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    Mahashivratri पर बन रहा विशेष योग: सर्वार्थ सिद्धि योग से जीवन के हर काम में सफलता, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त

    Updated: Wed, 11 Feb 2026 09:24 PM (IST)

    महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, जो सभी कार्यों में सफलता दिलाएगा। उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जि ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग।

    2. उत्तराषाढ़ा-श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग, अत्यंत फलदायी।

    3. पूजा-साधना से जीवन में सुख, शांति, सफलता।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। यह योग जीवन के सभी कार्यों में सफलता और उन्नति का संकेत देता है। महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का विशेष युग्म संयोग भी बन रहा है। यह एक दुर्लभ और अत्यंत फलदायी योग है।

    ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि शिवरात्रि को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और उसके बाद श्रवण नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि व अन्य शुभ योग (व्यतीपात, वरियान) रहेंगे। यह पूजा-साधना के लिए उत्तम माने गए हैं। महाशिवरात्रि का पर्व जब मनाया जाता है जब चतुर्दशी तिथि निशीथ काल के समय भी लग रही हो। ऐसे में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।

    व्यतीपात योग पूरे दिन विद्यमान रहेगा, जो आध्यात्मिक साधना और मंत्र जाप के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का संयोग शिव-शक्ति मिलन का प्रतीक है। इससे सूर्य की ऊर्जा (तेज, सफलता) और चंद्रमा का फल (मानसिक शांति, शीतलता) दोनों प्राप्त होंगे। किए गए कार्यों में सिद्धि मिलेगी। इस योग में पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होगी।

    पं.दीपक पांडेय ने बताया कि मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शिव का पंचाक्षर मंत्र और पार्थिव शिवलिंग पूजन का विधान है। व्याधियों के नास के लिए कुसायुक्त जलाभिषेक करना चाहिए। दही से अभिषेक से धन की प्राप्ति होती है। घी और शहद के अभिषेक से मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

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    17 फरवरी को कंकण सूर्य ग्रहण

    साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लग रहा है। इसका आरंभ दोपहर 03.26 बजे होगा सूर्य ग्रहण का मध्य समय शाम 05.42 बजे और इस ग्रहण का समापन शाम 07.57 बजे होगा। ज्योतिष सेवा संस्थान के अध्यक्ष पवन तिवारी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं में सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल का विशेष महत्व माना जाता है। सामान्य तौर पर सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इसमें पूजा-पाठ और शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है। हालांकि 17 फरवरी का सूर्य ग्रहण देश में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भी देश में मान्य नहीं होगा। ऐसे में लोगों को न तो सूतक से जुड़ी धार्मिक पाबंदियों का पालन करना होगा और न ही दैनिक कार्यों पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा। यह सूर्य ग्रहण केवल खगोलीय दृष्टि से खास रहेगा।