Lucknow Kanpur Expressway देश का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे, कितना देना होगा टोल टैक्स, फिर भी समय और सुविधा में देगा बड़ा फायदा
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर कार से एक तरफ का टोल 275 रुपये तय किया गया है, जो एनएच-27 की तुलना में अधिक है। 18 किलोमीटर एलिवेटेड कॉरिडोर, तेज यात्रा, क ...और पढ़ें

HighLights
कार से एक तरफ का टोल 275 रुपये और 24 घंटे में वापसी पर 415 रुपये देना होगा।
एनएचएआई के अनुसार 18 किलोमीटर एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से निर्माण लागत और टोल दोनों अधिक हैं।
महंगे टोल के बदले यात्रियों को तेज, सुरक्षित, कम जाम और बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा।
जागरण संवाददाता, कानपुर। अगर आपको लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल ज्यादा लग रहा है, तो इसके पीछे की वजह जानना जरूरी है। 18 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कम यात्रा समय और बेहतर ड्राइविंग अनुभव इसकी खासियत है। जानिए नया टोल कितना है, क्यों महंगा है और यात्रियों को इससे क्या फायदे मिलेंगे।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल टैक्स अन्य हाईवे व एक्सप्रेसवे के मुकाबले महंगा है। 63 किमी दूरी के लिए कार से जाने पर एक ओर के लिए 275 रुपये और दोनों ओर के लिए 415 रुपये देने पड़ रहे। जबकि कानपुर-लखनऊ हाईवे पर एक ओर का 95 रुपये और 24 घंटे के अंदर वापसी पर 145 रुपये टोल टैक्स देना होगा।
टोल 10 गुणा महंगा
एनएचएआइ परियोजना निदेशक नकुल वर्मा ने बताया कि जहां एलीवेटेड एक्सप्रेसवे बनता है, वहां टोल 10 गुणा महंगा होगा। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे 18 किमी एलीवेटेड है। जहां मार्ग एलीवेटेड है वहां एनएचएआइ दो मार्गों की सुविधा दे रहा है। एक कानपुर-लखनऊ हाईवे है (एनएच 27) है, दूसरा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे।
उन्नाव में यहां हैं टोल प्लाजा
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उन्नाव में तीन मुख्य स्थानों पर आजाद मार्ग चौराहा (उन्नाव/शुक्लागंज), कोरारी गांव (अचलगंज के पास) और अमरसस (लालगंज मार्ग) से चढ़ा व उतरा जा सकेगा। वहीं लखनऊ क्षेत्र में बनी व अन्य एक टोल प्लाजा है। जहां अन्य मार्गों से एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन के जरिए कनेक्टिविटी दी गई है।
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इसलिए ज्यादा आई लागत
एक्सप्रेसवे के निर्माण में 4200 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जिसमें लगभग 12 किमी मीटर सिंगल पिलर पर एलीवेटेड होने के कारण बजट अधिक खर्च हुआ है। परियोजना प्रबंधक नकुल वर्मा ने बताया कि एलीवेटेड सड़क बनाने में लागत ज्यादा आई है। उन्नाव जिले के पैकेज दो में 90 मीटर चौड़ाई में भूमि अधिग्रहित की गई है, ताकि भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सके। इसके साथ ही विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों के आस-पास भूमि अधिग्रहण में भी बजट अधिक खर्च होने के कारण भी लागत बढ़ी है।
देश के पहला एक्सप्रेसवे में जिसमें एआइएमजीसी तकनीक का हुआ प्रयोग
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बनाने में देश में पहली बार आटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (एआइएमजीसी) तकनीक का प्रयोग किया गया है। अमेरिका व जर्मनी के बाद भारत सड़क निर्माण में इस तकनीक का प्रयोग करने वाला देश है। इस तकनीक के जरिए निर्धारित मात्रा व गुणक्ता में ही निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जा सकता है। यानि कार्यदायी संस्था सीमेंट,गिट्टी किसी भी निर्माण सामग्री में कोई गड़बड़ी नहीं कर सकता है। जिससे एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर कोई सवाल नहीं खड़े हो सकते हैं।
महंगा होने पर भी ज्यादा उपयोगी
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे हाईस्पीड शहरी कारिडोर है। लखनऊ में घनी आबादी के बीच 12 किमी का हिस्सा एलिवेटेड होने से स्थानीय यातायात, रेलवे क्रासिंग और चौराहों के जाम का असर सफर पर नहीं पड़ेगा। एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटा की डिजाइन रफ्तार के अनुरूप सफर लगभग 45 मिनट में तय होगा। इसके साथ ही एआइ कैमरों से निगरानी, शहर के अंदर साउंड प्रूफ रेलिंग बीम के साथ ही नियंत्रित प्रवेश-निकास इसकी विशेषताएं हैं। निर्माण लागत अधिक होने के बावजूद समय, ईंधन में होने वाली बचत इसे लंबी अवधि में अधिक लाभकारी है। जहां पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से लंबी दूरी के शहरों को जोड़ते हैं, वहीं यह देश के दो सबसे व्यस्त महानगरों के बीच रोजाना आवागमन को ध्यान में रखकर बनाया गया है।