IIT Kanpur में आत्महत्याओं पर आई रिपोर्ट, जानें छात्रों और संस्थान के प्रतिनिधि ने बयान में क्या कहा?
आईआईटी कानपुर में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं पर मंडलायुक्त की कमेटी ने मानवाधिकार आयोग को रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में नए छात्रों की मानसिक जांच और आत्म ...और पढ़ें
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HighLights
आईआईटी में बढ़ती आत्महत्याओं पर कमेटी ने मानवाधिकार आयोग में रिपोर्ट दाखिल की
आत्मचिंतन के लिए एप विकसित करने को कहा, याचिकाकर्ता ने की दोबारा जांच की मांग
जागरण संवाददाता, कानपुर। आईआईटी में छात्र-छात्राओं के आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों पर मंडलायुक्त की ओर से गठित कमेटी ने राज्य मानवाधिकार आयोग में अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इसमें कहा गया है कि आत्महत्याएं रोकने के लिए आईआईटी कैंपस में आने वाले सभी नए छात्र-छात्राओं की पहले हफ्ते में मानसिक स्वास्थ्य जांच कराई जाए।
मानसिक स्वास्थ्य और आत्मचिंतन के लिए आईआईटी को एप विकसित करने की आवश्यकता है। हालांकि जांच कमेटी में शामिल आईआईटी के प्रतिनिधि की तरफ से इस तरह की सुविधाओं का हवाला जांच रिपोर्ट में दिया गया है। याचिका लगाने वाले सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए दोबारा जांच की मांग की है।
आईआईटी हास्टल की छठवीं मंजिल से कूदकर 20 जनवरी को शोधार्थी राम स्वरूप ईशराम ने आत्महत्या कर ली थी। सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रवीण फाइटर ने जनवरी में ही राज्य मानवाधिकार आयोग ने याचिका दाखिल की थी। कहा था कि 25 माह के अंदर आईआईटी में नौ छात्र व छात्राओं ने आत्महत्या की है।
पता लगाया जाना चाहिए ऐसा कौन सा कारण है, जिससे छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर रहे हैं। आयोग ने रिपोर्ट मांगने के साथ ही पुलिस आयुक्त से कमेटी बनाकर जांच कराने के लिए कहा था। कमेटी में एडीएम सिटी, सीएमओ, आईआईटी के एसोसिएशन प्रोफेसर सुधांशु शेखर सिंह और मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता शामिल थे। कमेटी ने आईआईटी की एक छात्रा और दो छात्रों के बयान लिए।
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जांच रिपोर्ट में किसने क्या कहा
छात्रों के बयान
कई छात्र आपस में बात ही नहीं करते हैं। छात्रों में कंपटीशन का प्रेशर रहता है। कई छात्र दोस्तों की मदद नहीं लेते हैं। छात्रों में जुआ और सिगरेट की आदत है। कुछ छात्र अपने को असहाय महसूस करते हैं।
आईआईटी प्रतिनिधि
आईआईटी में सेंटर फार मेंटल हेल्थ एंड वेल्बिंग नोडल संस्थागत के रूप में काम करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए 10 पूर्णकालिक मनोविज्ञानी कार्यरत हैं। मनोचिकित्सक पैनल में एक महिला समेत चार लोग हैं। 24 घंटे निरंतर सहायता के लिए एक आनकाल काउंसलर उपलब्ध हैं। सप्ताह में चार दिन मनोरोग ओपीडी की सेवा दी जाती है। छात्र योर दोस्त सर्विस का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके तहत आनलाइन वीडियो, आडियो, चैट और टेलीफोनिक सुविधा मिलती है।
मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता
छात्रों के स्क्रीन टाइम को कम करने की जरूरत है। इंटरनेट मीडिया और लगातार आ रही नोटिफिकेशन से दूरी रखनी चाहिए। स्क्रीन से ब्रेक लेने से तनाव कम हो जाता है। मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग कम करने से दोस्तों के साथ बात करनी चाहिए। नकारात्मक विचारों को बदलने की आवश्यकता है। छात्र मेडीटेशन और योग कर सकते हैं। इससे बहुत हद तक तनाव कम होगा।