कानपुर दारुल कजा: रिश्तों को बचा रहा शरई पंचायत, मियां-बीवी के झगड़े हो रहे खत्म
कानपुर की दारुल कजा में मियां-बीवी के बीच के झगड़े और पारिवारिक विवादों को सुलझाया जा रहा है। उलमा का पैनल काउंसलिंग के जरिए रिश्तों को टूटने से बचाकर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
दारुल कजा कानपुर में सुलझ रहे हैं वैवाहिक और पारिवारिक विवाद।
उलमा का पैनल काउंसलिंग कर रिश्तों को टूटने से बचा रहा।
खुला सहित कई मामलों में सुलह से परिवार बचाए जा रहे।
जागरण संवाददाता, कानपुर। बाबूपुरवा के युवक की शादी फेथफुलगंज की रहनी वाली युवती से पिछले वर्ष हुई थी। शुरू में सबकुछ ठीक रहा। कुछ महीने बीतने के बाद पत्नी अलग घर लेकर रहने की जिद करने लगी। इस पर मियां-बीवी में तकरार होने लगी। नौबत झगड़े तक पहुंच गई।
दोनों पक्षों में बात बिगड़ी तो कुली बाजार स्थित दारुल कजा यानी शरई पंचायत का दरवाजा खटखटाया। वहां उलमा के पैनल ने दोनों पक्षों की सुनवाई की, पति-पत्नी की काउंसलिंग कर उनको समझाया गया।
दोनों के एक दूसरे के अधिकार बताए गए। आखिरकार दोनों साथ रहने पर रजामंद हो गए। वे खुशहाली से एक साथ शादीशुदा जिंदगी बिता रहे हैं। यह सिर्फ एक मामला नहीं है। इस तरह के मामले हर दिन दारुल कजा यानी शरई पंचायत में आ रहे हैं।
शादी के बाद मियां-बीवी के बीच मतभेद, परिवार में झगड़ा, एक दूसरे से अलग होने की की अर्जी लेकर भी लोग दारुल कजा पहुंच रहे हैं। दारुल कजा में आने वाले मामलों में खुला (पति से संबंध तोड़ना) मांगने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ रही है।
इसके अतिरिक्त मियां का बीवी पर ध्यान न देना, देर रात तक घर से बाहर रहना, पत्नी का ससुराल से अलग घर लेकर रहने की मांग करना, घर के कामों में लापरवाही बरतना, मायके वालों का बेटी की ससुराल में हस्तक्षेप करना जैसे मामल आ रहे है।
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दोनों पक्षों की कई चरणों में सुनवाई करने के बाद उनके बीच सुलह कराई जा ही है। दारुल कजा के अध्यक्ष का कहना है कि यहां आने वाले अधिकांश मामलों में सुलाह-समझौते से परिवार बचाने का प्रयास किया जाता है।
हर दिन हो रही चार से पांच मामलों की सुनवाई
जामिया अरबिया इशातुल उलूम कुली बाजार स्थित दारुल कजा में उलमा व मुफ्तियों का पैनल चार से पांच मामलों की सुनवाई करता है। इनमें घरेलू झगड़े, तरका (पिता की संपत्ति में बेटी का हक), तलाक, खुला (पत्नी की ओर से संबंध समाप्त करना) आदि के मामले हल कराए जाते हैं।
इस तरह के आ रहीं शिकायतें
दारुल कजा में आने वाले मामलों में किसी को संयुक्त परिवार में एक साथ रहना पसंद नहीं था, किसी को सास-ससुर का दखल अखर रहा था, कोई बीवी अपने मियां के साथ अलग घर में अकेले रहना चाहती थी, किसी को बीवी का मायके जाना, लगातार फोन पर बात करना अच्छा नहीं लगता था। देर रात तक मोबाइल पर सीरियल देखना भी विवाद की जड़ बना हुआ था।
फैसला नहीं,सुलाह कराने पर जोर
दारुल कजा में आने वाली अर्जियों पर दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाता है। यहां फैसला नहीं सुनाया जाता बल्कि सुलह कराने पर जोर दिया जाता है। इसके लिए दोनों पक्षों की अलग-अगल व एक साथ काउंसलिंग भी की जाती है। गलतफहमियों व आपसी मतभेदों का दूर करवाया जाता है।
दारुल कजा का काम शरीयत के अनुसार लोगों का मार्गदर्शन करना है। कुरआन व हदीस की रोशनी में उनके मामलों को हल करना है। यहां परिवार के बीच मतभेद को दूर कर घर उजड़ने से बचाने की कोशिश की जाती है। किसी को बाध्य नहीं किया जाता है। दोनों पक्षों के बीच सुलह करा उनकी जिंदगी को खुशगवार बनाया जाता है
-शहरकाजी हाफिज अब्दुल कुद्दूस हादी, अध्यक्ष दारुल कजा