क्यों बढ़ रहे हैं पेट इन्फेक्शन के मरीज? पाचन तंत्र की अनदेखी पड़ रही भारी, बिल्कुल न करें ये गलती
कानपुर में गर्मी के साथ पेट संबंधी बीमारियों में वृद्धि हुई है, जहां एलएलआर अस्पताल में गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग में मरीजों की संख्या दोगुनी-तिगुनी हो ग ...और पढ़ें

लाला लाजपत राय चिकित्सालय के त्वचा रोग विभाग में मरीज देखते डा. डीपी शिवहरे। जागरण
अंकुश शुक्ल, कानपुर। एलएलआर अस्पताल के मेडिसिन विभाग और सुपर स्पेशलिस्ट विभाग के गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेट के मरीजों की संख्या दो से तीन गुणा हो गई है। ओपीडी में पहुंच रहे हर दूसरे मरीज में पेट संक्रमण मिल रहा है। इसका मुख्य कारण शत्रु बैक्टीरिया बन रहे हैं।
मित्र बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स पेट को बीमारियों से बचाते हैं। वे हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं, और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं। लेकिन गर्मी में बाहरी खान-पान के कारण पेट में मित्र बैक्टीरिया की संख्या कम होते ही शत्रु बैक्टीरिया हावी होने लगते हैं, जो संक्रमण, उल्टी और दस्त का कारण बन रहे हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के गैस्ट्रो मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. विनय सचान ने बताया कि ओपीडी में गर्मी के साथ ही पेट के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पाचन तंत्र में गुड और बैड बैक्टीरिया का संतुलन होना जरूरी है। जब यह संतुलन बिगड़ता है तो खराब बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है। पेट में खराब बैक्टीरिया बढ़ने का कारण माइक्रोबायोम की गड़बड़ी होती है। जो हमारे पाचन को बिगाड़ देती है।
पेट में खराब बैक्टीरिया बढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे प्रोसेस्ड फूड, चीनी और तले हुए फूड्स का ज्यादा सेवन करने से खराब बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का ज्यादा सेवन, तनाव और चिंता, डाइट में प्रोबायोटिक फूड की कमी, पानी की कमी और नींद की कमी होने से पेट में खराब बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं और गुड बैक्टीरिया घटते जाते हैं। इस कारण ही ओपीडी में पहुंच रहे हर दूसरे मरीज के पेट में संक्रमण की समस्या मिल रही है।
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बेहतर गट हेल्थ के लिए यह अपनाएं
- तरल पदार्थ की मात्रा अधिक लें। छाछ, नींबू पानी पिएं।
- खाने में हल्का और फाइबर युक्त भोजन करें।
- खाने के समय एक कटोरी दही जरूर लें। यह शरीर में प्राबायोटिक्स की मात्रा को बरकरार रखता है।
- सलाह और मौसमी फल जैसे खीरा, ककड़ी और प्यास का प्रयोग करें।