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    IIT कानपुर की बड़ी सफलता! 85% एथेनॉल पर दौड़ेंगी गाड़ियां, नई इंजन तकनीक से बदल सकती है ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 02:54 PM (IST)

    IIT कानपुर के इंजन रिसर्च लैब ने E85 (85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल) मिश्रण पर चलने वाले वाहनों की तकनीक विकसित की है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह तकनीक बिना ...और पढ़ें

    ये फोटो एआई जनरेटेड है।

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    HighLights

    1. IIT कानपुर ने 85 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले वाहनों के लिए नई इंजन तकनीक विकसित की

    2. शोधकर्ताओं के अनुसार E85 तकनीक से बिना पावर लॉस के बेहतर प्रदर्शन और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा

    3. यह तकनीक वाहन निर्माताओं के साथ साझा की गई है ताकि भविष्य में E85 इंजन विकसित किए जा सकें

    जागरण संवाददाता, कानपुर। पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में आइआइटी के इंजन रिसर्च लैब में ई85 (85 प्रतिशत एथेनाल और 15 प्रतिशत पेट्रोल) मिश्रण पर चलने वाले वाहनों की तकनीक विकसित कर ली गई है। लैब के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डा. ध्रुवराज कराना का दावा है कि इस तकनीक से वाहन बिना किसी पावर लास के बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

    आइआइटी के इंजन रिसर्च लैब में शोध कर रहे डा. ध्रुव राज कराना ने बताया कि यह अनुसंधान आइआइटी जोधपुर के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ई85 तकनीक वाहन निर्माताओं (मैन्युफैक्चरर्स) के साथ भी साझा की जा चुकी है, ताकि भविष्य में ऐसे इंजन विकसित किए जा सकें जो 85 प्रतिशत एथेनाल मिश्रित ईंधन पर आसानी से चल सकें।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि E85 के लिए वाहनों के इंजन और कुछ हार्डवेयर में आवश्यक बदलाव करने होंगे। वहीं, वर्तमान में उपयोग हो रहा ई-20 ईधन पुराने और नए दोनों प्रकार के वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। ई-20 ईंधन के प्रयोग से इंजन या माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है।

    उन्होंने बताया कि ई85 तकनीक के व्यावसायिक उपयोग से देश में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी, किसानों से खरीदे जाने वाले एथेनाल की मांग बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

    वहीं, IIT का दावा, ई-20 पेट्रोल से वाहनों को नहीं है कोई खतरा

    देशभर में ई-20 (20 प्रतिशत एथेनोल मिश्रित पेट्रोल) और वाहनों की अनुकूलता को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच आईआईटी कानपुर की इंजन रिसर्च लैब (ईआरएल) ने राहत भरी जानकारी दी है। ईआरएल के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डा. ध्रुवराज कराना ने बताया कि व्यापक परीक्षण और शोध के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि ई-20 ईंधन मौजूदा वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और इससे इंजन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं आती। उन्होंने बताया कि यह अध्ययन आइआइटी प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल (वर्तमान निदेशक आइआइटी जोधपुर) के नेतृत्व में किया गया था।

    माइलेज और इंजन की शक्ति में कमी की चर्चाएं सही नहीं

    डा. कराना ने कहा कि ई-20 के उपयोग से माइलेज और इंजन की शक्ति में कमी आने की चर्चाएं व्यावहारिक रूप से सही नहीं हैं। एथेनोल की कैलोरीफिक वैल्यू पेट्रोल से थोड़ी कम होने के कारण इंजन स्वचालित रूप से ईंधन की मात्रा में मामूली बदलाव कर सकता है, लेकिन 20 प्रतिशत मिश्रण में इसका असर सामान्य उपभोक्ता को महसूस नहीं होता। उन्होंने एथेनोल के मीठा होने और इंजन खराब करने संबंधी दावों को भी गलत बताया।

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    एथेनोल शुद्ध रासायनिक प्रक्रिया से तैयार होता

    उनका कहना है कि एथेनोल शुद्ध रासायनिक प्रक्रिया से तैयार होता है और इसमें ऐसा कोई तत्व नहीं होता जो इंजन को नुकसान पहुंचाए। जैसे अलग-अलग स्रोतों के पानी का स्वाद बदल सकता है पर उसका रासायनिक सूत्र एचटूओ ही रहता है, वैसे ही ब्लेंड होने वाले प्योर एथेनोल में कोई मीठापन या ऐसा तत्व नहीं होता जो इंजन को नुकसान पहुंचाए। इस शोध के सभी प्रमाण और निष्कर्ष आइआइटी कानपुर की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।

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