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    Kanpur Cantt MLA Report Card: बदहाल सड़कें, जाम और सीवर...विकास की रफ्तार फाइलों में कैद

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 05:43 PM (IST)

    कानपुर छावनी विधानसभा क्षेत्र में विकास की गति धीमी है, जहां सड़कें, सीवर और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं। विधायक और प्रशासनिक व्यवस्था के ब ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सड़कें गड्ढों से भरी, सीवर व्यवस्था बदहाल, पेयजल अनियमित।

    2. सीओडी आरओबी परियोजना वर्षों से अटकी, जाम की समस्या।

    3. प्रशासनिक समन्वय का अभाव, विकास कार्य धीमी गति से।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। छावनी विधानसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां विकास की लड़ाई संसाधनों की कमी से कम और दोहरी प्रशासनिक व्यवस्था से ज्यादा हार रही है। एक ओर छावनी बोर्ड का अधिकार क्षेत्र है तो दूसरी ओर नगर निगम की सीमा। दोनों के बीच जिम्मेदारियां बंटी हैं, लेकिन जवाबदेही कहीं दिखाई नहीं देती। परिणाम यह है कि जनता वर्षों से उन्हीं समस्याओं के बीच जीवन जीने को मजबूर है, जिनके समाधान के वादे हर चुनाव में किए जाते हैं।

    पीएसी मोड़ से श्याम नगर की सड़क पर गड्ढे सालों से भर नहीं पाए हैं, रेलवे ओवर ब्रिज की हालत जर्जर हो चुकी है, लेकिन जनता की सुनवाई कहीं नहीं हो रही है।विधानसभा चुनाव में विकास को सबसे बड़ा मुद्दा सीओडी-सुजातगंज रेलवे ओवर ब्रिज को बनाया गया था। जनता ने उम्मीद के साथ विधायक मोहम्मद हसन रूमी को चुना कि अटकी परियोजनाओं को गति मिलेगी और वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन चार साल बाद भी तस्वीर बहुत अधिक नहीं बदली। विकास की रफ्तार आज भी फाइलों, बैठकों और विभागीय पत्राचार में उलझी हुई है।

    नगर निगम क्षेत्र की सोसाइटियों में सीवर व्यवस्था बदहाल है। जगह-जगह सीवर उफना रहा है और गंदा पानी सड़कों पर बहता दिखाई देता है। पेयजल आपूर्ति भी कई इलाकों में नियमित नहीं है। गर्मी आते ही पानी के लिए लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। दूसरी ओर बिजली व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। केस्को के पुराने और जर्जर तार आज भी कई स्थानों पर बांस के सहारे टिके हैं। यह केवल बदहाल व्यवस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि संभावित बड़े हादसे का संकेत भी है। इसके बावजूद न तो व्यापक सुधार अभियान दिखाई देता है और न ही भूमिगत बिजली नेटवर्क की दिशा में कोई ठोस पहल।

    सबसे गंभीर मामला सीओडी क्रासिंग पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज का है। वर्षों से यह परियोजना स्वीकृतियों और फाइलों के चक्कर में फंसी हुई है। आरओबी नहीं बनने से नीचे की सड़क भी अधूरी पड़ी है। रोजाना हजारों वाहन जाम में फंसते हैं और लोगों का समय, ईंधन तथा धैर्य तीनों बर्बाद होते हैं। जाजमऊ क्षेत्र बीते दो साल से सीवर लाइन डालने के चलते कोई ऐसी सड़क नहीं बची है, जो चलने लायक हो।

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    छावनी बोर्ड क्षेत्र की सड़कें भी बरसों से मरम्मत की बाट जोह रही हैं। बारिश में गड्ढे तालाब बन जाते हैं और आवागमन जोखिम भरा हो जाता है। नगर निगम और कैंट बोर्ड के बीच समन्वय का अभाव अब केवल प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि विकास की सबसे बड़ी बाधा बन चुका है। दोनों संस्थाएं अपने-अपने अधिकार क्षेत्र का हवाला देती रहती हैं, जबकि जनता को केवल बदहाल सड़कें, जाम, सीवर और अव्यवस्था मिलती है।

    क्षेत्र को अब नए वादों की नहीं, निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है। विकास तब तक कागजों से बाहर नहीं आएगा, जब तक विभागीय खींचतान खत्म नहीं होगी और जनप्रतिनिधियों की प्रभावी पैरवी परिणाम में नहीं बदलेगी। सीओडी आरओबी, मजबूत सड़कें, दुरुस्त सीवर, नियमित पेयजल और सुरक्षित बिजली नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं किसी भी आधुनिक शहर की पहचान होती हैं, लेकिन छावनी में यही सुविधाएं आज भी इंतजार में हैं।


    बोले विधायक

    कई योजनाएं ऐसी हैं जो सरकार दूसरी पार्टी की होने की वजह से पूरी कराने में दिक्कते आईं। लेकिन पीछा नहीं छोड़ा, सदन में एक के बाद एक सोलह सवाल उठाए, उनका असर भी दिखा लेकिन काम अभी पूरे नहीं हो सके। सुजातगंज चंदारी में 1994 से जल निगम की बंद पड़ी पानी की टंकी की बिजली की सदन में मामला उठाकर जुड़वाई है। लेकिन पानी सप्लाई अभी तक शुरु नहीं हो सकी है। अधिकारियों का कहना है कि सप्लाई में कहीं पाइपलाइन फट गई तो हमारे पास दोबारा मरम्मत कराने के लिए पैसा नहीं है। वार्ड 73 में पेसेफिक लान से केडीए चौराहे होते हए जेके फस्ट तक लगभग 35 करोड़ के लागत से सीएम ग्रिड योजना के तहत स्मार्ट रोड निर्माण ओर निर्माण कार्य का काम चल रहा है। बाबू का पुरवा वार्ड में एक करोड़ की लागत से नए ट्यूबवेल लगवाए गए हैं। क्षेत्र विकास के लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं और सदन तक में मुद्दे उठाए गए हैं। सीओडी आरओबी के नीचे वाली सड़क भी बनवाने का प्रयास जारी है।
    - मो. हसन रूमी, विधायक-सपा।


    बोले रनरअप

    छावनी विधानसभा क्षेत्र में सपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि सरकार नहीं होने के बात कर विकास कार्यों से पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन पूर्व विधायक होने के बाद भी क्षेत्र में लगातार विकास कार्य रहा हूं। हमारी नगर निगम, राज्य और केंद्र में सरकार है, जो भी जनता के हितों से जुड़ी आवश्कताएं, बुनियादी सुविधाएं हैं, उनको पूरा करने का कार्य किया जा रहा है। सपा की सरकार में विपक्ष का विधायक होने के बाद भी श्याम नगर में विकास कार्य कराए हैं, मेरे कार्यकाल में कराए गए कार्य आज भी दिख रहे हैं, लेकिन मौजूदा विधायक केवल खास वर्ग के लिए काम किया है, जबकि मैने सभी वर्ग के लिए कार्य किया है। जनता मुझे फिर सेवा मौका देगी, तो प्रदेश की नंबर वन विधानसभा बनाऊंगा।
    रघुनंदन भदौरिया, रनरअप, भाजपा


    आमजन की जुबानी ...

    ऐसा तो नहीं कहा जा सकता कि क्षेत्र में बिल्कुल काम नहीं हुआ है, काम तो हुए हैं। मगर यातायात इतना अव्यवस्थित है कि सड़क पर निकलने से पहले दो बार सोचना पड़ता है। आप चाहे जिस तरफ चले जाएं हर तरफ खोदाई ही खोदाई मिलती है। अतिक्रमण के खिलाफ कोई बोलने को तैयार नहीं है। बाजार में कहीं भी महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं बने हैं। जबकि यह बहुत ही आवश्यक है। मगर जनप्रतिनिधि ने इस बात का ध्यान नहीं रखा। शौचालय न होने की वजह से महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
    - प्रशांत कुमार


    मुस्लिम आबादी हो या रामलीला मैदान , हर तरफ जलभराव ने जीना मुश्किल कर दिया है। जरा सी बारिश में पूरा इलाका लगभग डूब सा जाता है। जल निकासी का इंतजाम नहीं है और ऊपर से आधी-अधूरी पड़ी सीवरलाइन भी समस्या की जड़ बनी हुई है। जागरुकता के अभाव में लोगों ने घरों की लाइनें सीवरलाइन से जोड़ दी। इसका नुकसान बरसात में दिखाई देता है। सीवर का पानी सड़क और घर तक पहुंच जाता है। काम तो हुआ है, लेकिन अधूरा होने से नुकसान भी जनता बर्दाश्त कर रही है।
    - नितिन जयसवाल


    जाजमऊ-केडीए कालोनी में बसे हुए तीन दशक बीत गए लेकिन जिस कदर यहां अतिक्रमण ने अराजकता की है, उसके मुताबिक आने वाले दस साल में इस इलाके का हाल भी बेगमगंज जैसा होगा। अभी तो ये हालात हैं कि आदमी का निकलना तो दूर शव यात्रा तक नहीं निकल पाती। आने वाले दिनो में रामलीला होनी है लेकिन पूरे रामलीला मैदान में पानी भरा हुआ है, लोग कहां बैठेंगे पता नहीं। 50 हजार आबादी के हिसाब से सुविधाओं वाले क्षेत्र में फ्लैट बना-बनाकर पांच लाख लोग बसा दिए गए हैं। अब सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।
    - गुलजार अहमद खान


    बरसात में गलियों तक में पानी भर जाता है। विधायक कभी क्षेत्र का भ्रमण नहीं करते। नालियों का जलनिकास न होने से पानी सड़कों पर उतराता रहता है। जिससे बीमारियां भी फैलती हैं। स्वच्छता का कोई प्रभावी इंतजाम नहीं है। बरसात तो बरसात सामान्य दिनो में भी कई इलाको में पानी भरा रहता है। जिससे रास्ते पर निकलना मुश्किल हो जाता है।
    - संदीप श्रीवास्तव

     

    विधानसभा पर एक नजर

    • कुल मतदाता : 2,69,396
    • महिला मतदाता : 126998
    • पुरुष मतदाता : 142383
    • नोट:: यह मतदाता संख्या एसआइआर के बाद निर्वाचन आयोग से प्रकाशित सूची के आधार पर है।