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    Lucknow-Kanpur Expressway Ground Report: शिलान्यास से उद्घाटन तक लगे साढ़े चार साल, 13 दिन भी न चला एक्सप्रेसवे

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 09:56 PM (IST)

    4200 करोड़ रुपये की लागत से बना लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के 13 दिन बाद ही धंसने लगा है, जिससे इसकी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 2 ...और पढ़ें

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर किमी संख्या 30.6 पर धंसे हिस्से की मरम्मत के लिए उखाड़ी गयी सड़क। जागरण

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर किमी संख्या 30.6 पर धंसे हिस्से की मरम्मत के लिए उखाड़ी गयी सड़क। जागरण             

    HighLights

    1. उद्घाटन के मात्र 13 दिन बाद एक्सप्रेसवे धंसने लगा

    2. 24 दिन में 15 जगह सड़क धंसी, 60 पैच लगे

    3. एनएचएआई जांच कर रहा, पीएनसी ने मामूली क्षति बताई

    जागरण संवाददाता, उन्नाव/कानपुर। 63 किमी लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कहानी सिर्फ सड़क परियोजना की नहीं, बल्कि देरी और निर्माण गुणवत्ता पर उठते सवालों की भी बन गई है। करीब साढ़े चार साल के लंबे इंतजार और 4200 करोड़ रुपये खर्च कर तैयार एक्सप्रेसवे की सड़क उद्घाटन के 13वें दिन से ही दिन धंसने लगी। छोटी-छोटी समस्याएं छोड़ दी जाएं तो अब तक 24 दिन में 15 जगह सड़क धंस चुकी है।

    उन्नाव सीमा क्षेत्र में 45 किमी के ग्रीनफील्ड हिस्से में 60 जगह पैच लग चुके हैं। कई जगह तो स्थिति ऐसी है कि चूके तो हादसा तय है। अब उन दावों पर सवाल हैं, जिनमें कहा गया था कि सड़क आधुनिक तकनीक से बनेगी। एक दशक तक इसमें गड्ढे नहीं होंगे। एनएचएआइ लखनऊ इकाई के परियोजना निदेशक नवरत्न के मुताबिक कारणों का पता लगाया जा रहा है। सात दिन में जांच रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहना उचित रहेगा। इस बीच उन्नाव से लखनऊ की ओर भारी वाहन नहीं जाने दिए जा रहे, लेकिन लखनऊ की ओर से रोक नहीं है।

    Lucknow Kanpur Expressway Damage

    2018 में बनी थी डीपीआर, पीएम ने किया था शिलान्यास

    परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) नवंबर 2018 में तैयार हुई थी। मार्च 2019 में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने भूमिपूजन किया और पांच जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिलान्यास किया। एनएचएआइ और निर्माण एजेंसी पीएनसी इन्फ्राटेक के बीच हुए अनुबंध के अनुसार परियोजना को 30 माह में पूरा कर नवंबर-दिसंबर 2025 तक चालू किया जाना था।

    Lucknow Kanpur Expressway Damage

    13 जुलाई को हुआ था उद्घाटन

    लखनऊ के एलीवेटेड सेक्शन में देरी से निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका। परियोजना को 11 जून 2026 को पूर्णता प्रमाणपत्र मिला। 13 जुलाई 2026 को उद्घाटन और दूसरे दिन से वाहन चलने शुरू हो गए। 26 जुलाई को कोरारी के पास किमी संख्या 64 पर करीब 30 मीटर रोड धंस गया। इसके बाद सात अगस्त तक अलग-अलग स्थानों पर 15 जगह लंबी दूरी में सड़क धंसने के मामले सामने आए।

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    Lucknow Kanpur Expressway Damage

    कब और कहां धंस जाएगा एक्सप्रेसवे, जिम्मेदारी कौन लेगा?

    सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एके शुक्ल का कहना है कि शुरुआती बारिश में ही सड़क क्षतिग्रस्त हो जाए तो डिजाइन, निर्माण सामग्री, जल निकासी व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण सभी की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। टोल वसूली बंद कर दी गई है, इससे लोगों को फायदा है, लेकिन सड़क कब और कहां धंस जाएगी, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। मिट्टी भराई और बिटुमिन की लेयर बिछाते समय और निगरानी में लापरवाही हुई। सड़क चलने लायक नहीं बची। पैचवर्क के बजाय सड़क नए सिरे से बननी चाहिए।

    Lucknow Kanpur Expressway Damage

    किमी संख्या 64 पर मरम्मत पूरी, डायवर्जन खत्म

    उन्नाव-लखनऊ लेन पर छह छह दिन से किमी संख्या 64 पर 200 मीटर के दायरे में चल रहा मरम्मत कार्य शुक्रवार को पूरा हो गया। पूर्वाह्न 11 बजे डायवर्जन भी खत्म कर दिया गया। अब बाबा खेड़ा के पास किमी संख्या 30.9 से लेकर 29.8 के बीच 800 मीटर सड़क फूलने और फटने की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत हो रही है।


    ये हैं जिम्मेदार

    • गौतम विशाल, क्षेत्रीय परियोजना निदेशक
    • संजीव शर्मा, पूर्व क्षेत्रीय परियोजना निदेशक
    • नुकल वर्मा, पूर्व परियोजना निदेशक, एनएचएआइ लखनऊ इकाई
    • विवेक कुमार गुप्ता, निर्माणकारी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर-सह-डीजीएम (हाइवे)
    • सुरेंद्र कुमार, स्वतंत्र इंजीनियर
    • यतेंद्र कुमार, रेसिडेंट इंजीनियर


    पीएनसी ने कहा, सिर्फ 300 मीटर हिस्सा प्रभावित

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के मामले में पीएनसी इंफ्राटेक ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि लगातार बारिश से केवल करीब 300 मीटर हिस्सा प्रभावित हुआ है, जो पूरे एक्सप्रेसवे का 0.5 प्रतिशत से भी कम है। अधिकांश मरम्मत पूरी हो चुकी है और यातायात सामान्य है।

    NHAI ने न डिबार किया न नान परफार्मर घोषित

    कंपनी ने कहा कि उसे एनएचएआइ ने न तो डिबार किया है और न ही 'नान-परफार्मर' घोषित किया है। एनएचएआइ के नोटिस का जवाब जल्द दिया जाएगा। कंपनी के अनुसार, 15 वर्ष तक रखरखाव उसकी जिम्मेदारी है। हालांकि एनएचएआइ सुरक्षा राशि का दो प्रतिशत जुर्माना, अधिकारियों पर कार्रवाई और रेटिंग घटाने जैसी कार्रवाई की है।

    एक्सप्रेसवे की सड़क बनाने में ये होते मानक

    एक्सप्रेसवे की जांच कर रहे एनआइटी वारंगल के इंजीनियर रवींद्र यादव के अनुसार सड़क निर्माण में सबसे पहले मिट्टी की मजबूती की जांच परीक्षण के जरिये होती है। यदि मिट्टी की भार सहन क्षमता निर्धारित मानक से कम हो तो पूरी सड़क भविष्य में बैठ सकती है। इसके बाद ग्रेन्युलर सब-बेस और वेट मिक्स मैकडम (यह सड़क की सबसे नीचे वाली मजबूत दो परत होती है, जो तैयार की गई मिट्टी के ऊपर बिछाई जाती है, की जांच की जाती है। इन दोनों परतों की मोटाई, घनत्व और कंप्रेशन की जांच न्यूक्लियर डेंसिटी गेज (वह आधुनिक मशीन,जिससे सड़क की परत को बिना खोदे ही उसका घनत्व और कंप्रेशन मापा जाता है) या सैंड रिप्लेसमेंट टेस्ट (सड़क की परत में छोटा गड्ढा बनाकर उसमें भरी जाने वाली रेत की मात्रा से घनत्व और कंपेक्शन की जांच) की जाती है। मानकों के अनुसार परत को निर्धारित प्रतिशत तक दबाना अनिवार्य होता है।

    दबाव कम होने से वर्षा का पानी अंदर पहुंचकर सड़क को करता कमजोर

    इंजीनियर रवींद्र यादव ने बताया कि यदि सड़क पर दबाव (कंप्रेशन) कम हुआ तो वर्षा का पानी अंदर पहुंचकर सड़क को कमजोर कर देता है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण बिटुमिनस परत का होता है। डामर और पत्थर का अनुपात पहले प्रयोगशाला में मार्शल स्टेबिलिटी टेस्ट से तय किया जाता है। यह परीक्षण बताता है कि सड़क भारी वाहनों का कितना भार सहन करेगी। यदि मिश्रण में बिटुमेन कम या अधिक हुआ तो सड़क जल्दी उखड़ने लगेगी या गर्मी में नरम पड़ जाएगी।

