टैक्सपेयर्स ध्यान दें! आयकर विभाग को पहले से पता हैं आपकी ये गुप्त कमाई; ITR में नहीं दिखाया तो होगी बड़ी मुश्किल
आयकर विभाग अब पूरी तरह डेटा आधारित है, जिससे करदाताओं की वित्तीय जानकारी पहले से ही उसके पास मौजूद होती है। ...और पढ़ें

HighLights
आयकर विभाग के पास करदाताओं की पूरी वित्तीय कुंडली मौजूद है।
एआईएस और फॉर्म 26एएस से मिलती है विस्तृत वित्तीय जानकारी।
वेतन, ब्याज, शेयर, संपत्ति के लेन-देन की सीधी रिपोर्टिंग होती है।
जागरण संवाददाता, कानपुर। आज का आयकर प्रशासन पूरी तरह डाटा आधारित और डिजिटल हो चुका है। कई करदाताओं में आज भी यह गलत धारणा है कि यदि किसी आय या बड़े लेन-देन को आयकर रिटर्न (आइटीआर) में शामिल नहीं किया गया, तो विभाग की नजरों से बचा जा सकता है। लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में बैंक, म्यूचुअल फंड, रजिस्ट्रार और कंपनियां आपके हर बड़े वित्तीय कदम की जानकारी सीधे आयकर विभाग को सौंप रही हैं। सीए प्रशांत वर्मा बता रहे हैं कि आयकर विभाग के पास कैसे मौजूद है आपकी पूरी वित्तीय कुंडली।
सीए प्रशांत कुमार वर्मा। स्वयं
एआइएस और फार्म 26एएस यानी आपकी वित्तीय कुंडली
आयकर विभाग को मिलने वाली अधिकांश जानकारियां मुख्य रूप से एन्युअल इंफार्मेशन स्टेटमेंट (एआइएस) और फार्म 26एएस के जरिए प्राप्त होती हैं। फार्म 26एएस में मुख्य रूप से आपके नाम पर कटे टीडीएस , टीसीएस , एडवांस टैक्स और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स का पूरा विवरण होता है। जबकि एआइएस यह आपकी वित्तीय कुंडली की तरह है। इसमें वेतन, बैंक से मिला ब्याज, लाभांश (डिविडेंड), शेयर व म्यूचुअल फंड के लेन-देन, संपत्ति का क्रय-विक्रय और विदेशी प्रेषण (विदेश से आने वाला धन) जैसी विस्तृत जानकारियां दर्ज होती हैं।
चार प्रमुख स्रोतों से विभाग तक पहुंचती है सीधी खबर

वेतन
आपका नियोक्ता (कंपनी या व्यक्ति) आपके वेतन और काटे गए टीडीएस की पूरी जानकारी विभाग को भेजता है, इसलिए वेतन की आय छिपाना नामुमकिन है।
बैंक ब्याज
कई लोग सोचते हैं कि जिस ब्याज पर टीडीएस नहीं कटा, उसे आइटीआर में दिखाना जरूरी नहीं है। यह धारणा पूरी तरह गलत है। बचत खाते और एफडी (फिक्स डिपाजिट) से मिला ब्याज यदि कर योग्य है, तो उसे घोषित करना अनिवार्य है।
शेयर और म्यूचुअल फंड
शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में किए गए हर निवेश और उनकी बिक्री से हुए पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) का सटीक रिकार्ड विभाग के पास पहुंचता है।
संपत्ति का क्रय-विक्रय
जब भी आप कोई मकान, फ्लैट या जमीन खरीदते या बेचते हैं, तो पंजीकरण विभाग (रजिस्ट्री कार्यालय) के माध्यम से इसकी सूचना आयकर विभाग को मिल जाती है।
क्या है एसएफटी और इसकी रिपोर्टिंग सीमाएं?
स्टेटमेंट आफ फाइनेंसियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी- वित्तीय लेन-देन विवरण ) एक ऐसी रिपोर्ट है, जिसके तहत वित्तीय संस्थाएं बड़े लेन-देन की सूचना विभाग को देती हैं। ध्यान रहे, एसएफटी में नाम आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको टैक्स देना है, इसका अर्थ सिर्फ यह है कि विभाग को इस लेन-देन की जानकारी है।