कानपुर में 38 खाद बिक्री केंद्रों पर बड़ी छापेमारी, गुणवत्ता जांच के लिए 16 नमूने लिए, 2 को चेतावनी
कानपुर में खरीफ सीजन के लिए गुणवत्तापूर्ण उर्वरक सुनिश्चित करने हेतु 28 खाद दुकानों पर कृषि विभाग ने छापेमारी की। जांच में 16 नमूने लिए गए और दो दुकान ...और पढ़ें

खाद की दुकान में स्टाक का मिलान करते जिला कृषि अधिकारी अरुणेश प्रताप सिंह। कृषि विभाग
HighLights
डीएम के निर्देश पर खाद दुकानों पर छापेमारी की गई।
28 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 16 उर्वरक नमूने एकत्र किए गए।
दो बिक्री केंद्रों को अनियमितताओं पर चेतावनी जारी हुई।
जागरण संवाददाता, कानपुर। खरीफ सीजन में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए डीएम के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने खाद की दुकानों पर छापेमारी की। निजी एवं सहकारी क्षेत्र के थोक और फुटकर उर्वरक बिक्री केंद्रों और विनिर्माण इकाइयों में पहुंचकर जांच टीम ने खाद की उपलब्धता और स्टाक रजिस्टर और गुणवत्ता का मिलान किया।
जिला कृषि अधिकारी अरुणेश प्रताप सिंह ने बताया कि 28 उर्वरक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच के लिए 16 नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन में दर्ज स्टाक और भौतिक स्टाक का भी मिलान किया गया। राहत की बात यह रही कि किसी भी बिक्री केंद्र पर दोनों में कोई अंतर नहीं मिला।
इसके अलावा किसी भी उर्वरक प्रतिष्ठान के लाइसेंस को निलंबित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। हालांकि जांच के दौरान दो बिक्री केंद्रों पर निर्धारित मानकों और अभिलेखों के रखरखाव में कमियां मिलने पर संबंधित संचालकों को चेतावनी जारी की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दोबारा अनियमितता मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को नकली या घटिया उर्वरक से बचाने तथा निर्धारित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने उर्वरक विक्रेताओं को स्टॉक, बिक्री रजिस्टर और पीओएस मशीन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसानों से अपील की गई है कि उर्वरक खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें और किसी भी प्रकार की अनियमितता या अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायत तत्काल कृषि विभाग या जिला प्रशासन से करें।