US Tariff Impact: अमेरिका के 100% टैरिफ से कानपुर के निर्यात पर संकट, उद्यमी अब स्थानीय बाजार में तलाश रहे विकल्प
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ से भारतीय निर्यातकों, खासकर कानपुर के उद्यमियों को भारी झटका लगा है। इससे निर्यात लागत बढ़ने और अमेरिकी बाजार में प्रत ...और पढ़ें

HighLights
अमेरिका के टैरिफ से भारतीय निर्यातकों को झटका।
निर्यात लागत बढ़ने से नए बाजार तलाशने की चुनौती।
कानपुर के उद्यमी व्यापारिक तनाव से चिंतित हैं।
जागरण संवाददाता, कानपुर। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर बड़े तनाव के संकेत ने स्थानीय उद्यमियों व निर्यातकों के माथे पर पसीना ला दिया है। पिछले साल के दौरान 50 प्रतिशत टैरिफ की मार सह चुके निर्यातक और उद्यमी अब नए झटके के लिए तैयार नहीं हैं। दोगुणा दाम बढ़ने पर निर्यात खर्च भी निर्यात की बाधा बनने वाला है। ऐसे में अब भारतीय बाजार में ही माल आपूर्ति की संभावना पर उद्यमी विचार करने लगे हैं।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जनवरी - दिसबंर 2025 में मेरिका को भारत का माल निर्यात लगभग 92.29 अरब डालर रहा। यह भारत से होने वाले कुल माल निर्यात का 20.74 प्रतिशत है। इसलिए अमेरिका मे टैरिफ बढ़ने का मतलब है कि निर्यातकों को अब नए बाजार तलाशने पड़ेंगे। यूरोप, ब्रिटेन, अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों के साथ केंद्र सरकार ने पिछले साल भर के दौरान नए व्यापारिक समझौते किए हैं जिससे थोडा संकट कम है लेकिन नई स्थितियों में मुश्किल बढ़नी तय है।
पिछले एक साल में टैरिफ का पूरा उतार-चढ़ाव
अमेरिका-भारत व्यापार के लिए पिछला एक वर्ष असाधारण रूप से अस्थिर रहा है। टैरिफ की स्थिति कई बार बदली और हर बदलाव ने भारतीय निर्यातकों की लागत, आर्डर और कीमतों पर असर डाला। अप्रैल 2025 में अमेरिका ने| भारत के लिए 27 प्रतिशत तक का टैरिफ प्रस्तावित किया। इससे निर्यातकों में भारी अनिश्चितता का माहौल रहा। आखिरकार अगस्त 2025 के प्रारंभ में 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। अगस्त 2025 के अंत में रूस से तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। फरवरी 2026 के दौरान बातचीत के बाद अतिरिक्त दबाव घटा और दर लगभग 18 प्रतिशत तक आई। 24 जुलाई 2026 को श्रमकानूनों को आधार बनाकर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। जिससे कई उत्पादों पर नया बोझ पड़ रहा है।
अमेरिका अपनी शर्तों पर क्रूड आयल का कारोबार पूरी दुनिया में करना चाहता है। क्रूड आयल की खरीद महंगी हुई तो भारत के सभी उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इससे भी महंगाई बढ़ेगी और देश को नुकसान ही उठाना पड़ेगा।
- आलोक अग्रवाल, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आइआइए
अमेरिकी बाजार को भूलकर अब दुनिया के दूसरे देशों की ओर ध्यान देने की जरूरत है। टैरिफ की मनमानी का जवाब सस्ते उत्पादन से देने का विकल्प भी है इसके लिए अत्याधुनिक मशीनों की मदद लेनी होगी।
- विनय अग्रिहोत्री, नगर अध्यक्ष पीआइए
अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाए जाने पर दोनों देशों के बीच कारोबार तभी बना रह पाएगा जब भारतीय निर्यातक और अमेरिकी खरीदार बढ़ा हुआ टैरिफ साझा करें। ऐसा नहीं होने पर अमेरिका को होने वाला निर्यात आधा से भी कम हो जाएगा।
- जफर फिरोज, आयात - निर्यात विशेषज्ञ