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Kanpur Businessman Murder Case: नौकर की जमानत याचिका से मचा हड़कंप, मां पहुंची कमिश्नर के पास, फिर अधिवक्ता ने बताया पूरा सच

Published: Fri, 18 Sep 2026 01:33 PM (IST)

दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में नया मोड़ आया है, जहां आरोपी विशाल गौतम की मां ने उसकी जमानत अर्जी ...और पढ़ें

विशाल और वकील के साथ उसकी मां। जागरण

विशाल और वकील के साथ उसकी मां। जागरण

HighLights

  1. आरोपित की मां पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचीं, आरोप-वादी मुकदमे से मिलकर उनकी मर्जी के बिना लगाई जमानत याचिका

  2. साजिशकर्ता और हत्यारोपित के कस्टडी रिमांड पर आज हो सकती सुनवाई, रिमांड मिलने पर पुलिस सुब्रत से कराएगी सामना

जागरण संवाददाता, कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में नया मोड़ आया है। हत्यारोपित नौकर विशाल गौतम की जमानत के लिए एक अधिवक्ता ने कोर्ट में याचिका लगा दी, जबकि विशाल की मां इससे अनजान हैं। उन्होंने शुक्रवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायती पत्र देकर वादी मुकदमा पर बेटे को जालसाजी में फंसाने के उद्देश्य से उनकी मर्जी के बिना प्रार्थना पत्र कोर्ट में प्रस्तुत कराने व दबाव बनाने का आरोप लगाया।

याचिका लगाने वाले अधिवक्ता ने बताया कि उनके पास वकालतनामा है। उधर, शनिवार को साजिशकर्ता शालू व हत्यारोपित विशाल के कस्टडी रिमांड पर सुनवाई होनी है। पुलिस दोनों का रिमांड मिलने पर दिवंगत के बेटे सुब्रत से सामना कराने के साथ फ्लैट की डुप्लीकेट व अन्य चाबियों को लेकर पूछताछ करेगी। अब तक की जांच और साक्ष्यों के आधार पर सुब्रत पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।

इंदिरा नगर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट में रहने वाले दवा कारोबारी की पांच सितंबर की रात हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने हत्यारोपित विशाल गौतम व उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया। उनके बयान व साक्ष्यों के आधार पर साजिशकर्ता कारोबारी की लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी बहू शालू को गिरफ्तार करने के बाद तीनों को जेल भेजा था।

पुलिस ने कारोबारी के बेटे सुब्रत, शालू, विशाल के सात नंबरों की काल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) निकलवाई, जो 1000 पेज की है। इसमें 300 से अधिक काल सुब्रत व विशाल के बीच की थीं। विशाल ने हत्याकांड से दो दिन पहले लिए गए नए नंबर से सुब्रत को छह व शालू को सात बार काल की थी।

मां ने कमिश्नर को बताई ये बात

विशाल की मां सुशीला ने पुलिस आयुक्त को बताया कि बेटे की जमानत व किसी भी पैरवी के लिए उन्होंने कोई अधिवक्ता नियुक्त नहीं किया है, लेकिन बेटे की जमानत के लिए सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाया गया, जो 15 सितंबर को खारिज हो गया। आशंका जताई कि वादी मुकदमा ने बेटे को जालसाजी में फंसाने के उद्देश्य से प्रार्थना पत्र कोर्ट में प्रस्तुत कराया है, ताकि बेटा मुख्य आरोपित बन जाए।

कमिश्नर ने अधिवक्ता को बुलाया

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने याचिका लगाने वाले अधिवक्ता शिवाजी सिंह को बुलाया। अधिवक्ता ने बताया कि उनके जूनियर अधिवक्ता विशाल के पड़ोसी हैं। उनसे विशाल की मां मकान मालिक के जरिये मिली थीं। हालांकि, मां ने कुछ दिन विचार करने को कहा था, लेकिन जूनियर वकील ने जब ये बात बताई तो उसे ही 12 सितंबर को जेल भेजकर केस के बारे में जानकारी की गई।

विशाल ने अंगूठे का निशान लगाया

जमानत याचिका के लिए वकालतनामा में विशाल ने अपने अंगूठे का निशान भी लगाया। जेल अधीक्षक के सत्यापन के बाद 14 सितंबर को वह उन्हें मिला। तब 15 सितंबर को जमानत याचिका की सुनवाई हुई और वह खारिज हो गई। अब वह जब तक दोबारा विशाल से जेल में नहीं मिल लेते और उसकी सहमति नहीं मिलती, तब तक वह मामले में कार्यवाही प्रक्रिया नहीं करेंगे। पुलिस आयुक्त ने बताया कि वकालतनामा में विशाल के अंगूठे के निशान है।

वसीयत को लेकर कई बिंदुओं पर परिवार की भूमिका की जांच

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच में सामने आया था कि दवा कारोबारी ने 2022 में एक वसीयत भी की थी, जिसमें पत्नी, बेटे सुब्रत, बेटी का नाम शामिल है। शालू का नाम नहीं होने पर परिवार में काफी समय से कुछ मनमुटाव था। इस वसीयत को लेकर भी पुलिस अब परिवार की भूमिका की कई बिंदुओं पर जांच कर रही है।

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