कानपुर में चचेरी बहनों का अश्लील वीडियो बनाने वाला आरोपी 'पीडोफाइल' से ग्रसित, ऐसे साइको अपराधियों को इस तरह पहचानें
कानपुर में एक युवक के मोबाइल से बच्चियों के अश्लील वीडियो मिलने के बाद उसे पीडोफीलिया से ग्रसित बताया गया है, जो एक मानसिक रोग है। अभिभावकों को बच्चों ...और पढ़ें

HighLights
कानपुर में युवक के मोबाइल पर मिले बच्चियों के अश्लील वीडियो।
आरोपी पीडोफीलिया से ग्रसित, जो एक गंभीर मानसिक रोग है।
बच्चों को गुड टच-बैड टच और आपातकालीन नंबर सिखाएं।
जागरण संवाददाता, कानपुर। चमनगंज के जिस युवक के मोबाइल पर उनके परिवार व पड़ोसियों की बच्चियों के अश्लील वीडियो मिले हैं। उस तरह के लोग पीडोफीलिया से ग्रसित माने जाते हैं, जिनकी नजर ज्यादातर कम उम्र के बच्चियों पर होती है, लेकिन इनकी करतूतें पहले कोई नहीं भांप पाता है, जब तक वह अपराध न करने लगे।
पीडीफाइल या पीडीफीलिया एक ग्रसित लोग अक्सर बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं। ऐसे आरोपित के निशाने पर अनजान व्यक्ति न होकर करीबी या रिश्तेदार के बच्चे ज्यादा होते हैं। आरोपित उन बच्चों व बच्चियों की फोटो-वीडियो इंटरनेट मीडिया के माध्यम से प्रसारित भी कर देते हैं। पीडीफीलिया से ग्रसिम लोग बच्चों को किसी न किसी चीज का लालच देकर उनकी अश्लील फोटो-वीडियो बना लेते हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डाक्टर धनंजय चौधरी ने बताया कि ऐसे लोग पीडोफीलिया से ग्रसित होते हैं, जो एक मानसिक रोग है। इनकी बीमारी या इनकी करतूत कोई तब तक नही पहचान सकता जब तक ये अपराध न करें। ऐसे में अभिभावक इस बात का ध्यान रखें कि अगर कोई व्यक्ति उनकी बच्चियों को संदिग्ध नजरों से देखे या बार-बार देखकर गलत हरकतें करें तो सतर्क हो जाएं औ उससे बच्चियों को दूर रखें।
बच्चियों के लिए सुरक्षा और बचाव के तरीक
- गुड टच और बैड टच: बच्चियों को समझाएं कि उनके शरीर के कुछ हिस्से जैसे होंठ, छाती और पैरों के बीच का हिस्सा सिर्फ उनके अपने हैं। कोई भी बाहरी व्यक्ति या परिचित व्यक्ति इन हिस्सों को छू नहीं सकता।
- जागरूकता: अगर कोई उन्हें गलत तरीके से छूता है या उनके सामने असहज व्यवहार करता है, तो उन्हें तुरंत वहां से दूर हो जाना चाहिए और वह उनके पीछे आए तो जोर से ना कहकर लोगों को बुलाना है।
- आपातकालीन जानकारियां व महत्वपूर्ण नंबर रखें याद: अपनी बच्चियों को अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम और परिवार के कम से कम दो मोबाइल नंबर जरूर याद कराएं।
- सुरक्षित लोगों की पहचान: बच्चियों को बताएं कि मुसीबत के समय हमेशा पुलिस की मदद लें। अगर पुलिस आसपास न हो, तो किसी ऐसी महिला से मदद मांगें, जिसके साथ उनका अपना बच्चा भी हो।
- गलत बात पर विरोध: बच्चियों को सिखाएं कि अगर कोई बात उन्हें ठीक नहीं लगती या कोई उन्हें असहज करता है, तो वे बेझिझक ''''न'''' कह दें। किसी भी बड़े या परिचित के दबाव में न आएं।
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