कानपुर में रक्षा उद्यमी के घर CBI का छापा, 50 लाख रुपए रिश्वत लेने का आरोप
सीबीआई ने कानपुर की मेसर्स ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड के संचालक के कैंट स्थित आवास पर रिश्वत मामले में छापा मारा। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, कानपुर। सेना को रक्षा सामग्री की आपूर्ति करने वाली शहर की कंपनी मेसर्स ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े रिश्वत कांड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को कैंट स्थित करियप्पा मार्ग पर कंपनी संचालक के आवास पर छापेमारी की।
करीब साढ़े तीन घंटे चली कार्रवाई के बाद टीम दिल्ली लौट गई। मामले में सेना की पूर्वी कमान में तैनात आयुध कोर के कर्नल हिमांशु बाली को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उन पर रक्षा टेंडर दिलाने के एवज में 50 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है।
छापेमारी के दौरान उद्यमी और उनके बेटे घर पर नहीं मिले जिसके चलते अधिकारी उद्यमी बड़े बेटे से पूछताछ करके लौट गए। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपित पिता-पुत्र की तलाश में उनकी टीमें दबिश दे रही हैं जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
सीबीआई ने तीन दिन पहले दिल्ली में दर्ज मुकदमे में कानपुर की मेसर्स ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड, उसके संचालक अक्षत अग्रवाल, उनके पिता मयंक अग्रवाल समेत छह लोगों को आरोपित बनाया है। एजेंसी के अनुसार कंपनी संचालक सेना के अधिकारियों से संपर्क कर रक्षा टेंडर हासिल करते थे और निविदा प्रक्रिया में कथित हेराफेरी कराकर बढ़े हुए बिलों का भुगतान कराया गया।
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सीबीआई जांच में सामने आया है कि 22 अप्रैल को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में कर्नल हिमांशु बाली और अक्षत अग्रवाल के बीच बैठक हुई थी। आरोप है कि इसी मुलाकात में रक्षा टेंडर की शर्तों और रिश्वत की रकम को अंतिम रूप दिया गया। इसके दो दिन बाद संबंधित टेंडर ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड को आवंटित कर दिया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक 16 मई को कर्नल बाली ने तय रिश्वत की रकम दिल्ली-एनसीआर पहुंचाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद दिल्ली स्थित सहयोगी आशुतोष शुक्ला के जरिए हवाला नेटवर्क सक्रिय किया गया। सीबीआई का दावा है कि 18 मई को चांदनी चौक से करीब 50 लाख रुपये हवाला के माध्यम से पहुंचाने की तैयारी थी। मामले में दिल्ली निवासी नरेश पाल और आशुतोष शुक्ला को भी आरोपित बनाया गया है।
बुधवार दोपहर करीब 12 बजे तीन गाड़ियों से पहुंची सीबीआई टीम ने करियप्पा मार्ग स्थित आवास पर दस्तावेजों की जांच की। उस समय मयंक अग्रवाल और अक्षत अग्रवाल घर पर नहीं मिले। इसके बाद टीम ने मयंक अग्रवाल के बड़े भाई मनीष अग्रवाल से पूछताछ की और कंपनी से जुड़े दस्तावेज खंगाले।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात, आठ, नौ और 10 के साथ आपराधिक साजिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एजेंसी अब रक्षा टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और हवाला नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
उद्योग केंद्र की योजनाओं में सहायता के लिए नहीं किया आवेदन
सीबीआई के शिकंजे में फंसी ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड के कामकाज की शुरुआत तीन दशक से भी पहले शहर के शारदा नगर क्षेत्र से हुई थी। सेना की जरूरतों से संबंधित छोटे उत्पादों की आपूर्ति करने वाली कंपनी ने लगभग एक दशक पहले अपना विस्तार किया था जब शहर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए रूमा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई।
कंपनी ने यहां से बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य फाइबर टेक्सटाइल के निर्माण में कदम रखा लेकिन इससे पहले किसी विवाद में नाम शामिल नहीं हुआ।
शहर के उद्यमियों के बीच कंपनी के संचालकों के तौर पर मयंक अग्रवाल और उनके बेटे अक्षत अग्रवाल की पहचान उभरते उद्यमियों के तौर पर ही है। पिछले दस साल के दौरान ही कंपनी ने तेजी से विस्तार किया है।
रूमा औद्योगिक क्षेत्र में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के उद्यमियों को प्रमुखता के साथ आवंटन दिया गया है। जिला उद्योग केंद्र के प्रभारी और जीएम अंजनीश प्रताप सिंह के अनुसार सेना के साथ कारोबारी गतिविधियां होने की वजह से कंपनी के प्रतिनिधियों का आना-जाना कम रहा है।
उद्योग विभाग की योजनाओं में भी पिछले साल कोई आवेदन नहीं किया गया है। दूसरी ओर रक्षा क्षेत्र में सामान की आपूर्ति करने वाले उद्यमियों ने बताया कि तीन दशक से ज्यादा समय से कंपनी के काम-काज के बारे में जानकारी मिल रही है।
लेकिन कभी सेना के साथ आपूर्ति या बाजार में किसी नकारात्मक गतिविधि के बारे में चर्चा नहीं हुई। ज्यादातर उद्यमियों को कंपनी के संचालक पिता-पुत्र के बारे में भी अधिक जानकारी नहीं है।
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