बजट 2026 में पान मसाला-तंबाकू और सिगरेट पर 40% बढ़ा टैक्स, मार्केट में कब से बढ़ेगी कीमतें?
कानपुर में पान मसाला, तंबाकू और सिगरेट उत्पादों पर रविवार से 40% से अधिक जीएसटी, स्वास्थ्य उपकर और उत्पाद शुल्क लागू हो गया है। इससे इन उत्पादों की की ...और पढ़ें
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HighLights
पान मसाला, सिगरेट पर 40% से अधिक टैक्स बढ़ा।
उत्पादों की कीमतों में भारी उछाल, टैक्स चोरी का डर।
केंद्रीय जीएसटी टीम अलर्ट, फैक्ट्रियों का सत्यापन होगा।
जागरण संवाददाता, कानपुर। पान मसाला, तंबाकू और सिगरेट उत्पादों पर रविवार से 40 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अलावा स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपकर और उत्पाद शुल्क भी लग गया है। इससे इन उत्पादों की कीमत में रविवार से ही 40 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है।
दाम बढ़ने के साथ ही बाजार में टैक्स चोरी का माल खपाने की आशंका भी बढ़ गई है। इससे निपटने के लिए अब केंद्रीय जीएसटी की टीम पर बड़ी कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया है। विभाग की जांच टीमों को पहले से ही अलर्ट किया गया है।
अब केंद्रीय जीएसटी को पान मसाला उत्पादकों से उत्पाद शुल्क भी वसूलना है। शहर में पान मसाला की एक दर्जन से अधिक इकाइयां सक्रिय हैं। अभी तक कंपनियों ने शहर में अलग-अलग उत्पादन की व्यवस्था कर रखी है लेकिन नई कर व्यवस्था में हर फैक्ट्री का अलग से पंजीकरण कराना जरूरी हो गया है।
पान मसाला कंपनियों से अभी प्रति मशीन सरकार 18 लाख रुपये का शुल्क लेती आ रही है। मर्चेंट्स चैंबर आफ उप्र की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि फैक्ट्री संचालकों की अपनी इकाई में लगी मशीनों की संख्या उनकी अधिकतम उत्पादन क्षमता के साथ पूरी जानकारी विभाग को देनी है।
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कंपनियों की घोषणा के 10 दिन के भीतर जीएसटी व एक्साइज विभाग की टीम सभी फैक्ट्रियों में जाकर मशीनों का भौतिक सत्यापन भी कराएगी। इस प्रक्रिया को पूरी करने में समय लग सकता है। इस बीच एक फरवरी से नए नियम और कर की दर लागू हो गई है तो अब टैक्स भी नए नियमों के अनुसार ही जमा कराया जाएगा।
कीमतों में आया 40 प्रतिशत उछाल
पान मसाला और सिगरेट व तंबाकू पर टैक्स की दरें बढ़ने का असर रविवार को ही दिखाई दिया। घंटाघर क्षेत्र के एक थोक कारोबारी ने बताया कि एक दिन पहले से ही कंपनियों ने पान मसाला और अन्य उत्पादों के दाम बढ़ा दिए थे।
पान मसाला और सिगरेट के दामों में 15 से लेकर 40 प्रतिशत तक वृ़द्धि हुई है। सोमवार को बाजार खुलने पर पता चलेगा कि नए प्रिंट वाले उत्पाद बाजार में आएंगे या पुराने पर ही अधिक टैक्स देना होगा।