हृदयविदारक... जब रो पड़ा पूरा गांव! बिल्हौर में दो बाइकों की टक्कर में उजड़ गए 3 घर, बहनों के इकलौते भाई समेत 3 की मौत
बिल्हौर के उत्तरीपुरा में शुक्रवार देर रात दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने ओमजी, जतिन और रघुवर के तीन प ...और पढ़ें

युवक की मौत पर बिलखते स्वजन। जागरण
संवाद सहयोगी, बिल्हौर। उत्तरीपुरा में शुक्रवार देर रात करीब 11:30 बजे दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की मौत हो गई। हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं और पूरे गांव में मातम पसरा है। एक मृतक अपनी दो बहनों का इकलौता भाई था। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। स्वजन बिलखते रहे। उनकी चीत्कारों से उत्तरीपुरा गूंजा। ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं।
ग्रामीणों के अनुसार, ओमजी ने जब से होश संभाला तो परिवार की जिम्मेदारी भी संभालनी शुरू कर दी। बीएससी की पढ़ाई के साथ ही घर के बाहर मेडिकल स्टोर में काम करने लगा। वह मां नीतू, बड़ी बहन जाह्नवी और छोटी बहन गौरी का सहारा था। ओमजी की मौत से मां बेसुध हो गई और दोनों बहनें बिलखती रहीं।
साल भर पहले ही जतिन के भाई की हादसे में हुई थी मौत
दिवंगत ओमजी के करीब दोस्त जतिन की भी इस हादसे में मौत हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, जतिन के परिवार पर यह दूसरा बड़ा आघात है, सालभर पहले ही उनके बड़े भाई गोलू की भी सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। जतिन मोमोज और फिंगर बनाने का कारीगर था। उसके पिता बारदाना बिक्री का काम करते हैं। अब मां रेखा, भाई शिवम, आकाश, आलोक और बहन अंजली के सिर से एक और सहारा उठ गया। वहीं, दिवंगत रघुवर अपने पिता के साथ खेती-बाड़ी करते हैं। उनके निधन से मां मन्नू और भाई शंकर, छोटू, किशन, सत्यम तथा बहन सोनी बिलखते रहे।
एक हादसे में तीन जान जाने से छाई शोक की लहर
उत्तरीपुरा में शनिवार का दिन मातम भरा रहा। हादसे में जान गंवाने वाले तीन युवकों के शव जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद दोपहर साढ़े तीन से चार बजे कुछ देर के अंतराल में उनके घर पहुंचे, स्वजनों की चीख-पुकार मच गई। पहले ओमजी का शव पहुंचा और कुछ देर बाद रघुवर का शव स्वजन खजुरियानिवादा गांव ले गए। उसके कुछ देर बाद ही जतिन का शव पहुंचा।
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शव पहुंचे मची चीख पुकार
तीनों युवकों के शव जब गांव पहुंचे तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई। स्वजन बार-बार बेसुध हो रहे थे और गांव के लोग उन्हें संभालने में जुटे रहे। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। कुछ देर घर पर रोकने के बाद स्वजन अंतिम संस्कार के लिए शवों को शिवराजपुर के खेरेश्वर सरैंया घाट ले गए।