18 दिन बाद कानपुर लाया गया मर्चेंट नेवी ऑफिसर का शव, परिवार का अंतिम संस्कार से इनकार; कहा- 'शहीद' घोषित करे सरकार
यूक्रेन के ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर 18 दिन बाद कानपुर पहुंचा। पत्नी शालू बेसुध हो गईं, वही ...और पढ़ें
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HighLights
सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर 18 दिन बाद कानपुर पहुंचा।
यूक्रेन के ड्रोन हमले में मर्चेंट नेवी ऑफिसर की मौत हुई।
परिवार ने शहीद का दर्जा और आर्थिक सहायता की मांग की।
जागरण संवाददाता, कानपुर। यूक्रेन के ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले शास्त्री नगर निवासी मर्चेंट नेवी के चीफ आफिसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर 18 दिन बाद बुधवार शाम एंबुलेंस से घर पहुंचा। सागर का शव एंबुलेंस से उतरते ही पत्नी, मां और भतीजी लिपटकर रोने लगी। इस दौरान पत्नी रो-रोकर बेसुध हो गई। किसी तरह स्वजन ने उन्हें संभाला।
सागर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर न आने पर स्वजन ने नाराजगी जताई और खुद ही पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर सलामी दी। स्वजन ने सागर को शहीद का दर्जा देने की मांग की है। सागर का पार्थिव घर पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया है जहां गुरुवार को भैरोघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।
शास्त्री नगर ऊंचा पार्क निवासी सागर गुप्ता मर्चेंट नेवी में चीफ आफीसर के पद पर कार्यरत थे। वह डीजी शिपिंग के माध्यम से नवी मुंबई के ठाणे स्थित एवन नेवीगेटर्स मरींस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में भर्ती हुए थे। सागर 14 जून को वह घर से निकले थे और तुर्किए होते हुए रूस पहुंचे थे।
रूस और यूक्रेन के बीच कालासागर में युद्ध के दौरान 18 जुलाई को यूक्रेन ने ड्रोन से कार्गों शिप पर हमला कर दिया जिससे उसमें आग लग गई इस दौरान सागर की मौत हो गई थी। सागर के परिवार में मां रमादेवी,पत्नी शालू,आठ माह का बेटा कृष्णा और पांच साल की बेटी गौरी है। 18 जुलाई को मर्चेंट नेवी ने स्वजन को सागर के युद्ध में मारे जाने की सूचना दी थी जबकि 23 जुलाई को डीजी शिपिंग ने स्वजन को इसकी जानकारी दी।
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मंगलवार रात ही सागर के बड़े भाई मनीष गुप्ता और साला शोभित दिल्ली पहुंचे। जहां बुधवार सुबह साढ़े सात बजे रूस की राजधानी मास्को से एयर एंबुलेंस से सागर का पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा। जहां से कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद एंबुलेंस से शाम चार बजे सागर का पार्थिव शरीर शास्त्री नगर स्थित घर पहुंचा। सागर के अंतिम दर्शन को पड़ोसी, रिश्तेदार और मुहल्ले के लोगों के साथ सैकड़ों की भीड़ थी।
भतीजी खुशी ने जैसे ही सागर का सागर के पार्थिव शरीर को बिना तिरंगे के देखा वह चीखते हुए बोली कम से कम सम्मान तो दे देते। इसके बाद वह खुद भाई के साथ जाकर बाजार से तिरंगा खरीदकर लाई और शव को लपेटा। बेटे का शव देखकर मां रमादेवी और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
जानकारी पाकर सपा नेता विनय गुप्ता,सम्राट विकास और पूर्व पार्षद राघवेंद्र मिश्रा भी पहुंचे। स्वजन ने तहसीलदार विनय कुमार द्विवेदी को मांग पत्र सौंपा। जिसमें सागर की पत्नी शालू को सरकारी नौकरी,दो करोड़ की आर्थिक सहायता और सागर को शहीद का दर्जा देने की मांग की।
हमले में आठ साथियों को बचाया, शहीद का दर्जा मिले
सपा नेता विनय गुप्ता ने बताया कहा कि यूक्रेन के ड्रोन हमले में सागर के शिप पर माैजूद आठ क्रू सदस्यों को बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। सागर अगर चाहते तो अपनी जान बचाकर भाग भी सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। दूसरों की जान बचाने में शहीद होने के कारण सागर को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। वहीं इस दौरान कुछ लोगों ने इस मुद्दे पर राजनीति न करने की बात कही।
प्रशासन और सांसद के प्रयासों से इतनी जल्दी आ सका शव
यूक्रेन के ड्रोन हमले में जान गंवाने की खबर की जानकारी पाकर डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह और अपर पुलिस आयुक्त डा. विपिन ताडा स्वजन से मिलने पहुंचे। इसके बाद डीएम ने तीन सदस्यीय टीम गठित की। इसके साथ ही पूर्व पार्षद राघवेंद्र मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से स्वजन की बात कराने के साथ ही सांसद रमेश अवस्थी को उनके घर लेकर पहुंचे। जहां सांसद ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा जिसके बाद वहां ई-मेल से जवाब आया कि सागर का पार्थिव शरीर रूस की राजधानी मास्को भेजा गया है। मंगलवार को स्वजन को मैसेज भेजकर बुधवार को दिल्ली पहुंचने को कहा गया जिसके बाद एयर एंबुलेंस से सागर का पार्थिव शरीर मास्को से नई दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा।