नंदिनी योजना का सच: सब्सिडी अटकी, गायें बीमार और पशुपालकों पर दोहरी मार
कानपुर में नंदिनी डेयरी योजना पशुपालकों के लिए मुसीबत बन गई है, जहां सब्सिडी अटकी है और बीमार व मृत पशुओं से भारी नुकसान हो रहा है। ...और पढ़ें

HighLights
सब्सिडी में देरी से पशुपालकों को बैंक ब्याज भरना पड़ रहा।
बीमार और मृत पशुओं से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान।
योजना में पशु स्वास्थ्य परीक्षण और बीमा में खामियां।
जागरण संवाददाता, कानपुर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नंदिनी डेयरी योजना का लाभ लेने वाले कई पशुपालकों के लिए यह योजना राहत की बजाय मुसीबत बनती जा रही है। एक ओर महीनों से सब्सिडी का इंतजार है और बैंक का ब्याज जेब से भरना पड़ रहा है।
वहीं, दूसरी ओर बीमार और मृत पशुओं ने उनकी कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे हैं कि योजना शुरू करते ही पशुपालकों पर मानो 'सिर मुंडाते ही ओले पड़ गए।'
मऊ नखत के पशुपालक अमित पुष्कर का मामला सबसे गंभीर है। उनका आरोप है कि पांच मार्च को पशु चिकित्सालय बरीपाल की टीम ने उनकी साहीवाल गायों के सात बछड़ों को पेट के कीड़ों की दवा पिलाई। दवा देने के कुछ ही घंटों बाद सभी बछड़ों की हालत बिगड़ गई और अगले 24 घंटे में सातों की मौत हो गई।
अमित का आरोप है कि पोस्टमार्टम की मांग के बावजूद सरकारी डॉक्टरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में जिलाधिकारी से शिकायत पर जांच तो हुई, लेकिन अब तक किसी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मृत बछड़ों का मुआवजा भी नहीं मिला।
दूसरा मामला बिलगवां स्थित नंदिनी डेयरी का है, जहां एक साहीवाल गाय थनैला (मैस्टाइटिस) रोग की चपेट में आ गई। जान बचाने के लिए उसका एक थन काटना पड़ा, जिससे दूध उत्पादन घट गया।
पशु का बीमा तो है लेकिन उसमें थन कटने का कोई मुआवजा नहीं है, बीमा कंपनी केवल मरने पर ही पैसा देती है।जिसके कारण पूरा आर्थिक नुकसान पशुपालक को ही उठाना पड़ा।
इसी तरह एक अन्य लाभार्थी को राजस्थान के श्रीगंगानगर से जो गायें उपलब्ध कराई गईं, उनमें से एक पहले से लंपी रोग से संक्रमित होने का आरोप है।
कानपुर पहुंचते-पहुंचते उसे गंभीर थनैला रोग हो गया और इलाज के दौरान उसके दो थन काटने पड़े। अब गाय ने दूध देना लगभग बंद कर दिया है। न तो बीमा की राशि मिली और न ही किसी प्रकार का मुआवजा। उल्टा चारे, दवा और देखभाल का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
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योजना के लाभार्थियों का कहना है कि सब्सिडी अभी तक नहीं मिली, बैंक का ब्याज अलग से देना पड़ रहा है और बीमार पशुओं के कारण रोजाना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि योजना में पशुओं की गुणवत्ता, स्वास्थ्य परीक्षण, बीमा और चिकित्सा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई नंदिनी योजना कहीं उनके लिए आर्थिक संकट का कारण तो नहीं बन गई है।