    मानकों की जांच जरूरी

    निर्माण के दौरान बिछाई गई प्रत्येक परत की कोर कटिंग टेस्ट भी की जाती है। मशीन से सड़क का गोल नमूना निकालकर उसकी वास्तविक मोटाई मापी जाती है। इसी तरह बिटुमेन कंटेंट टेस्ट से यह जांचा जाता है कि मिश्रण में डामर की मात्रा अनुबंध के अनुरूप है या नहीं। सड़क की समतलता भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए स्ट्रेट एज, बंप इंटीग्रेटर या लेजर प्रोफाइलर से जांच होती है। यदि सड़क पूरी तरह समतल नहीं होगी तो पानी रुकने लगेगा और वहीं से गड्ढे बनने की शुरुआत होगी। निर्माण पूरा होने के बाद भी सड़क का अंतिम निरीक्षण होता है। इसमें पूरी लंबाई की विजुअल इंस्पेक्शन, ड्रेनेज सिस्टम, शोल्डर, क्रास फाल, ढाल, सड़क की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है।

    4200 करोड़ के एक्सेप्रसवे पर डामर से अधिक 'भ्रष्टाचार' का कंक्रीट


    मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री व केंद्रीय परिवहन मंत्री ने 13 जुलाई को जिस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर आधुनिक और सुरक्षित सड़क नेटवर्क की सौगात देने का दावा किया था, वह 20 दिन भी नहीं टिक सका। 4200 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर वर्षा की पहली फुहार ने ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिसका जवाब न निर्माण एजेंसी पीएनसी के पास है और न ही उसकी निगरानी करने वाले अधिकारियों के पास।


    विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार कर प्रदेश की पहचान बदलने की बात कही गई थी

    कई जगहों पर टूट कर बिखर चुके इस मार्ग में कई जर्क ऐसे हैं कि 120 की स्पीड में दौड़ने वाले वाहन जरा सी चूक में पलट जाएं। मानसून अपने पूरे शबाब पर भी नहीं पहुंचा है। केवल हल्की और रुक-रुककर हुई बारिश में सड़क की यह दुर्दशा सामने आ गई। यदि लगातार मूसलाधार वर्षा हुई तो दोबारा निर्माण की नौबत से इंकार नहीं किया जा सकता। सवाल केवल सड़क टूटने तक सीमित नहीं, इससे सरकार की उस मंशा को भी झटका लगा है, जिसमें विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार कर प्रदेश की पहचान बदलने की बात कही गई थी। सड़क टूटने से सरकार की किरकिरी ही नहीं हुई लोगों का भरोसा भी डगमगाया है।

    उठ रहे यह सवाल

    • यदि कोर कटिंग टेस्ट में मोटाई मानक के अनुरूप पाई गई थी, तो परत इतनी जल्दी क्यों उखड़ी।
    • मार्शल स्टेबिलिटी टेस्ट सफल था, तो पहली वर्षा और सामान्य यातायात में सड़क की पकड़ क्यों कमजोर हुई
    • यदि कंपेक्शन 98 प्रतिशत तक मानकों के अनुसार हुआ, तो सड़क बैठने या गड्ढे बनने की स्थिति क्यों आई।
    • यदि ड्रेनेज और क्रास-फाल सही था तो सड़क पर पानी रुकने की नौबत सामने क्यों आई।
    • इंजीनियर और विभागीय अधिकारियों ने गुणवत्ता प्रमाणित की थी, तो उद्घाटन के कुछ सप्ताह बाद ही मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ गई।

     

    ये भी जानें

    • एक्सप्रेसवे की उन्नाव-लखनऊ लेन पर 300 मीटर उखड़ी सड़क, काम जारी
    • किमी 64 बनी टोल के बाद अब तक का सबसे बड़ा पैच यहीं लगेगा
    • उन्नाव-लखनऊ व लखनऊ-उन्नाव लेन पर दो स्थानों पर आई नई खामी
    • अब तक एक्सप्रेसवे पर आई बड़ी खामियों की संख्या बढ़कर पहुंची 16
    • गुरुवार को नए आठ स्थानों पर उखड़ी सड़क पर काम शुरू
    • सभी कार्यों की मरम्मत के बाद एक्सप्रेसवे पर पैचिंग की संख्या 70 होगी
    • एक्सप्रेसवे पर गड्ढे नहीं, गड्ढों में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की बनी पहचान
    • फुहार में यह हालात, मूसलाधार बारिश हुई तो दोबारा करना पड़ सकता निर्माण
    • निर्माण एजेंसी ने फजीहत ही नहीं कराई, सरकार की मंशा पर भी फेर दिया पानी

