कानपुर में आलू कारोबारी के शव की नहीं कराई पहचान, अज्ञात समझ कराया अंतिम संस्कार, चौकी प्रभारी समेत दो दारोगा निलंबित
पनकी पुलिस की लापरवाही के कारण लापता आलू कारोबारी देवेश शुक्ला का शव अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे परिवार अंतिम दर्शन से वंचित रह गया। ...और पढ़ें
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HighLights
लापता आलू कारोबारी का शव अज्ञात मानकर किया अंतिम संस्कार।
पनकी पुलिस की लापरवाही पर चौकी प्रभारी, दारोगा निलंबित।
थाना प्रभारियों पर भी विभागीय जांच के आदेश, समन्वय की कमी।
संवाद सहयोगी, कल्याणपुर(कानपुर)। सचेंडी से लापता हुए जूही निवासी आलू कारोबारी देवेश शुक्ला के मामले में हर कदम पर पनकी पुलिस की लापरवाही सामने आने में पुलिस आयुक्त के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई की गई है। प्राथमिक जांच में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर पनकी इंडस्ट्रियल एरिया चौकी प्रभारी विकास वर्मा और दारोगा शरद कुमार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मामले में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने और समन्वय की कमी पाए जाने पर पनकी थाना प्रभारी दिनेश विष्ट और सचेंडी थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
जूही निवासी देवेश शुक्ला की चकरपुर मंडी में आलू की आढ़त थी। वह दो जुलाई को मंडी से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। पांच जुलाई को उनके भाई मनोज शुक्ला ने बारादेवी निवासी आढ़ती संजू पाल, उसके मुनीम टिंकू यादव और एक आटो चालक के खिलाफ सचेंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के दौरान आटो चालक के पास देवेश का मोबाइल फोन मिला और संजू पाल व उसके मुनीम के साथ देवेश को आखिरी बार देखे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इसी बीच जांच में सामने आया कि तीन जुलाई को देवेश घायल अवस्था में पनकी क्षेत्र में मिले थे। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां सात जुलाई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। आरोप है कि पनकी पुलिस ने शव का पंचनामा भरने के बावजूद उसकी पहचान कराने का प्रयास नहीं किया। इतना ही नहीं, विभिन्न पुलिस ग्रुपों में प्रसारित लापता व्यापारी की तस्वीर से भी शव का मिलान नहीं कराया। 10 जुलाई को अज्ञात मानकर शव का अंतिम संस्कार करा दिया। मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों को भी नहीं दी गई।
लापरवाही का आलम यह रहा कि व्यापारी के अंतिम संस्कार के आठ दिन बाद, 18 जुलाई को उन्हें तलाशने के लिए 25 हजार रुपये का इनाम तक घोषित कर दिया गया। बाद में स्वजन जब फोरेंसिक कार्यालय पहुंचे तो पूरे मामले का राजफाश हो गया। इसके बाद पनकी पुलिस ने शुरुआती स्तर पर घटना की जानकारी होने से भी इंकार कर दिया। वहीं, दिवंगत के भाई अधिवक्ता विकास शुक्ला ने बताया कि उनका छह भाइयों का संयुक्त परिवार है, जिसमें करीब 30 सदस्य हैं। पुलिस की घोर लापरवाही के कारण परिवार अपने भाई के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सका।
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उनका कहना है कि यदि समय रहते सूचना मिल जाती तो उन्हें किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता था और शायद उनकी जान भी बच जाती। इधर, पनकी थाना प्रभारी दिनेश विष्ट का कहना है कि उन्हें घटना की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। पहली बार सचेंडी पुलिस ने केवल यह पूछा था कि देवेश नाम का कोई व्यक्ति हवालात में तो नहीं है। दूसरी बार अज्ञात शव के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। उनका कहना है कि तीन जुलाई को केवल एंबुलेंस से घायल को सीएचसी में भर्ती कराने की सूचना मिली थी।
दूसरी ओर, सचेंडी थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा ने दावा किया कि लापता व्यापारी के संबंध में जिले के सभी थानों और प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूचना व पंपलेट भेजे गए थे। पनकी पुलिस से कई बार संपर्क भी किया गया। रविवार को अधिवक्ता विकास शुक्ला ने डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी से मुलाकात कर मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, शेष आरोपितों की गिरफ्तारी और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराने की मांग की।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि प्राथमिक जांच में इंडस्ट्रियल एरिया चौकी प्रभारी विकास वर्मा और दारोगा शरद कुमार की गंभीर लापरवाही सामने आई है। चौकी प्रभारी यूपी-112 की सूचना मिलने के बावजूद मौके पर नहीं पहुंचे और घायल की पहचान का प्रयास भी नहीं किया। वहीं, सात जुलाई को पंचनामा भरने पहुंचे दारोगा शरद कुमार ने शव की पहचान सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई नहीं की। दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, मामले में समुचित समन्वय न रखने और जिम्मेदारी से बचने के आरोप में पनकी व सचेंडी थाना प्रभारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
छोटे भाइयों के बच्चे बोलते थे डैडी, पिता व पत्नी बेसुध
दिवंगत के भाई विकास शुक्ला ने बताया कि उनका संयुक्त परिवार है। भाई देवेश छह भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। छोटे भाइयों के बच्चे उन्हें डैडी बोलते थे। वह अपने पीछे पत्नी आराधना ,दो बेटियां निहारिका,सौम्या और बेटे संस्कार को छोड़ गए है। भाभी आराधना बार बार बेहोश हो जाती हैं। बीमार पिता मिथलेश शुक्ला आक्सीजन पर है,जानकारी के बाद वह बेसुध है। बच्चों का रो रोकर बुरा हाल है। बार-बार वह सभी भैया के बारे में पूछते हैं। उन्हें कैसे समझाया जाए।वह स्वजन के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे।
मुनीम और आटो चालक को हिरासत में लिया
आलू कारोबारी के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे तो पूरा महकमा हरकत में आ गया। आनन-फानन में लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई शुरू हो गई तो दूसरी ओर कारोबारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेड इंजरी से मौत की पुष्टि की जानकारी पर सचेंडी पुलिस ने फिर से जांच शुरू कर दी है। देर रात पुलिस ने मामले में रविवार देर शाम सचेंडी पुलिस ने नामजद आरोपित मुनीम टिंकू और आटो चालक प्रांशु को हिरासत में लिया है। दोनों से पूछताछ जारी है।