कानपुर का निर्यात 15,000 करोड़ के पार, एफटीए से मिलेगी संजीवनी
मुक्त व्यापार समझौतों के कारण कानपुर का निर्यात अमेरिकी टैरिफ के झटके से उबरकर अगले दो साल में 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। ये समझौते ' ...और पढ़ें

HighLights
अमेरिकी टैरिफ का झटके से बाहर निकलेगा शहर का निर्यात
एक साल में 12 से 13 हजार करोड़ तक बढ़ जाएगा निर्यात
जागरण संवाददाता, कानपुर। ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, आस्ट्रेलिया और अब न्यूजीलैंड समेत अब तक 38 से अधिक देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों ने औद्योगिक नगरी कानपुर के निर्यातकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। पिछले साल अमेरिकी टैरिफ से नुकसान उठाने वाले निर्यातक अब भरपाई की तैयारी में हैं। अगले दो साल के दौरान कानपुर का कुल निर्यात 15 हजार कराेड़ रुपये के शिखर को छू लेगा। न्यूजीलैंड से होने वाले समझौते से शहर के सभी एमएसएमई के कारोबार में उछाल आने की संभावना है।
मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) कानपुर के 'मेक इन कानपुर' उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में गेम-चेंजर साबित होंगे। सालाना 10,000 करोड़ से अधिक का निर्यात करने वाला कानपुर अभी तक इन देशों में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल अमेरिकी टैरिफ के कारण बने नकारात्मक माहौल के बाद, ये समझौते स्थानीय उद्यमियों के लिए 'संजीवनी' की तरह हैं। इससे लेदर, होजरी और इंजीनियरिंग के अलावा प्लास्टिक के निर्यातकों को विशेष लाभ मिलेगा।
अमेरिकी टैरिफ का झटका लगने से पहले कानपुर का निर्यात 15 प्रतिशत सालाना की वृद्धि दर्ज कर रहा था। वित्त वर्ष 2024-25 में कानपुर का कुल निर्यात 10,401 करोड़ रुपये रहा, जो इससे एक साल पहले के 8,991 करोड़ से 15.68 प्रतिशत अधिक रहा है। उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर ने निर्यात में इतनी वृद्धि नहीं की है। लेकिन पिछले साल अमेरिकी टैरिफ ने निर्यात के जहाज में लंगर डाल दिया है।
एफटीए ने बढ़ाई उम्मीद
निर्यात विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन के साथ हुआ एफटीए इस साल के अंत तक पूरी तरह लागू हो जाएगा। इससे लेदर फुटवियर, सैडलरी, होजरी और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। ब्रिटेन के साथ कारोबार में सात प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। यूरोपीय यूनियन के 27 देशों में भी कारोबार बढ़ेगा तो चमड़ा, सुरक्षा जूते, इंजीनियरिंग के बड़े आर्डर मिलेंगे। इसी तरह आस्ट्रेलिया भी एक उभरता बाजार है जहां लेदर गुड्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल की अच्छी खपत है। न्यूजीजैंड का बाजार भले छोटा है लेकिन यहां उपभोक्ताओं की उच्च क्रय शक्ति इसे शक्तिशाली बनाती है। शहर के लेदर जूते, बैग, बेल्ट, सैडलरी और सुरक्षा जूतों के अलावा औद्योगिक ग्लव्स, मशीन पार्ट्स और फैशन लेदर गुड्स , प्लास्टिक , होजरी व गारमेंट्स की मांग बढ़ेगी।
एफटीए समझौते केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि ‘मेक इन कानपुर’ को वैश्विक ब्रांड बनाने का अवसर हैं। आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता मानकों और ब्रांडिंग पर ध्यान देने से शहर के निर्यात में अप्रत्याशित वृद्धि संभव है। अगले दो साल में निर्यात 15 हजार करोड़ से ऊपर जाने की उम्मीद है।
- मुख्तारुल अमीन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चर्म निर्यात परिषद
मुक्त व्यापार समझौतों की राह ने देश के निर्यात को नई दिशा दी है। यूरोपीय संघ से लेकर खाड़ी देश, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण पूर्व एशिया के देश भी अब भारतीय निर्यातकों की पहुंच में आ गए हैं।अब उद्यमियों को यह मौका भुनाना होगा।
-आलोक श्रीवास्तव सहायक निदेशक फियो
निर्यात बढ़ने से एमएसएमई का उत्पादन बढ़ेगा जो आर्थिक विकास दर को बढ़ाने वाला होगा। इससे स्थानीय उद्यमियों की भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। पिछले एक साल से उद्योग जगत बड़ी चुनौतियों से गुजर रहा है।
- विनय अग्निहोत्री , नगर अध्यक्ष पीआइए