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इंसान नहीं, अब रोबोट उठाएगा जोखिम; IIT कानपुर ने बनाया स्वदेशी हाइब्रिड रोबो-डॉग 'धाव-HY'

Published: Tue, 22 Sep 2026 08:08 AM (IST)

कानपुर आईआईटी के एक्स टेरा रोबोटिक्स ने 'धाव-एचवाई' नामक स्वदेशी हाइब्रिड रोबोट डॉग विकसित किया है, जो पहियों और पैरों ...और पढ़ें

रोबोट डॉग धाव एचवाई

रोबोट डॉग धाव एचवाई

HighLights

  1. आईआईटी कानपुर ने स्वदेशी हाइब्रिड रोबोट डॉग 'धाव-एचवाई' बनाया।

  2. यह रोबोट दुर्गम रास्तों पर पहियों और पैरों से चलेगा।

  3. सुरक्षा, औद्योगिक निरीक्षण और निगरानी में सहायक होगा।

जागरण संवाददाता, कानपुर। जहां इंसान के कदम पहुंचने से पहले खतरा खड़ा हो जाता है, वहां अब रोबोट दौड़ेगा। सीढ़ियां हों, ढलान, ऊबड़-खाबड़ रास्ते या जोखिम भरा औद्योगिक क्षेत्र, आइआइटी में इनक्यूबेटेड डीप-टेक स्टार्टअप एक्स टेरा रोबोटिक्स ने ऐसे ही मुश्किल इलाकों के लिए स्वदेशी हाइब्रिड रोबोट डॉग ‘धाव-एचवाई’ तैयार किया है।

चार पैरों और पहियों से लैस यह रोबोट रास्ते के अनुसार अपना मोड बदलकर आगे बढ़ सकता है। 22 किलो वजन वाला धाव-एचवाइ 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने के साथ 10 किलो तक भार भी ले जा सकता है। सुरक्षा, औद्योगिक निरीक्षण और दुर्गम क्षेत्रों में निगरानी के लिए विकसित यह रोबोट उन जगहों तक पहुंचने में मदद करेगा, जहां इंसानों का पहुंचना जोखिम भरा है।

एक्स टेरा रोबोटिक्स की टीम ने इससे पहले भी रोबोडॉग तैयार किया था लेकिन इस बार रोबोट को समतल जमीन पर तेजी से चलने के लिए पहियों के साथ डिजाइन किया गया है। वहीं, सीढ़ियां, ढलान और ऊबड़-खाबड़ रास्ते आने पर यह चार पैरों की मदद से संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ सकता है। इसमें लगे सेंसर आसपास के रास्ते और बाधाओं की पहचान करते हैं।

इसके आधार पर नियंत्रण तंत्र तय कर सकता है कि किस स्थान पर पहियों का इस्तेमाल करना है और कहां पैरों की मदद लेनी है। इसके पुराने संस्करण को भी इंसानों को जोखिम वाली जगहों से दूर रखते हुए निगरानी और सूचना जुटाने के लिए तैयार किया गया था लेकिन दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में उसकी उपयोगिता सीमित थी। धाव-एचवाई अब इसी चुनौती का जवाब है। इसकी डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग और निर्माण भारत में ही किया गया है।

फैक्ट्री से निर्माण स्थल तक करेगा निरीक्षण

धाव-एचवाई का इस्तेमाल सुरक्षा, निगरानी और औद्योगिक निरीक्षण में किया जा सकता है। फैक्ट्री, संयंत्र, निर्माण स्थल या ऐसे क्षेत्रों में जहां मानव पहुंच जोखिम भरी है, रोबोट कैमरे और सेंसर के जरिये जानकारी जुटा सकता है।

यह करीब 10 किलो तक उपकरण या सामान लेकर चल सकता है। कंपनी के को-फाउंडर आदित्य राजावत के मुताबिक पिछले तीन महीने से इसके शोध एवं विकास पर काम चल रहा था। अब विभिन्न उद्योगों में निरीक्षण के लिए इसके पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।

मैपिंग और डेटा कलेक्शन में भी उपयोग

आदित्य ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों में डेटा कलेक्शन, गूगल मैपिंग और निर्माण स्थलों की थ्रीडी मैपिंग में भी धाव-एचवाई का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 10 किलो तक वजन लेकर चलने के साथ करीब 100 किलो भार के दबाव में एक स्थान पर स्थिर खड़ा रह सकता है। जोखिम वाले क्षेत्रों में मानव की जगह रोबोट को भेजकर निगरानी और निरीक्षण को सुरक्षित बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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