लिए बनाता था एपीके फाइल
वह झारखंड के जामताड़ा, हरियाणा, दिल्ली समेत राज्यों के साइबर अपराधियों के लिए बैंकिंग एप की एपीके फाइल बनाता था। जांच में सामने आया कि वह टेलीग्राम की मदद भी लेता था और वायरस वाली एपीके तैयार करता था। वह एपीके फाइल के रिन्यूअल के भी 10 से 15 हजार रुपये हर महीने लेता था।
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बैंक ही नहीं आरटीओ, शादी के कार्ड की भी बनाता था फाइल
उसके आरटीओ चालान, शादी के कार्ड, बैंक स्टेटमेंट वाली एपीके फाइल भी बनाने की बात सामने आई है। उसे एप डेवलपर कहा जा रहा है, लेकिन इसका प्रशिक्षण उसने कहां से लिया, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। उसके पास से मोबाइल, लैपटाप और डिजिटल उपकरण मिले हैं। वह कोलकाता भागने की फिराक में था, लेकिन पहले ही पकड़ा गया।
यह है एपीके फाइल
एपीके फाइल यानी एंड्रायड एप्लीकेशन किट। इसका उपयोग एंड्रायड फोन पर एप इंस्टाल करने के लिए किया जाता है। ठगों ने इसे ठगी का जरिया बना लिया है।
इसलिए कुख्यात है जामताड़ा
झारखंड का जामताड़ा शहर साइबर ठगों का गढ़ माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में ठग हैं और आनलाइन साइबर अपराध करते हैं। देशभर में ठगी के हजारों मामलों में जामताड़ा गिरोह का नाम सामने आ चुका है। इस पर जामताड़ा नाम से वेब सीरीज भी बनी थी।