विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दुश्मन के रडार को चकमा देने की तैयारी, DRDO-IIT Kanpur में विशेषज्ञों का जानें प्लान

Published: Tue, 22 Sep 2026 08:05 PM (IST)

दुश्मन के रडार से रणनीतिक हवाई प्लेटफार्मों को बचाने के लिए DRDO और IIT कानपुर के विशेषज्ञों ने तीन दिवसीय ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. DRDO-IIT कानपुर ने दुश्मन रडार से बचने की स्टेल्थ तकनीक पर मंथन किया।

  2. कम रडार क्रॉस-सेक्शन और उन्नत विद्युत चुंबकीय सामग्री पर हुई चर्चा।

  3. एंटीना डिजाइन और पुनर्संयोज्य मेटासर्फेस को अहम तकनीक बताया गया।

जागरण संवाददाता, कानपुर। दुश्मन के रडार की नजर से रणनीतिक हवाई प्लेटफार्म को बचाने के लिए केवल विमान का आकार बदलना पर्याप्त नहीं है। उसके एंटीना, सतह और विद्युत चुंबकीय व्यवहार को भी इस तरह डिजाइन करना जरूरी है कि रडार को उससे लौटने वाला संकेत कम से कम मिले।

इस चुनौती और इसके तकनीकी समाधान की तलाश में देश के रक्षा विशेषज्ञों ने तीन दिनों तक आईआईटी में मंथन किया। स्टेल्थ एंटीना, कम रडार क्रास-सेक्शन (आरसीएस), पुनर्संयोज्य मेटासर्फेस और उन्नत विद्युत चुंबकीय सामग्री को भविष्य की रणनीतिक हवाई प्रणालियों के लिए अहम तकनीक बताया गया।

आईआईटी के विद्युत अभियंत्रण विभाग और डीआरडीओ -उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र (डीआइए-सीओई) की ओर से आयोजित कार्यशाला में डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं समेत आईआईटी, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्योग के करीब 70 विशेषज्ञ शामिल हुए।

विशेषज्ञों ने बताया कि किसी वस्तु से रडार की ओर लौटने वाले विद्युत चुंबकीय संकेत की प्रभावशीलता यानी रडार क्रास-सेक्शन जितना कम होगा, सामान्य परिस्थितियों में रडार के लिए उसे पहचानना उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए स्टेल्थ तकनीक में एंटीना और अन्य विद्युत चुंबकीय घटकों को भी कम दृश्यता वाली डिजाइन का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में पुनर्संयोज्य विद्युतचुंबकीय संरचनाओं और मेटासर्फेस पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि इन तकनीकों का उद्देश्य विद्युत चुंबकीय तरंगों के साथ संरचना के व्यवहार को आवश्यकता के अनुसार बदलने की क्षमता विकसित करना है।

स्टेल्थ तकनीक में एंटीना डिजाइन, उन्नत सामग्री, आरसीएस विश्लेषण और मैन्यूफैक्चरिंग तकनीक को एक साथ विकसित करने की जरूरत है। कार्यशाला के 15 तकनीकी सत्रों के अलावा पैनल चर्चा, उद्योग संवाद और प्रदर्शनी हुई। कार्यशाला में हिस्सा लेने वालों ने आईआईटी की माइक्रोवेव मापन, पीसीबी, एनएम वेव रिसर्च और एयरोस्पेस स्ट्रक्चर्स प्रयोगशालाओं का भ्रमण भी किया।

उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि डीआरडीओ की डायरेक्ट्रेट आफ फ्यूचिरिस्टिक टेक्नोलाजी मैनेजमेंट की निदेशक डा. एन. रंजना रहीं। आईआईटी के डीन अनुसंधान एवं विकास प्रो. जयंधरन जी. राव, विद्युत अभियंत्रण विभागाध्यक्ष प्रो. सैकत चक्रवर्ती, डीआइए- सीओई निदेशक डा. मीना मिश्रा, प्रो. कुमार वैभव श्रीवास्तव और प्रो. राघवेंद्र कुमार चौधरी मौजूद रहे।

 

यह भी पढ़ें- कानपुर में डाक्टर बेटे को छात्रों ने फंसाया, IPhone का झांसा दे ऐंठे लाखों, फिर चलता रहा ये खेल

यह भी पढ़ें- कानपुर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, जितेन्द्र प्रताप सिंह का तबादला, महेंद्र सिंह तंवर बने नए डीएम

यह भी पढ़ें- कानपुर में खौफनाक वारदात, बिल्हौर में मकनपुर रोड किनारे पड़ा था धड़, पास में गड्डे में पड़ा था सिर