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    ठेठ कनपुरिया और मायानगरी का मुकाम, पढ़ें, शरद त्रिपाठी के राइटर से क्रिएटिव प्रोड्यूसर बनने की कहानी

    By Anurag ShuklaEdited By: Anurag Shukla
    Updated: Sat, 04 Apr 2026 10:01 PM (IST)

    टेलीविजन जगत के जाने-माने स्क्रिप्ट राइटर व क्रिएटिव प्रोड्यूसर शरद त्रिपाठी मुंबई में सफलता के बावजूद अपनी कनपुरिया जड़ों से जुड़े हुए हैं। कानपुर मे ...और पढ़ें

    शरद त्रिपाठी। स्वयं

    शरद त्रिपाठी। स्वयं

    अनुराग शुक्ला, कानपुर। मुंबई की चकाचौंध और मायानगरी में जहां लोग अपनी जड़ें भूल जाते हैं, वहीं एक शख्स ऐसा है जिसकी बातों में आज भी ठेठ कनपुरिया है। मसाले वाली गलियों की खुशबू और माल रोड की चाट का जायका आज भी उनके जेहन में जिंदा है। बात कर रहे हैं टेलीविजन जगत में अपनी धाक जमाने वाले स्क्रिप्ट राइटर व क्रिएटिव प्रोड्यूसर शरद त्रिपाठी की। शहर के हैलट अस्पताल जन्में शरद का बचपन सर्वोदय नगर की गलियों में बीता। पढ़िए उनके जीवन की सफलता के अनसुने किस्से...

    देवकी टाकीज के पास में सर्वोदय नगर निवासी शरद त्रिपाठी की 12 वीं तक शिक्षा शहर में हुई। इसके बाद उनका परिवार प्रयागराज चला गया, लेकिन शरद के सपनों ने उन्हें मुंबई की ओर खींच लिया। शरद बताते हैं कि उनके लिए कानपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक अहसास है। गर्व से कहता हूं कि दुनिया के बड़े-बड़े शहरों (लंदन, स्विट्जरलैंड, लास एंजिलिस) की तुलना में उन्हें सबसे प्यारा अपना कानपुर ही लगता है। उनका मानना है कि यहां की परवरिश ने उन्हें एक ऐसी 'स्ट्रीट स्मार्टनेस' और 'सर्वाइवल स्किल' दी है, जिसकी बदौलत वे दुनिया के किसी भी कोने में खुद को स्थापित कर सकते हैं।

    कानपुर की गलियों में जीने का मन करता है

    शरद कहते हैं कि बिरहाना रोड की खस्ता कचौरी हो, कचहरी के पास के छोले भटूरे, शिवाले का डोसा इन सब स्वादों को आज भी मिस करते हैं। अशोक नगर में आइसक्रीम और बनारसी चाय की मलाई, काकादेव की मटर चाट और हीर पैलेस की 'गड़बड़ चाट' उनके कानपुरिया जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। गंगा बैराज की सैर और दोस्तों के साथ बिताए पल आज भी उनकी यादों में ताजा हैं। आज भी कानपुर की गलियों में जीने का मन करता है।

    करियर और उपलब्धियां

    पिछले 15-20 वर्षों से मुंबई में हैं। करियर की शुरुआत मशहूर प्रोडक्शन हाउस 'बालाजी टेलीफिल्म्स' से की थी। 80 से 85 से अधिक शो, डेली सोप, फिल्में, वेब सीरीज और गाने शामिल हैं। दावा है कि उन्होंने दुनिया का सबसे लंबा (28 मिनट का) वन-सीन मोनोलाग लिखकर विश्व रिकार्ड बनाया, जिसे अभिनेता रवि दुबे ने जीवंत किया। दंगल चैनल पर ‘इश्क जुनूनी’, जी 5 पर आगामी वेब सीरीज ‘सतरंगी’ (9 मई से प्रसारित) और फिल्म ‘हनुमान भैया’ के निर्देशन की तैयारियों में जुटे हैं। उनकी पुस्तक ‘90 वाला प्यार’ की कहानियों में शहर का अक्स साफ दिखाई देता है। कलर्स टीवी के नए शो ‘दो दुनिया एक दिल’ के लेखक और क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं। ‘दो दुनिया एक दिल’ में कन्नौज और आगरा की पृष्ठभूमि के साथ-साथ कनपुरिया और कन्नौजिया लहजे का इस्तेमाल किया गया है।

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    कन्नौज की खुशबू और साइबर अपराध की दास्तां

    शरद त्रिपाठी बताते हैं कि शो ‘दो दुनिया एक दिल’ जो कन्नौज और आगरा की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह कहानी ‘इत्र की नगरी’ कन्नौज के युवा शिवाय के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक साइबर अपराध में अपने जीवन की जमा पूंजी (50 लाख रुपये) गंवा देता है। शो में कन्नौज की संस्कृति और वहां के इत्र उद्योग को बखूबी दिखाया गया है। शरद त्रिपाठी ने इस शहर के लिए एक खास टैगलाइन भी तैयार की है, ‘महकते रहिए कि आप कन्नौज में हैं।’