कानपुर नगर निगम कार्यकारिणी बैठक शुरू होने से पहले ही हंगामा, महापौर लेकर पहुंची अधिवक्ता, नगर आयुक्त ने छोड़ी बैठक
कानपुर नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में अधिवक्ता की मौजूदगी पर नगर आयुक्त ने आपत्ति जताई, जिसके बाद वे अधिकारियों ...और पढ़ें
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बैठक को छोड़कर जाते नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय व प्रेसवार्ता करतीं महापौर प्रमिला पांडेय । जागरण
HighLights
अधिवक्ता की मौजूदगी पर नगर आयुक्त ने आपत्ति जताई
नगर आयुक्त अधिकारियों संग बैठक छोड़कर चले गए
पार्षदों के हंगामे के बाद महापौर ने बैठक बुलाई
जागरण संवाददाता, कानपुर। महापौर और नगर आयुक्त के बीच चल रही खींचतान का असर अब शहर के विकास पर पड़ने लगा है। अक्टूबर माह में बुधवार को चौथी बार कार्यकारिणी की बैठक हुई, लेकिन हंगामा के चलते कोई काम नहीं हुआ। बुधवार को हुई कार्यकारिणी बैठक में महापौर प्रमिला पांडेय द्वारा अधिवक्ताओं को बैठाए जाने से नाराज नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय अफसरों के साथ बैठक छोड़कर चले गए।
इससे नाराज पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की और परिसर में धरना देकर विरोध जताया। नाराज महापौर ने कहा कि नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 117 के तहत किसी को बुला सकती है। इस मामले की जानकारी शासन और डायरेक्टरेट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग को जानकारी दी जाएगी। वहीं, नगर आयुक्त ने साफ कहा कि वह बैठक में मौजूद किसी बाहरी व्यक्ति को जवाब नहीं देंगे।
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नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक करतीं महापौर प्रमिला पांडेय। साथ में नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय व बैठे अधिवक्ता। जागरण
अक्टूबर महीने में पांच, सात, नौ और 28 अक्टूबर को कार्यकारिणी बैठक बुलाई गई, मगर किसी में शहर के विकास पर बात नहीं हो सकी। एक ओर आम आदमी जहां जजर्र सड़क मार्ग, गड्ढों, ध्वस्त पेयजल, सीवर और ड्रेनेज सिस्टम से जूझ रहा है, वहीं अफसर आपसी झगड़े में व्यस्त हैं।
कार्यकारिणी की बैठक दोपहर सवा दो बजे से शुरू हुई। बैठक 15 मिनट में ढाई बजे बिना नतीजे के खत्म हो गई। असल में महापौर प्रमिला पांडेय ने बैठक में विधिक राय लेने का हवाला देकर दो अधिवक्ता मोहम्मद जावेद व ऋषभ अवस्थी को भी अपने साथ में बैठा लिया था। इस पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने नाराजगी जताई और बिफर गए। बोले, वह बाहरी व्यक्तियों को जवाब देने के लिए नहीं बैठे है। इसके बाद नगर आयुक्त अफसरों के साथ बैठक से चले गए।
नगर आयुक्त के कार्यकारिणी बैठक से उठकर बाहर चले जाने के विरोध में पार्षदों ने धरना दिया और नारेबाजी करी। लेकिन केवल 10 मिनट ही मीडिया के कैमरे के सामने विरोध किया उसके बाद धरना खत्म हो गया। जागरण
सभी दलों के पार्षद बैठे धरने पर
नगर आयुक्त द्वारा कार्यकारिणी बैठक छोड़े जाने से नाराज सभी दल के पार्षद भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित की अगुवाई में भीमराव आंबेडकर की फोटो हाथ में लेकर महापौर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। पार्षदों ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक छोड़कर चले जाना संविधान का अपमान है। हालांकि सिर्फ 10 मिनट बैठे।
यह है डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग
इसे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग कहते हैं। यह भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत काम करता है। आइएएस अधिकारियों से जुड़े मामले में नियुक्ति, कैडर प्रबंधन, प्रतिनियुक्ति और सेवा संबंधी नीतियों में भूमिका निभाता है। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों की नीतियां, जैसे कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े नियम बनाता है। सिविल सेवा भर्ती व्यवस्था तथा प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण से संबंधित काम भी करता है।
विधिक राय लेने के लिए अधिवक्ताओं को बैठाया था। इसको लेकर नगर आयुक्त को सुबह बता दिया था। मुद्दा केवल यह है कि नगर आयुक्त बैठक के फैसलों के संबंध में कार्यकारिणी व सदन को बताएं, जो अब तक नहीं हो रहा है। मामले की जानकारी शासन और डायरेक्टरेट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग को दी जाएगी।
प्रमिला पांडेय, महापौर
नगर निगम की बैठक में अनाधिकृत एवं गैर-कार्यकारिणी बाहरी व्यक्तियों की उपस्थिति पर विरोध जताया है। अनाधिकृत व्यक्तियों के समक्ष विचार-विमर्श अथवा विवरण साझा किया जाना नियमों के प्रतिकूल है। इस आपत्ति के उपरांत बैठक संचालित नहीं हो सकी।
अर्पित उपाध्याय नगर आयुक्त
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