     

    सभी कार्यों की मरम्मत के बाद एक्सप्रेसवे पर पैचिंग की संख्या 70 होगी

    एआई तकनीकी के साथ अत्याधुनिक मशीनों से बनाए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अब सुगम सफर के लिए शुक्रवार को 25वें दिन तक लग चुके कुल 70 पैबंदों के कारण जाना जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार को दो नई खामियां मिलीं। जिसमें उन्नाव-लखनऊ सड़क की अंतिम लेन पर किमी 30.1 से 29.8 तक गांव बाबाखेड़ा के पास 300 मीटर सड़क का डामर उखड़ने व फटने के बाद यह पूरा पैच तीन इंच की गहराई तक एजेंसी ने निकाल दिया है।

    डामर फूलकर ऊपर आ गया

    वहीं लखनऊ से उन्नाव सड़क में पहली लेन के किमी 63.8 से 63.9 गांव इजरायलखेड़ा पर पूर्व में की गई पैचिंग उखड़ने से सड़क पर गड्ढा सा हो गया है। डामर फूलकर ऊपर आ गया है। जिसके कारण यहां धीमी गति से निकल रहे वाहनों में उछाल हो रही है। इस स्थान पर आई मार्ग समस्या का निर्माण एजेंसी पीएनसी ने अभी संज्ञान नहीं लिया है।

    अब तक एक्सप्रेसवे पर आई बड़ी खामियों की संख्या बढ़कर पहुंची 16

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर आई अब तक की खामियों में शुक्रवार तक इनकी संख्या बढ़कर 16 पहुंच गई है। वहीं इन खामियों की मरम्मत के बाद ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के एक ओर 45 तो आवागमन की दोनों लेन कुल 90 किमी पर अब तक पैचिंग की संख्या 70 हो जाएगी। मार्ग पर पिछले छह दिनों से चल रही वृहद मरम्मत शुक्रवार को पूरी होने के बाद मार्ग पर डामर की परत बिछाए जाने के बाद सेंटर, साइड पट्टियां थर्मोप्लास्टिक पेंट करके बना दी गई है। इस स्थान पर अब निर्माण एजेंसी के कर्मचारी व वाहन नही है। जबकि, साफ-सफाई के लिए एक दर्जन कर्मचारी सुपरवाइजर की देखरेख में लगे देखे गए।

    अब तक इस तरह आई 16 बड़ी खामियां

    छह अगस्त

    • किमी 48 पर 100 मीटर की पुलिया में दोनों छोर पर 9-9 फीट दीवार फटी। तिरछे आकार में पूरी लेन की सड़क भी फट चुकी है। जिससे उक्त पुलिया की दीवारें फटने के साथ डिवाइडर फटा।
    • किमी 63.9 बेहटा नथई सिंह गांव, 50 मीटर पैचिंग उखड़ी, गड्ढा हुआ। यहां बुधवार को ही पैचव किया गया था।
    • रूट डायवर्जन के क्षेत्र में किमी 62.9 इजरायल खेड़ा, दो दिन पहले की गई पैंचिंग उखड़ी। यहां 80 मीटर सड़क एक फीट गहरी खोदकर दोबारा नई पैचिंग जारी।
    • उन्नाव-लखनऊ लेन में किमी संख्या 60.3 अड़ेरुवा गांव पर सड़क तीन मीटर तक धंसकर उखड़ गई।
    • किमी 57.4 बड़ौरा गांव, 10 मीटर चौड़ाई व 15 मीटर लंबाई में सड़क दबी। बीच का हिस्सा ऊपर उठा।
    • किमी 56.6 दुवा गांव, 10 मीटर सड़क दबी।
    • 46.8 से 46.7 भवानी खेड़ा गांव, 100 मीटर में 60 मीटर की नई पैचिंग बीच में 15 मीटर फटकर धंसी।
    • किमी 39.7 से 39.8 उम्मेदखेड़ा व बीकामऊ तक 60 मीटर लंबाई व 10 मीटर चौड़ाई में रोड फटकर उखड़ी। 30 मीटर तक गहरी नाली सड़क पर बनी।


    सात अगस्त

    • उन्नाव-लखनऊ सड़क की अंतिम लेन पर किमी 30.1 से 29.8 तक गांव बाबाखेड़ा के पास 300 मीटर सड़क का डामर उखड़ने व फटने के बाद तीन इंच की गहराई तक एजेंसी ने पैच निकाल दिया।
    • लखनऊ से उन्नाव सड़क की पहली लेन के किमी 63.8 से 63.9 गांव इजरायलखेड़ा निकट पूर्व में की गई पैचिंग उखड़ने से सड़क पर गड्ढा सा हो गया है।


    26 जुलाई से पांच अगस्त तक आईं समस्याएं

    • 26 जुलाई को फिर 29 की शाम कोरारी खुर्द गांव के सामने कोरारी टोल से एक किमी आगे किमी 64 पर दो बार सड़क धंसी।
    • बनी टोल से एक किमी पहले किमी 26 सोहरामऊ पर 30 जुलाई को चार मीटर सड़क धंसी।
    • बनी टोल के पास ही 26.4 किमी आनंदी वाटर पार्क के पास 31 जुलाई को सड़क धंसी।
    • 26.4 किमी आनंदी वाटर पार्क के पास ही काम होने के दौरान मार्ग धंसने से 31 जुलाई को ट्रक पलटा।
    • एक अगस्त को लोकार्पण स्थल पड़री के झाऊखेड़ा निकट किमी 46 पर लखनऊ उन्नाव से लखनऊ लेन पर जर्क हुआ।
    • चार अगस्त को किमी संख्या 63 (नेवरना ग्राम सभा के मजरे सेथरा) पर चार मीटर तक सड़क धंसी।


    प्रतिदिन हो रहा है 25 लाख रुपए टोल का नुकसान

    बुधवार को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के द्वारा रोकी गई टोल वसूली के बाद तीन दिन में एनएचएआई को लगभग 75 से 80 लख रुपए का नुकसान हो चुका है। कोरारी टोल पर मौजूद डिप्टी इंचार्ज राघवेंद्र ने बताया कि पूरे एक्सप्रेसवे पर प्रतिदिन लगभग 20 से 25 लख रुपए की टोल वसूली हम लोग कर रहे थे। क्योंकि फिलहाल टोल वसूली बंद हो गई है। इसलिए हमारे पास वाहनों की संख्या का भी कोई हिसाब नहीं है। यह बात जरूर है कि टोल बंद किए जाने के निर्णय के बाद एक्सप्रेसवे पर लगभग एक हजार तक वाहनों की संख्या बढ़ गई है।


    सड़क किनारे डंप मलबा, दुर्घटना की आशंका

    एक्सप्रेसवे पर आई सड़क खामियों में सबसे अधिक उन्नाव-लखनऊ लेन प्रभावित हुई। कुल खामियों के बीच अकेले इसी लेन पर 85 प्रतिशत समस्याएं आईं। निर्माण एजेंसी ने इस लेन की मरम्मत में सड़क से निकाले गए मलबे को मार्ग के किनारे ही पहाड़नुमा डंप कर दिया है। जिससे रात के अंधरे में जरा सी चूक पर वाहन इस मलबे से टकराकर सड़क पर और यदि इस पर वाहन चढ़ गया तो नीचे 30 फीट गहराई मे खेतों में जाकर गिरेगा।


    एनएच पर घटे, एक्सप्रेसवे पर बढ़े वाहन

    एक्सप्रेसवे पर तीन दिन से बंद हुई वसूली के बाद जहां नेशनल हाइवे कानपुर-लखनऊ पर जहां तीन सौ से पांच सौ वाहनों की संख्या कम हो गई है। वहीं एक्सप्रेसवे पर वाहनों की लगभग इतनी ही संख्या में इजाफा हो गया है। हाइवे के टोल मैनेजर दीपक यादव ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 18500 वाहन यहां से निकलते हैं। जिसमें पिछले तीन दिनों से 300 से 350 वाहनों की संख्या कम दर्ज की जा रही है।

     

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